📍 पटना, बिहार | DarbhangaNews.in
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में रिकॉर्ड मतदान को विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) से जोड़ते हुए कहा है कि मतदाता सूची के सफल पुनरीक्षण के बाद राज्य में चुनावी भागीदारी बढ़ी। उन्होंने 16 अगस्त 2026 को पटना पहुंचने पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह दावा किया। ज्ञानेश कुमार फिलहाल भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त हैं।
CEC ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में पुरुषों और महिलाओं ने बड़ी संख्या में मतदान किया और राज्य में पिछले सभी रिकॉर्ड टूट गए। उन्होंने बिहार के मतदान प्रतिशत की तुलना अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन और जापान जैसे देशों में अलग-अलग समय पर हुए चुनावों के मतदान से भी की। हालांकि यह CEC का तुलनात्मक दावा है; अलग देशों में चुनाव का प्रकार, मतदाता पंजीकरण व्यवस्था और मतदान वर्ष अलग होने के कारण इसे सीधे समान परिस्थितियों वाली तुलना नहीं माना जाना चाहिए।
2025 बिहार विधानसभा चुनाव में अंतिम रूप से रिपोर्ट किया गया मतदान करीब 67.25 प्रतिशत रहा, जिसे राज्य के विधानसभा चुनाव इतिहास का सर्वाधिक मतदान बताया गया है। चुनाव आयोग की 12 नवंबर 2025 की शुरुआती/अस्थायी विज्ञप्ति में 67.13 प्रतिशत दर्ज किया गया था और आयोग ने उसी समय स्पष्ट किया था कि आंकड़ा provisional है; बाद की चुनावी रिपोर्टों में कुल मतदान 67.25 प्रतिशत दर्ज हुआ।
📌 मुख्य बातें
✅ CEC ज्ञानेश कुमार ने बिहार के रिकॉर्ड मतदान को SIR से जोड़ते हुए इसे चुनावी भागीदारी बढ़ने का एक कारण बताया।
✅ उनका बयान 16 अगस्त 2026 को पटना पहुंचने के बाद सामने आया।
✅ बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अंतिम रिपोर्टेड मतदान करीब 67.25 प्रतिशत रहा।
✅ चुनाव आयोग की 12 नवंबर की प्रारंभिक विज्ञप्ति में 67.13 प्रतिशत मतदान दर्ज था और उसे provisional बताया गया था।
✅ उसी प्रारंभिक ECI आंकड़े में महिलाओं का मतदान 71.78 प्रतिशत और पुरुषों का 62.98 प्रतिशत दर्ज किया गया था।
✅ बिहार में SIR की प्रक्रिया 24 जून से 30 सितंबर 2025 तक चली।
✅ SIR शुरू होने से पहले करीब 7.89 करोड़ मतदाता दर्ज थे, जबकि 30 सितंबर की अंतिम सूची में करीब 7.42 करोड़ नाम थे।
✅ CEC ने बिहार के मतदान की तुलना अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन और जापान जैसे देशों से भी की।
✅ बिहार SIR को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी; 27 मई 2026 को अदालत ने SIR की वैधता बरकरार रखी।
🗳️ CEC ज्ञानेश कुमार ने क्या कहा?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार दो दिवसीय बिहार दौरे पर 16 अगस्त को पटना पहुंचे। एयरपोर्ट पर उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में बिहार में 2025 में कराए गए SIR और उसके बाद हुए विधानसभा चुनाव का उल्लेख किया।
उनका कहना था कि बिहार से मतदाता सूची के “शुद्धीकरण और अद्यतन” का बड़ा अभियान शुरू हुआ और इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी ने पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस तरह उन्होंने बढ़े हुए मतदान और SIR के बीच संबंध स्थापित किया।
यहां महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि “SIR के कारण ही मतदान बढ़ा” चुनाव आयोग/CEC की व्याख्या है। उपलब्ध मतदान आंकड़े रिकॉर्ड भागीदारी की पुष्टि करते हैं, लेकिन मतदान बढ़ने के पीछे SIR अकेला कारण था या दूसरे राजनीतिक-सामाजिक कारकों की भी भूमिका थी, यह अलग विश्लेषण का विषय है।
📈 बिहार ने बनाया मतदान का नया रिकॉर्ड
2025 के विधानसभा चुनाव में बिहार में मतदान की भागीदारी ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची। बाद की चुनावी रिपोर्टों में कुल मतदान करीब 67.25 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो राज्य के विधानसभा चुनाव इतिहास में सर्वाधिक बताया गया।
मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद 12 नवंबर 2025 को चुनाव आयोग की आधिकारिक विज्ञप्ति में मतदान 67.13 प्रतिशत बताया गया था। उसी विज्ञप्ति के फुटनोट में आयोग ने साफ किया था कि यह आंकड़ा provisional है और अंतिम आंकड़े बाद में साझा किए जाएंगे।
इसी शुरुआती आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक महिला मतदाताओं की भागीदारी 71.78 प्रतिशत थी, जबकि पुरुष मतदाताओं का मतदान 62.98 प्रतिशत दर्ज किया गया। इससे महिलाओं की असाधारण भागीदारी चुनाव की सबसे प्रमुख विशेषताओं में शामिल रही।
🔎 आखिर SIR में हुआ क्या था?
चुनाव आयोग ने बिहार में 24 जून 2025 से विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR शुरू किया था और अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर 2025 को प्रकाशित की गई।
ECI के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक प्रक्रिया शुरू होने के समय बिहार में लगभग 7.89 करोड़ मतदाता दर्ज थे। 1 अगस्त की मसौदा मतदाता सूची में करीब 7.24 करोड़ नाम थे। इसके बाद दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया में 3.66 लाख अपात्र मतदाता मसौदा सूची से हटाए गए और Form 6 के माध्यम से करीब 21.53 लाख पात्र मतदाता जोड़े गए। 30 सितंबर की अंतिम मतदाता सूची में लगभग 7.42 करोड़ मतदाता दर्ज थे।
चुनाव आयोग ने कहा था कि अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र मतदाता छूटे नहीं और कोई अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न रहे।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था SIR का विवाद
बिहार में SIR राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय भी बना। इस प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी और याचिकाकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर मतदाताओं के वंचित होने की आशंका समेत कई सवाल उठाए थे। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक केस समरी के अनुसार कई याचिकाएं SIR की संवैधानिक और कानूनी वैधता को चुनौती देते हुए दाखिल हुई थीं।
अदालत ने सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग को हटाए गए नामों और उनके कारणों को सार्वजनिक करने जैसे निर्देश दिए थे तथा आधार कार्ड को पहचान स्थापित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज के रूप में स्वीकार करने को कहा था।
आखिरकार 27 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में कराए गए SIR की वैधता को बरकरार रखा और इसे चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि चुनाव आयोग को विशेष पुनरीक्षण कराने की शक्ति है और बिहार में अपनाई गई प्रक्रिया वैध उद्देश्य पर आधारित थी।
🌎 अमेरिका-ब्रिटेन से तुलना का क्या मतलब?
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बिहार का मतदान उन प्रतिशतों से भी अधिक रहा जो अलग-अलग वर्षों में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन और जापान जैसे विकसित लोकतंत्रों में देखने को मिला है।
यह बयान राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा में आकर्षक जरूर है, लेकिन आंकड़ों की तुलना करते समय सावधानी जरूरी है।
अलग-अलग देशों में मतदाता पंजीकरण प्रणाली, चुनाव का स्तर, मतदान योग्य आबादी की परिभाषा, मतदान का तरीका और चुनावी वर्ष अलग होते हैं। इसलिए बिहार विधानसभा चुनाव के 67 प्रतिशत से अधिक मतदान को किसी अन्य देश के किसी अलग राष्ट्रीय चुनाव के प्रतिशत से सीधे जोड़ना केवल एक मोटी तुलना हो सकती है।
इसलिए खबर का तथ्य यह नहीं है कि बिहार की चुनाव व्यवस्था उन देशों से “बेहतर साबित हो गई”, बल्कि यह है कि CEC ज्ञानेश कुमार ने बिहार के रिकॉर्ड मतदान को रेखांकित करने के लिए ऐसी तुलना की।
🏫 युवाओं पर भी चुनाव आयोग का फोकस
बिहार दौरे के दौरान CEC ने Electoral Literacy Club 2.0 (ELC 2.0) भी शुरू किया। चुनाव आयोग की यह पहल स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में युवा नागरिकों को चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था से परिचित कराने पर केंद्रित है।
रिपोर्ट के मुताबिक ELC कार्यक्रम मूल रूप से 2018 में Systematic Voters’ Education and Electoral Participation यानी SVEEP कार्यक्रम के तहत शुरू किया गया था। अब ELC 2.0 के जरिए इसे बदलते डिजिटल और सूचना वातावरण के अनुरूप विकसित करने की तैयारी है।
CEC के बिहार दौरे में पहली बार मतदान करने वाले युवाओं और Gen Z के लिए मतदाता जागरूकता अभियान पर भी जोर दिया गया।
🧑💼 BLO से भी संवाद का कार्यक्रम
ज्ञानेश कुमार के दो दिवसीय बिहार दौरे में चुनाव प्रणाली के जमीनी स्तर पर काम करने वाले Booth Level Officers यानी BLO से बातचीत भी शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार राजगीर स्थित नालंदा विश्वविद्यालय में करीब 500 BLO के साथ संवाद का कार्यक्रम रखा गया, जिसमें SIR के दौरान सामने आई जमीनी चुनौतियों और भविष्य में निर्वाचन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने के उपायों पर प्रतिक्रिया ली जानी थी।
यह महत्वपूर्ण है क्योंकि बिहार SIR में करीब एक लाख BLO सहित जिला निर्वाचन अधिकारियों, ERO, AERO, राजनीतिक दलों और उनके Booth Level Agents की बड़ी भूमिका रही थी।
📊 जरूरी जानकारी एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मुद्दा | बिहार SIR और रिकॉर्ड मतदान |
| बयान देने वाले | CEC ज्ञानेश कुमार |
| बयान की तारीख | 16 अगस्त 2026 |
| चुनाव | बिहार विधानसभा चुनाव 2025 |
| अंतिम रिपोर्टेड मतदान | करीब 67.25% |
| ECI का 12 नवंबर provisional आंकड़ा | 67.13% |
| provisional महिला मतदान | 71.78% |
| provisional पुरुष मतदान | 62.98% |
| SIR अवधि | 24 जून–30 सितंबर 2025 |
| SIR से पहले मतदाता | करीब 7.89 करोड़ |
| 30 सितंबर की अंतिम सूची | करीब 7.42 करोड़ |
| CEC का दावा | SIR ने रिकॉर्ड मतदान बढ़ाने में योगदान दिया |
| सुप्रीम कोर्ट का फैसला | 27 मई 2026 को SIR की वैधता बरकरार |
🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण
बिहार में रिकॉर्ड मतदान अपने आप में महत्वपूर्ण तथ्य है। इससे यह स्पष्ट है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में मतदाताओं की भागीदारी पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में असाधारण रूप से अधिक रही।
लेकिन रिकॉर्ड मतदान हुआ और रिकॉर्ड मतदान SIR के कारण हुआ—ये दो अलग बातें हैं।
पहली बात मतदान के आंकड़ों से प्रमाणित की जा सकती है। दूसरी CEC और चुनाव आयोग की व्याख्या है। किसी एक प्रशासनिक प्रक्रिया को मतदान में वृद्धि का अकेला कारण मानने के लिए राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, मतदाता जागरूकता, महिला भागीदारी, मतदान केंद्रों की सुविधा, प्रचार अभियान और स्थानीय चुनावी परिस्थितियों जैसे दूसरे कारकों का भी अध्ययन आवश्यक होगा।
यह भी उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने बिहार चुनाव से पहले केवल SIR ही नहीं किया था। उसने मतदान केंद्रों पर अधिकतम 1,200 मतदाताओं की सीमा, 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग, बेहतर Voter Information Slip, ECINet और कई अन्य सुविधाओं सहित 17 विशेष बिहार-केंद्रित पहल लागू करने की जानकारी दी थी।
ऐसे में रिकॉर्ड मतदान का पूरा श्रेय किसी एक पहल को देना विश्लेषणात्मक रूप से सावधानी की मांग करता है।
दूसरी ओर SIR की वैधता पर चली बड़ी कानूनी बहस अब एक महत्वपूर्ण चरण पार कर चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2026 में इसकी वैधता बरकरार रखी।
इसलिए आगे की अधिक उपयोगी बहस यह होगी कि संशोधित मतदाता सूची ने पात्र नागरिकों की भागीदारी, मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी पहुंच पर वास्तविक रूप से क्या प्रभाव डाला—और इसे स्वतंत्र आंकड़ों से किस सीमा तक मापा जा सकता है।








