📍 पटना/बिहार | DarbhangaNews.in
बिहार में नया बिजली कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए अब खर्च को लेकर पहले से ज्यादा स्पष्ट व्यवस्था लागू की गई है। नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड ने 150 किलोवाट तक के नए बिजली कनेक्शन के लिए सर्विस कनेक्शन शुल्क तय कर दिए हैं। यह व्यवस्था बिहार विद्युत विनियामक आयोग के निर्देशों के आधार पर लागू की गई है।
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा असर यह होगा कि उपभोक्ता को आवेदन के समय ही पता चल सकेगा कि उसके लोड और कनेक्शन श्रेणी के हिसाब से कितना शुल्क लगेगा। पहले कई मामलों में साइट निरीक्षण, लाइन विस्तार, सामग्री और अन्य खर्च को लेकर उपभोक्ताओं में भ्रम रहता था। अब 150 किलोवाट तक के विद्युतीकृत क्षेत्रों में LT सिंगल फेज, LT थ्री फेज और HT कनेक्शन के लिए निर्धारित शुल्क के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
बिजली कंपनियों ने अपने सभी विद्युत आपूर्ति अंचलों, प्रमंडलों और उपप्रमंडलों को निर्देश जारी कर दिए हैं। नए कनेक्शन के लिए अंचलवार एजेंसियों का चयन भी कर लिया गया है, जो निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपभोक्ताओं को नया बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराएंगी।
📌 मुख्य बातें
✅ बिहार में 150 किलोवाट तक नए बिजली कनेक्शन का शुल्क तय
✅ NBPDCL और SBPDCL दोनों क्षेत्रों में व्यवस्था लागू
✅ LT सिंगल फेज, LT थ्री फेज और HT श्रेणी शामिल
✅ उपभोक्ताओं को आवेदन के समय ही खर्च की स्पष्ट जानकारी मिलेगी
✅ विद्युतीकृत क्षेत्रों में कनेक्शन प्रक्रिया सरल और पारदर्शी होगी
✅ मीटर तक जरूरी विद्युत संरचना उपलब्ध कराने की बात कही गई
✅ अंचलवार एजेंसियों का चयन पूरा
✅ BERC के निर्देशों के आधार पर शुल्क तय
✅ 2026-27 में बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं, लेकिन नया कनेक्शन शुल्क अलग विषय है
⚡ LT सिंगल फेज कनेक्शन में क्या शुल्क लगेगा?
LT सिंगल फेज श्रेणी में 7 किलोवाट तक के नए कनेक्शन शामिल होंगे। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार 3 किलोवाट तक के कनेक्शन के लिए ₹900 प्रति किलोवाट की दर से शुल्क लगेगा। यानी 3 किलोवाट तक कुल ₹2,700 का आधार शुल्क बनेगा। यदि उपभोक्ता 3 किलोवाट से अधिक लोड लेता है, तो ₹2,700 के साथ प्रत्येक अतिरिक्त किलोवाट पर अलग शुल्क जोड़ा जाएगा।
BERC के अंतिम आदेश में भी LT सिंगल फेज कनेक्शन के लिए 3 किलोवाट तक ₹2,700 और उससे अधिक लोड पर अतिरिक्त प्रति किलोवाट शुल्क का प्रावधान दर्ज है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था विद्युतीकृत क्षेत्र में वितरण मेन से 35 मीटर तक की दूरी के लिए है; उससे अधिक दूरी पर लाइन विस्तार शुल्क लागू हो सकता है।
🔌 LT थ्री फेज कनेक्शन में दो श्रेणियां
LT थ्री फेज कनेक्शन को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहला, 5 किलोवाट से 19 किलोवाट तक का कनेक्शन। इस श्रेणी में 5 किलोवाट तक ₹4,500 का शुल्क तय है। 5 किलोवाट से ऊपर प्रत्येक अतिरिक्त किलोवाट पर ₹1,500 अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
दूसरा, 20 किलोवाट से 44 किलोवाट तक का LT थ्री फेज कनेक्शन। इस श्रेणी में 20 किलोवाट तक ₹21,000 का शुल्क तय है और 20 किलोवाट से अधिक लोड होने पर प्रत्येक अतिरिक्त किलोवाट पर ₹2,000 अतिरिक्त शुल्क देना होगा। यह व्यवस्था छोटे उद्योग, बड़े दुकान, वर्कशॉप, निजी संस्थान और अधिक लोड वाले उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण होगी।
🏭 HT श्रेणी में 45 से 150 किलोवाट तक शुल्क
HT श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए 45 किलोवाट से 150 किलोवाट तक नया बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार इस श्रेणी में ₹7,000 प्रति किलोवाट की दर से सर्विस कनेक्शन शुल्क निर्धारित किया गया है।
BERC के आदेश में HT उपभोक्ताओं के लिए 45 किलोवाट पर ₹3,46,709 और उससे अधिक लोड पर ₹7,000 प्रति KVA की दर से अतिरिक्त शुल्क का उल्लेख है। इसका मतलब है कि बड़े कनेक्शन में वास्तविक देय राशि लोड, श्रेणी और तकनीकी स्थिति के आधार पर तय होगी, इसलिए आवेदन के समय बिजली कंपनी के पोर्टल या कार्यालय से अंतिम शुल्क की पुष्टि जरूरी है।
🧾 मीटर तक संरचना देने की जिम्मेदारी
बिजली वितरण कंपनियों ने साफ किया है कि निर्धारित सर्विस कनेक्शन शुल्क जमा करने के बाद तकनीकी आवश्यकता के अनुसार उपभोक्ता के बिजली मीटर यानी पॉइंट ऑफ सप्लाई तक जरूरी विद्युत संरचना उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें सर्विस तार भी शामिल होगा। इसके बाद उपभोक्ता को नया बिजली कनेक्शन जारी किया जाएगा।
BERC के आदेश में भी उपभोक्ता अधिकार नियम 2020 का उल्लेख है, जिसके तहत विद्युतीकृत क्षेत्रों में 150 किलोवाट तक नए कनेक्शन के लिए कनेक्शन शुल्क को लोड और कनेक्शन श्रेणी के आधार पर पहले से तय करने का उद्देश्य रखा गया है, ताकि हर मामले में अलग-अलग साइट अनुमान की जरूरत कम हो।
📲 आवेदन करने वालों को क्या फायदा?
इस व्यवस्था से नए घर, दुकान, छोटा उद्योग, गोदाम, निजी संस्थान या commercial setup शुरू करने वाले उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। उन्हें पहले से पता रहेगा कि किस लोड पर किस श्रेणी में कितना कनेक्शन शुल्क लगेगा। इससे अनावश्यक देरी, अनुमान में भ्रम और अलग-अलग स्तर पर पूछताछ की जरूरत कम होगी।
NBPDCL की वेबसाइट पर NSC Charges & Timeline सेक्शन में 150 किलोवाट तक विद्युतीकृत क्षेत्रों के नए कनेक्शन शुल्क से जुड़ा दस्तावेज सूचीबद्ध है। इससे साफ है कि बिजली कंपनियां नए कनेक्शन शुल्क और समयसीमा को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही हैं।
💡 बिजली बिल दर और कनेक्शन शुल्क अलग-अलग हैं
यहां एक बात समझना जरूरी है कि नया कनेक्शन शुल्क और हर महीने लगने वाला बिजली बिल अलग-अलग विषय हैं। कनेक्शन शुल्क नया कनेक्शन लेने या जरूरी संरचना उपलब्ध कराने के लिए लिया जाता है, जबकि बिजली बिल में फिक्स्ड चार्ज और ऊर्जा खपत के आधार पर यूनिट चार्ज लगता है।
BERC के 2026-27 टैरिफ चार्ट के अनुसार NBPDCL और SBPDCL के लिए अलग-अलग श्रेणियों में फिक्स्ड चार्ज और ऊर्जा शुल्क जारी किए गए हैं। वहीं हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार 2026-27 के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं की गई थी और राज्य के 2.22 करोड़ उपभोक्ताओं को राहत मिली थी।
📊 नए बिजली कनेक्शन शुल्क एक नजर में
| कनेक्शन श्रेणी | लोड सीमा | शुल्क |
|---|---|---|
| LT सिंगल फेज | 3 किलोवाट तक | ₹900 प्रति किलोवाट / कुल ₹2,700 तक |
| LT सिंगल फेज | 3 किलोवाट से 7 किलोवाट तक | ₹2,700 + अतिरिक्त किलोवाट पर अलग शुल्क |
| LT थ्री फेज | 5 से 19 किलोवाट | 5 किलोवाट तक ₹4,500 + अतिरिक्त किलोवाट पर ₹1,500 |
| LT थ्री फेज | 20 से 44 किलोवाट | 20 किलोवाट तक ₹21,000 + अतिरिक्त किलोवाट पर ₹2,000 |
| HT श्रेणी | 45 से 150 किलोवाट | ₹7,000 प्रति किलोवाट/KVA के आधार पर शुल्क |
| लागू क्षेत्र | विद्युतीकृत क्षेत्र | 150 किलोवाट तक |
⚠️ नोट: अंतिम देय राशि कनेक्शन श्रेणी, लोड, वितरण मेन से दूरी और बिजली कंपनी की लागू शर्तों के आधार पर तय हो सकती है। BERC आदेश में 35 मीटर से अधिक दूरी पर लाइन विस्तार शुल्क का भी प्रावधान है।
📍 दरभंगा और उत्तर बिहार के उपभोक्ताओं पर असर
दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर और उत्तर बिहार के अन्य जिलों में NBPDCL के तहत उपभोक्ता आते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नया घर, दुकान, आटा चक्की, वेल्डिंग दुकान, कोचिंग, निजी क्लीनिक, गोदाम या छोटे उद्योग के लिए नया कनेक्शन लेने वालों को इस व्यवस्था से शुल्क की स्पष्ट जानकारी मिलेगी।
दरभंगा जैसे जिले में कई लोग घरेलू 1 किलोवाट कनेक्शन लेकर वास्तविक उपयोग 3 से 5 किलोवाट तक कर लेते हैं। नई व्यवस्था उपभोक्ताओं को सही लोड का कनेक्शन लेने के लिए भी प्रेरित कर सकती है, ताकि भविष्य में ओवरलोड, तार जलना, ट्रांसफॉर्मर पर दबाव और बिल विवाद जैसी समस्याएं कम हों।
🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण
बिहार में नए बिजली कनेक्शन शुल्क को तय करना उपभोक्ता पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है। अब उपभोक्ता आवेदन से पहले ही अपने लोड के हिसाब से अनुमान लगा सकेगा कि नया कनेक्शन लेने में कितना खर्च आएगा। इससे विभागीय कार्यालयों में अनावश्यक चक्कर और अस्पष्ट अनुमान की समस्या कम हो सकती है।
हालांकि इस व्यवस्था की असली सफलता जमीन पर लागू करने में होगी। एजेंसियों द्वारा समय पर कनेक्शन देना, सही शुल्क बताना, अतिरिक्त राशि की मांग न करना और लाइन विस्तार की स्थिति में पारदर्शी गणना करना जरूरी होगा। बिजली कंपनियों को ऑनलाइन कैलकुलेटर या पोर्टल पर श्रेणीवार शुल्क दिखाना चाहिए, ताकि उपभोक्ता खुद भी अनुमान लगा सके।
दरभंगा और उत्तर बिहार के ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा जरूरत सही लोड, मजबूत तार, पर्याप्त ट्रांसफॉर्मर क्षमता और समयबद्ध कनेक्शन की है। अगर शुल्क तय होने के साथ सेवा समयसीमा भी सख्ती से लागू होती है, तो उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत मिलेगी।








