सिर्फ गेट बनकर रह गया AIIMS दरभंगा? RTI में सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई

दरभंगा में प्रस्तावित एम्स (AIIMS) को लेकर एक आरटीआई खुलासे ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। AIIMS दरभंगा की घोषणा हुए 11 साल और शिलान्यास हुए करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी मुख्य अस्पताल भवन और शैक्षणिक ब्लॉक का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
स्थिति यह है कि फिलहाल पूरे प्रोजेक्ट की पहचान केवल एक “मुख्य गेट” बनकर रह गई है।
🚨 RTI में क्या खुलासा हुआ?
India Today.in द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में AIIMS दरभंगा निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रही सरकारी कंपनी HSCC Ltd ने बताया कि मुख्य प्रवेश द्वार (गेट) को लेकर कोई अलग टेंडर या स्वीकृति पत्र जारी नहीं किया गया था। कंपनी ने कहा कि यह कार्य अभी भी “प्रक्रिया में” है।
इस खुलासे के बाद सवाल उठने लगे हैं कि आखिर वह गेट किसके आदेश पर बनाया गया, जो लंबे समय से परियोजना का प्रतीक बना हुआ है।
🏥 अस्पताल भवन का काम अब तक शुरू नहीं
आरटीआई जवाब के अनुसार, अस्पताल भवन, अकादमिक ब्लॉक, रिहायशी परिसर और अन्य मुख्य ढांचों का निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हुआ है। HSCC ने बताया कि जरूरी मंजूरी मिलने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 नवंबर 2024 को इस परियोजना का शिलान्यास किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक मुख्य निर्माण कार्य नहीं दिख रहा है।
📈 परियोजना लागत में भारी बढ़ोतरी
AIIMS दरभंगा की घोषणा वर्ष 2015 में बिहार के दूसरे एम्स के रूप में की गई थी। शुरुआत में इस परियोजना की अनुमानित लागत 1,264 करोड़ रुपये तय की गई थी।
लेकिन अब संशोधित लागत बढ़कर 2,006 करोड़ रुपये पहुंच गई है, जो मूल बजट से लगभग 59 प्रतिशत अधिक है।
💰 खर्च हुआ 1 प्रतिशत से भी कम
आरटीआई में यह भी सामने आया कि अब तक परियोजना पर कुल लगभग 19.39 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं। यह राशि कुल संशोधित बजट का 1 प्रतिशत से भी कम है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 21.33 लाख रुपये और 2025-26 में लगभग 19.18 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
⏳ 2029 तक पूरा होने का दावा
HSCC Ltd ने दावा किया है कि AIIMS दरभंगा जुलाई 2029 तक चालू हो सकता है। हालांकि निर्माण कार्य शुरू नहीं होने और खर्च की धीमी रफ्तार को देखते हुए इस समयसीमा पर भी सवाल उठ रहे हैं।
📌 मिथिला क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण परियोजना
AIIMS दरभंगा को मिथिला क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने वाली बड़ी परियोजना माना जा रहा है। लेकिन वर्षों की देरी और अधूरे निर्माण के कारण लोगों में नाराजगी और सवाल दोनों बढ़ते जा रहे हैं।
