📍 दरभंगा/नई दिल्ली | DarbhangaNews.in
दरभंगा एयरपोर्ट के विस्तार और आधुनिक सुविधाओं को लेकर दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक हुई है। दरभंगा के सांसद और एयरपोर्ट सलाहकार समिति के अध्यक्ष डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू से मुलाकात कर एयरपोर्ट के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए।
बैठक में नए टर्मिनल भवन के निर्माण, नाइट लैंडिंग सुविधा, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकास, नई उड़ान सेवाएं, कार्गो सुविधा और एयरपोर्ट के नामकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। सांसद ने कहा कि दरभंगा एयरपोर्ट केवल मिथिला ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर बिहार और नेपाल के तराई क्षेत्र के यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण हवाई केंद्र बन चुका है।
📌 मुख्य बातें
✅ सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू से मुलाकात की
✅ दरभंगा एयरपोर्ट के विस्तार और आधुनिक सुविधाओं पर चर्चा
✅ ₹912 करोड़ की लागत से नया टर्मिनल/सिविल एन्क्लेव बन रहा है
✅ नाइट लैंडिंग सुविधा जल्द शुरू करने की मांग रखी गई
✅ CAT-II, ILS और एप्रोच लाइटिंग से जुड़े कार्यों पर चर्चा
✅ एयरपोर्ट की सुरक्षा CISF को सौंपे जाने के बाद स्थायी सुविधाओं की मांग
✅ मखाना, लीची और आम जैसे उत्पादों के लिए कार्गो सुविधा बढ़ाने का सुझाव
✅ एयरपोर्ट का नाम महाकवि विद्यापति के नाम पर रखने की मांग दोहराई गई
दिल्ली में एयरपोर्ट विकास पर हुई चर्चा
सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने दिल्ली में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू से मुलाकात कर दरभंगा एयरपोर्ट की वर्तमान स्थिति और भविष्य की जरूरतों को रखा। बैठक में एयरपोर्ट के निर्माणाधीन नए टर्मिनल, यात्रियों की बढ़ती संख्या, नई उड़ानों और तकनीकी सुविधाओं पर विशेष चर्चा हुई।
सांसद ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि दरभंगा एयरपोर्ट के लंबित कार्यों को तेज किया जाए, ताकि मिथिला और उत्तर बिहार के लोगों को बेहतर हवाई सेवा मिल सके।
₹912 करोड़ की लागत से बन रहा नया टर्मिनल
दरभंगा एयरपोर्ट पर नया सिविल एन्क्लेव/टर्मिनल करीब ₹912 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है। AAI के अनुसार, नया टर्मिनल लगभग 65,155 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनेगा और पीक समय में करीब 3,000 यात्रियों को संभालने की क्षमता रखेगा।
यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद दरभंगा एयरपोर्ट की यात्री क्षमता और सुविधाओं में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। वर्तमान में एयरपोर्ट पर सीमित जगह, यात्री भीड़, पार्किंग और टर्मिनल सुविधाओं को लेकर लंबे समय से परेशानी रही है।
नाइट लैंडिंग सुविधा पर विशेष जोर
बैठक में दरभंगा एयरपोर्ट पर नाइट लैंडिंग सुविधा शुरू करने का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया। सांसद ने कहा कि CAT-II के तहत ILS प्रणाली, एप्रोच लाइटिंग और अन्य जरूरी तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में काम आगे बढ़ा है।
नाइट लैंडिंग शुरू होने से दरभंगा से उड़ानों की संख्या बढ़ सकती है। इससे यात्रियों को सुबह या दिन की सीमित उड़ानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और एयरलाइंस को शाम व रात के समय भी संचालन की सुविधा मिल सकती है।
अंतरराष्ट्रीय मानकों की दिशा में कदम
बैठक में दरभंगा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने पर भी चर्चा हुई। दरभंगा एयरपोर्ट मिथिला क्षेत्र के साथ-साथ समस्तीपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी, सुपौल, सहरसा और नेपाल के तराई क्षेत्र के यात्रियों के लिए भी उपयोगी माना जाता है।
सांसद ने कहा कि यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एयरपोर्ट को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना जरूरी है। पहले भी दरभंगा एयरपोर्ट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने और लंबी दूरी की उड़ानों के लिए रनवे विस्तार की मांग उठती रही है।
CISF सुरक्षा के बाद स्थायी सुविधाओं की जरूरत
दरभंगा एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था हाल में CISF को सौंपे जाने की रिपोर्ट सामने आई है। Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार, CISF ने दरभंगा एयरपोर्ट की सुरक्षा संभाली और 145 कर्मियों की तैनाती की गई।
इसी को देखते हुए सांसद ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि एयरपोर्ट परिसर में स्थायी प्रशासनिक भवन, आवासीय सुविधा, अस्पताल और अन्य आधारभूत सुविधाओं का निर्माण जल्द शुरू किया जाए। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के बाद एयरपोर्ट संचालन को और व्यवस्थित बनाने के लिए ये सुविधाएं जरूरी मानी जा रही हैं।
कार्गो सेवा से मखाना, लीची और आम को मिलेगा बाजार
सांसद ने दरभंगा एयरपोर्ट पर कार्गो क्षमता बढ़ाने की मांग भी रखी। मिथिला और उत्तर बिहार क्षेत्र मखाना, लीची, आम, मछली और अन्य कृषि उत्पादों के लिए जाना जाता है।
अगर दरभंगा एयरपोर्ट से कार्गो सेवा मजबूत होती है, तो स्थानीय किसानों, व्यापारियों और उद्यमियों को बड़ा लाभ मिल सकता है। मखाना और लीची जैसे उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचाया जा सकता है।
नई उड़ानों की मांग भी रखी गई
बैठक में दरभंगा से देश के बड़े महानगरों और धार्मिक स्थलों के लिए सीधी उड़ानें शुरू करने की मांग भी उठाई गई। वर्तमान में दरभंगा एयरपोर्ट से सीमित रूटों पर उड़ानें उपलब्ध हैं, जबकि यात्रियों की मांग लगातार बढ़ रही है।
नई उड़ानों से उत्तर बिहार के यात्रियों को पटना या अन्य शहरों पर निर्भरता कम करनी पड़ेगी। खासकर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, हैदराबाद, चेन्नई और प्रमुख धार्मिक शहरों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी की मांग लंबे समय से की जा रही है।
महाकवि विद्यापति के नाम पर एयरपोर्ट का नामकरण
सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने दरभंगा एयरपोर्ट का नामकरण महाकवि विद्यापति के नाम पर करने की मांग फिर दोहराई। मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को देखते हुए यह मांग लंबे समय से उठती रही है।
उन्होंने विमानों में मिथिला के पारंपरिक भोजन जैसे चूड़ा-दही और मखाना परोसे जाने का सुझाव भी रखा, ताकि यात्रियों को मिथिला की संस्कृति और खानपान से जोड़ा जा सके।
केंद्रीय मंत्री के दरभंगा आने की उम्मीद
बैठक के दौरान सांसद ने बताया कि केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने दरभंगा आने और एयरपोर्ट प्रोजेक्ट की प्रगति देखने का आश्वासन दिया है। यदि मंत्री का दौरा होता है, तो निर्माण कार्य, तकनीकी सुविधाओं और लंबित मांगों की समीक्षा जमीन पर हो सकेगी।
इससे प्रोजेक्ट की गति तेज होने की उम्मीद भी बढ़ेगी।
📋 जरूरी जानकारी एक नजर में
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| मामला | दरभंगा एयरपोर्ट विस्तार पर उच्च स्तरीय बैठक |
| स्थान | नई दिल्ली |
| मुलाकात | सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर और केंद्रीय मंत्री राममोहन नायडू |
| प्रमुख मुद्दे | नया टर्मिनल, नाइट लैंडिंग, अंतरराष्ट्रीय मानक, कार्गो, नई उड़ानें |
| प्रोजेक्ट लागत | करीब ₹912 करोड़ |
| टर्मिनल क्षेत्र | लगभग 65,155 वर्ग मीटर |
| सुरक्षा | CISF को जिम्मेदारी मिलने की रिपोर्ट |
| कार्गो मांग | मखाना, लीची, आम जैसे उत्पादों के लिए सुविधा |
| नामकरण मांग | महाकवि विद्यापति के नाम पर एयरपोर्ट |
📊 DarbhangaNews.in Analysis
दरभंगा एयरपोर्ट का विस्तार मिथिला और उत्तर बिहार के लिए केवल हवाई सुविधा का मुद्दा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास, निवेश, पर्यटन और रोजगार से जुड़ा बड़ा सवाल है। नया टर्मिनल, नाइट लैंडिंग और कार्गो सुविधा शुरू होने पर दरभंगा एयरपोर्ट उत्तर बिहार का बड़ा विमानन केंद्र बन सकता है।
सबसे जरूरी है कि निर्माण कार्य समय पर पूरा हो, नाइट लैंडिंग की तकनीकी स्वीकृति जल्द मिले और एयरलाइंस को नए रूट शुरू करने के लिए आकर्षित किया जाए। अगर कार्गो सुविधा सही तरीके से विकसित होती है, तो मखाना, लीची और आम जैसे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार तक तेजी से पहुंचाने में मदद मिलेगी। इससे किसानों और स्थानीय कारोबारियों को भी सीधा लाभ मिल सकता है।
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