दरभंगा में पानी के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट? RTI खुलासे से मचा हड़कंप

दरभंगा में पानी के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट? RTI…
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दरभंगा में पानी के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट? RTI…

दरभंगा जिले में किसानों को सस्ती सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लगाए गए सरकारी नलकूप अब भ्रष्टाचार और बदहाली की कहानी बनते जा रहे हैं। सूचना के अधिकार (RTI) से हुए खुलासे ने जिले में करोड़ों रुपये की अनियमितता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार जिले में लगाए गए 405 राजकीय नलकूपों में से 291 नलकूप बंद पड़े हैं। इनमें यांत्रिक खराबी, बिजली संबंधी समस्या, रखरखाव की कमी और कर्मियों की अनुपलब्धता जैसी वजहें बताई गई हैं।

🚨 करोड़ों रुपये खर्च, फिर भी बंद पड़े नलकूप

इन नलकूपों को दोबारा चालू कराने के लिए लघु जल संसाधन विभाग ने करीब 22.54 करोड़ रुपये का प्राक्कलन तैयार किया था। इसके तहत लघु सिंचाई प्रमंडल, दरभंगा द्वारा संबंधित पंचायतों के खातों में दो चरणों में लगभग 7.96 करोड़ रुपये भेजे गए।

लेकिन आरोप है कि पंचायत प्रतिनिधियों, पंचायत सचिवों और संवेदकों की मिलीभगत से यह राशि केवल कागजों पर खर्च दिखा दी गई, जबकि जमीनी स्तर पर अधिकांश नलकूप अब भी बंद हैं।

🌾 किसानों पर बढ़ा सिंचाई का बोझ

नलकूप बंद रहने के कारण किसानों को निजी साधनों से सिंचाई करानी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि एक कट्ठा खेत की सिंचाई में 125 से 150 रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है।

अगर सरकारी नलकूप सही तरीके से चालू होते, तो हजारों हेक्टेयर जमीन पर कम लागत में सिंचाई संभव हो सकती थी।

📄 RTI में सामने आए आंकड़े

मानवाधिकार संरक्षण प्रतिष्ठान के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुमार चौधरी को सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी उपलब्ध कराई गई। RTI में दिए गए आंकड़ों और जमीनी स्थिति में काफी अंतर बताया जा रहा है।

🗣️ किसानों ने उठाई कार्रवाई की मांग

बिठौली गांव के किसान दिवाकर राय ने कहा कि सरकार को राजकीय नलकूपों को जल्द चालू कराने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

वहीं पघारी निवासी बद्रीनारायण चौधरी का कहना है कि पंचायतों के बजाय विभाग को सीधे अपने स्तर पर नलकूपों की मरम्मत और संचालन की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

⚙️ विभाग का क्या कहना है?

लघु सिंचाई प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता सुबोध कुमार के अनुसार जिले में 405 में से 273 नलकूप चालू हालत में हैं, जबकि 101 बंद और 31 परित्यक्त घोषित किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि बंद 101 नलकूपों में से 66 के जीर्णोद्धार के लिए पंचायतों को राशि दी जा चुकी है। बाकी नलकूपों के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है और मंजूरी मिलते ही कार्य शुरू किया जाएगा।

हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई जगहों पर पैसा खर्च होने के बावजूद नलकूप अब भी बंद पड़े हैं।

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