केवटी के पूर्व BDO चंद्रमोहन पासवान आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित

केवटी के पूर्व BDO चंद्रमोहन पासवान आय से अधिक संपत्ति मामले में निलंबित
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📍 केवटी, दरभंगा | DarbhangaNews.in

दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड के पूर्व BDO चंद्रमोहन पासवान को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में निलंबित कर दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU की जांच के बाद ग्रामीण विकास विभाग ने यह कार्रवाई की है।

प्रारंभिक जांच में उनके पास ज्ञात आय से 81.03 प्रतिशत अधिक संपत्ति होने के साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, आय से अधिक संपत्ति का अनुमान करीब ₹89.13 लाख लगाया गया है।


📌 मुख्य बातें

✅ केवटी के पूर्व BDO चंद्रमोहन पासवान निलंबित
✅ आय से अधिक संपत्ति मामले में ग्रामीण विकास विभाग की कार्रवाई
✅ EOU/SVU जांच में 81.03% अधिक संपत्ति का दावा
✅ करीब ₹89.13 लाख की आय से अधिक संपत्ति का मामला
✅ दरभंगा और मधुबनी में छह ठिकानों पर पहले हुई थी छापेमारी
✅ पत्नी और बच्चों के नाम से 10 बैंक खातों की जानकारी मिलने की रिपोर्ट
✅ महिंद्रा बोलेरो और मारुति स्विफ्ट वाहन का भी जिक्र


EOU जांच के बाद निलंबन की कार्रवाई

रिपोर्टों के अनुसार, केवटी के पूर्व BDO चंद्रमोहन पासवान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने जांच की थी। जांच में प्रथम दृष्टया आय से अधिक संपत्ति के साक्ष्य मिलने के बाद ग्रामीण विकास विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया।

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले सरकार ने उन्हें पद से हटाया था और अब विभागीय स्तर पर निलंबन की कार्रवाई की गई है।


81.03% अधिक संपत्ति का दावा

Live Hindustan की रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक जांच में चंद्रमोहन पासवान के पास ज्ञात आय से 81.03 प्रतिशत अधिक संपत्ति होने के साक्ष्य मिले हैं। इस संपत्ति का अनुमान करीब ₹89,13,500 बताया गया है।

इस तरह के मामलों में जांच एजेंसियां संबंधित अधिकारी की घोषित आय, वेतन, बैंक लेन-देन, संपत्ति, वाहन, जमीन, निवेश और परिवार के नाम पर दर्ज संपत्तियों की जांच करती हैं।


छह ठिकानों पर हुई थी छापेमारी

इस मामले में पहले EOU ने चंद्रमोहन पासवान से जुड़े छह ठिकानों पर छापेमारी की थी। रिपोर्टों के अनुसार, यह कार्रवाई विशेष न्यायालय की अनुमति के बाद की गई थी।

छापेमारी में उनके पैतृक आवास, सरकारी आवास और कार्यालय समेत दरभंगा और मधुबनी के ठिकानों की तलाशी ली गई थी। कार्रवाई DSP स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में की गई बताई गई है।


बैंक खातों और वाहनों की भी जांच

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान पत्नी और बच्चों के नाम से 10 बैंक खातों की जानकारी मिली। इसके अलावा महिंद्रा बोलेरो और मारुति स्विफ्ट वाहन का भी जिक्र सामने आया है।

अब जांच एजेंसी यह देख सकती है कि इन खातों में लेन-देन का स्रोत क्या था और क्या संपत्तियां घोषित आय से मेल खाती हैं या नहीं।


विभागीय कार्रवाई और आगे की जांच

निलंबन के बाद चंद्रमोहन पासवान के खिलाफ विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। ऐसे मामलों में जांच रिपोर्ट, बरामद दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और संपत्ति के कागजात महत्वपूर्ण साक्ष्य माने जाते हैं।

हालांकि यह पूरा मामला अभी जांच और विभागीय कार्रवाई के दायरे में है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और संबंधित विभाग/न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।


सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार पर सवाल

केवटी के पूर्व BDO के खिलाफ यह कार्रवाई सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बड़ा सवाल उठाती है। BDO स्तर का अधिकारी प्रखंड विकास योजनाओं, पंचायत योजनाओं, सरकारी अनुदान, आवास, सड़क, मनरेगा और अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ा होता है।

ऐसे पद पर बैठे अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप लगना गंभीर मामला है, क्योंकि इसका सीधा संबंध जनता के भरोसे और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता से जुड़ता है।


📋 जरूरी जानकारी एक नजर में

विषयजानकारी
मामलाआय से अधिक संपत्ति
अधिकारीचंद्रमोहन पासवान
पदकेवटी के पूर्व BDO
जिलादरभंगा
कार्रवाईनिलंबन
विभागग्रामीण विकास विभाग
जांचEOU/SVU
आरोपित संपत्तिज्ञात आय से 81.03% अधिक
अनुमानित राशिकरीब ₹89.13 लाख
पहले की कार्रवाईछह ठिकानों पर छापेमारी
अतिरिक्त जानकारीपत्नी और बच्चों के नाम से 10 बैंक खातों की रिपोर्ट

📊 DarbhangaNews.in Analysis

केवटी के पूर्व BDO चंद्रमोहन पासवान का निलंबन दरभंगा के प्रशासनिक हलकों में बड़ी कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। आय से अधिक संपत्ति का मामला केवल व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का आरोप नहीं होता, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि प्रखंड स्तर पर सरकारी योजनाओं की निगरानी कितनी मजबूत है।

अब जांच एजेंसियों के सामने सबसे अहम सवाल यह होगा कि कथित संपत्ति किस स्रोत से अर्जित हुई, किन खातों में लेन-देन हुआ और क्या किसी सरकारी योजना या पद के दुरुपयोग से संपत्ति बनाई गई। इस मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच जरूरी है, ताकि जनता का भरोसा प्रशासनिक व्यवस्था पर बना रहे।

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