बिहार कैबिनेट के बड़े फैसले : दरभंगा से बक्सर तक सड़क परियोजनाओं को मंजूरी, जमीन अधिग्रहण पर बढ़ा मुआवजा

पटना। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई बिहार कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण और सरकारी कर्मचारियों से जुड़े कई अहम फैसलों पर मुहर लगाई गई। बैठक में सबसे बड़ा फैसला नई बिहार रैयती भूमि क्रय नीति 2026 को लेकर लिया गया, जिसके तहत अब सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन देने वाले लोगों को पहले से कहीं अधिक मुआवजा मिलेगा।
सरकार के इस फैसले को राज्य में सड़क, सिंचाई और आधारभूत संरचना परियोजनाओं को गति देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। नई नीति के अनुसार शहरों में जमीन अधिग्रहण होने पर जमीन मालिकों को बाजार मूल्य का दोगुना मुआवजा दिया जाएगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह राशि बाजार भाव के चार गुना तक होगी। इसके साथ ही जमीन देने वाले लोगों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी।
सरकार ने लोगों को राहत देते हुए यह भी तय किया है कि सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन बेचने पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री शुल्क नहीं लिया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले के मुकाबले आसान और तेज होगी।
कैशलेस इलाज की सुविधा शुरू
कैबिनेट बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया। सरकार ने विधायक, पूर्व विधायक, IAS-IPS अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए कैशलेस इलाज की सुविधा लागू करने का निर्णय लिया है। अब अस्पताल में भर्ती होने के बाद मरीजों को तत्काल जेब से खर्च नहीं करना पड़ेगा। इस व्यवस्था से हजारों सरकारी कर्मियों और उनके परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
PMCH में बनेगा आधुनिक स्पाइन सेंटर
पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) में रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियों और सड़क हादसों में घायल मरीजों के इलाज के लिए अत्याधुनिक स्पाइन सेंटर स्थापित किया जाएगा। यहां एंडोस्कोपिक सर्जरी, स्पाइन टीबी और गंभीर न्यूरो-संबंधी बीमारियों का इलाज संभव होगा। इस परियोजना के लिए सरकार ने 39 नए पदों की स्वीकृति भी दी है।
छोटे अस्पतालों और क्लीनिकों के लिए नई व्यवस्था
राज्य सरकार निजी अस्पतालों और क्लीनिकों के लिए भी नई नियमावली लाने जा रही है। इसके तहत 1 से 40 बेड वाले छोटे अस्पताल, पैथोलॉजी सेंटर, डेंटल क्लीनिक और निजी ओपीडी को रजिस्ट्रेशन और निगरानी व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा। जिला और राज्य स्तर पर अलग-अलग मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया जाएगा ताकि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बनी रहे।
सचिवालय कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत
कैबिनेट बैठक में बिहार सचिवालय कर्मचारियों के पदनाम में भी बदलाव किया गया। अब जूनियर क्लर्क को “सचिवालय सहायक” और सीनियर क्लर्क को “वरीय सचिवालय सहायक” कहा जाएगा। इसके अलावा ऑफिस अटेंडेंट के प्रमोशन कोटा को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। प्रोबेशन अवधि भी दो वर्ष से घटाकर एक वर्ष कर दी गई है।
कई बड़ी सड़क परियोजनाओं को मंजूरी
बैठक में राज्य की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई। दरभंगा-जाले रोड के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के लिए करीब 990 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। SH-97 सड़क के लगभग 47.8 किलोमीटर हिस्से का निर्माण कराया जाएगा।
इसके अलावा सुपौल-अररिया सड़क परियोजना के लिए 703 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। बक्सर और समस्तीपुर की विभिन्न सड़क परियोजनाओं पर भी लगभग 982 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य में आवागमन बेहतर होगा और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
सिंचाई और बाढ़ सुरक्षा पर भी फोकस
कैबिनेट ने कोसी सिंचाई योजना और बाढ़ सुरक्षा परियोजनाओं के लिए 102.98 करोड़ रुपये जारी करने की स्वीकृति दी है। मधुबनी जिले में नहरों के आधुनिकीकरण का कार्य किया जाएगा, जिससे लगभग 89 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा।
इसके साथ ही मधुबनी और सुपौल जिलों में बाढ़ से सुरक्षा के लिए बांधों को मजबूत करने का भी निर्णय लिया गया है, ताकि हर वर्ष आने वाली बाढ़ से लोगों को राहत मिल सके।
