📍 दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, लहेरियासराय | DarbhangaNews.in
उत्तर बिहार के बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) में मरीज और उनके परिजन इलाज के साथ अब पीने के पानी की समस्या से भी जूझ रहे हैं। अस्पताल में पेयजल की व्यवस्था होने के बावजूद कई जगह नल खराब पाए गए, जिससे मरीजों के परिजनों को गर्मी में बाहर से पानी खरीदना पड़ रहा है। बिहार विधानसभा की शून्यकाल अध्ययन समिति के निरीक्षण के दौरान यह स्थिति खुलकर सामने आई।
निरीक्षण के दौरान गंभीर रोग देखभाल इकाई में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों ने समिति को दवा और पानी की कमी की शिकायत की। टीम जब सर्जिकल भवन, आपातकालीन इकाई, गंभीर रोग देखभाल इकाई और मेडिसिन वार्ड तक पहुंची तो कई जगह बुनियादी सुविधाओं को लेकर शिकायतें मिलीं। सबसे गंभीर स्थिति पेयजल की बताई गई।
📌 मुख्य बातें
✅ डीएमसीएच में पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल
✅ कई जगह नल खराब मिले
✅ मरीजों और परिजनों को बाहर से पानी खरीदना पड़ रहा
✅ गंभीर रोग देखभाल इकाई के मरीजों ने भी की शिकायत
✅ विधानसभा की तीन सदस्यीय समिति ने किया निरीक्षण
✅ दवाओं की कमी भी सामने आई
✅ 100 एमएल एनएस स्लाइन और सैनिटाइजर उपलब्ध नहीं मिला
✅ कई जगह केंद्रीय शीतलन व्यवस्था भी बंद मिली
✅ अस्पताल प्रशासन को व्यवस्थाएं सुधारने की जरूरत
🚰 नल लगे हैं, लेकिन पानी नहीं
डीएमसीएच में पीने के पानी की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन निरीक्षण में कई नल खराब मिले। इसका सीधा असर मरीजों और उनके साथ आए लोगों पर पड़ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार गर्मी के बीच परिजन अस्पताल के बाहर से बोतलबंद पानी खरीदते दिखाई दिए।
सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के लिए स्वच्छ पेयजल मूलभूत आवश्यकता है। यहां बड़ी संख्या में ऐसे परिवार आते हैं, जो दूरदराज के गांवों और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से होते हैं। ऐसे में हर दिन पानी खरीदना उनके खर्च को और बढ़ा सकता है।
🏥 गंभीर मरीजों ने समिति के सामने रखी परेशानी
विधानसभा की शून्यकाल अध्ययन समिति ने रविवार को डीएमसीएच का निरीक्षण किया। गंभीर रोग देखभाल इकाई में भर्ती मरीजों ने समिति को सीधे दवा और पानी की कमी के बारे में बताया। इसके बाद समिति ने अस्पताल के अलग-अलग हिस्सों का विस्तृत निरीक्षण किया।
समिति सर्जिकल भवन की आपातकालीन इकाई, सर्जिकल गंभीर रोग देखभाल इकाई, मेडिसिन गंभीर रोग देखभाल इकाई, दवा भंडार और सर्जिकल वार्ड तक गई। निरीक्षण के दौरान डीएमसीएच के उपाधीक्षक डॉ. अमित कुमार झा भी मौजूद थे।
👥 तीन विधायकों की समिति ने देखा हाल
निरीक्षण दल का नेतृत्व मधुबनी विधायक एवं समिति के सभापति माधव आनंद ने किया। टीम में वाल्मीकिनगर विधायक सुरेंद्र कुमार और पारू विधायक शंकर प्रसाद भी शामिल थे। तीनों सदस्यों ने अलग-अलग विभागों में जाकर मरीजों और परिजनों से व्यवस्था की जानकारी ली।
समिति के सामने पेयजल की समस्या सबसे प्रमुख रूप से सामने आई। मरीजों को अस्पताल परिसर में उपलब्ध व्यवस्था के बावजूद बाहर से पानी खरीदते देख सदस्यों ने नाराजगी जताई।
💊 दवा की कमी भी सामने आई
पानी के साथ दवाओं की उपलब्धता पर भी सवाल उठे। निरीक्षण में 100 एमएल एनएस स्लाइन और सैनिटाइजर उपलब्ध नहीं होने की जानकारी मिली। मरीजों की ओर से दूसरी दवाओं की कमी की शिकायत भी समिति के सामने रखी गई।
हालांकि किस-किस दवा का भंडार समाप्त था और कितने समय से कमी बनी हुई थी, इसकी पूरी सूची उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है। इसलिए किसी अतिरिक्त दवा का नाम अनुमान से शामिल नहीं किया जा रहा है।
🌡️ कई जगह शीतलन व्यवस्था भी बंद
निरीक्षण के दौरान अस्पताल के कई हिस्सों में केंद्रीय शीतलन व्यवस्था बंद मिलने की जानकारी भी सामने आई। गर्मी के मौसम में गंभीर मरीजों वाले वार्डों में इस तरह की समस्या उनकी परेशानी बढ़ा सकती है।
विशेष रूप से सर्जिकल भवन और गंभीर मरीजों वाले हिस्सों में तापमान नियंत्रित रखने की व्यवस्था का चालू रहना जरूरी है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि खराब व्यवस्था कब से बंद थी या उसे ठीक करने की कोई निश्चित समय सीमा तय की गई है।
🧴 पानी और सफाई का सीधा संबंध
अस्पताल में पानी की कमी केवल पीने तक सीमित समस्या नहीं है। पर्याप्त पानी नहीं होने पर शौचालय, हाथ धोने की व्यवस्था, वार्डों की सफाई और मरीजों की देखभाल पर भी असर पड़ सकता है।
डीएमसीएच के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र ने अस्पताल की आधिकारिक वेबसाइट पर मरीज सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण और बेहतर अस्पताल संचालन को प्राथमिकता बताई है।
ऐसे में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा की नियमित निगरानी अस्पताल प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।
🌧️ जलजमाव से भी पहले जूझता रहा है डीएमसीएच
विडंबना यह है कि डीएमसीएच एक ओर पीने के पानी की कमी से जूझ रहा है, वहीं बारिश के दौरान परिसर में भारी जलजमाव भी बार-बार समस्या बनता है। जुलाई 2026 में लगातार बारिश के बाद औषधि विभाग परिसर, आपातकालीन चौक से सर्जिकल भवन और मातृ एवं शिशु केंद्र की ओर जाने वाली सड़कें जलमग्न हो गई थीं।
उस समय मरीजों और कर्मचारियों को ट्रॉली लेकर पानी और कीचड़ से गुजरना पड़ा था। अस्पताल प्रशासन ने जलनिकासी की समस्या की जानकारी बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन को देने की बात कही थी।
यानी अस्पताल में समस्या केवल पानी की मात्रा की नहीं, बल्कि पानी के प्रबंधन की भी दिखाई देती है—बारिश में जरूरत से ज्यादा पानी और सामान्य दिनों में पीने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं।
🛠️ खराब नलों की रोज जांच क्यों नहीं?
अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज रोज आते हैं। ऐसी स्थिति में पेयजल नलों, पानी शुद्ध करने वाली मशीनों और भंडारण टंकियों की नियमित जांच की व्यवस्था होना जरूरी है।
यदि कोई नल खराब है तो मरीजों की शिकायत का इंतजार करने के बजाय उसे दैनिक निरीक्षण में पकड़ लिया जाना चाहिए। प्रत्येक भवन में पानी की व्यवस्था का जिम्मेदार कर्मचारी तय होने से खराबी जल्दी ठीक हो सकती है।
विशेष रूप से आपातकालीन और गंभीर रोग देखभाल इकाई जैसे स्थानों में पेयजल उपलब्धता की अलग निगरानी होनी चाहिए।
💸 मरीजों पर बढ़ रहा अतिरिक्त खर्च
सरकारी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों को यदि दवा और पानी दोनों बाहर से खरीदना पड़े तो मुफ्त या कम लागत वाले उपचार का लाभ सीमित हो जाता है।
एक मरीज के साथ अक्सर एक या दो परिजन भी रहते हैं। ऐसे में कई दिनों तक भर्ती रहने के दौरान रोज पानी खरीदने का खर्च भी परिवार पर अतिरिक्त बोझ बन सकता है।
इस समस्या का समाधान केवल कुछ बोतल पानी उपलब्ध कराने से नहीं बल्कि अस्पताल के भीतर भरोसेमंद और स्थायी पेयजल व्यवस्था से होना चाहिए।
📋 पानी की व्यवस्था सार्वजनिक रूप से दर्ज हो
अस्पताल प्रशासन प्रत्येक भवन में उपलब्ध पेयजल स्रोतों की सूची जारी कर सकता है। इससे मरीजों को यह पता रहेगा कि नजदीकी चालू पानी की व्यवस्था कहां है।
हर भवन के लिए ये जानकारियां सार्वजनिक की जा सकती हैं:
- कुल पेयजल नल
- चालू नलों की संख्या
- खराब नलों की संख्या
- पानी की जांच की तारीख
- खराबी की शिकायत के लिए संपर्क
- मरम्मत की तय समय सीमा
इस तरह की व्यवस्था मरीजों की परेशानी कम करने के साथ जवाबदेही भी बढ़ाएगी।
📊 जरूरी जानकारी एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अस्पताल | दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल |
| स्थान | लहेरियासराय, दरभंगा |
| मुख्य समस्या | पीने के पानी की कमी |
| स्थिति | कई नल खराब मिले |
| असर | मरीजों को बाहर से पानी खरीदना पड़ा |
| निरीक्षण | विधानसभा की शून्यकाल अध्ययन समिति |
| समिति | तीन सदस्यीय |
| सभापति | माधव आनंद |
| अन्य सदस्य | सुरेंद्र कुमार, शंकर प्रसाद |
| प्रभावित प्रमुख इकाइयां | आपातकालीन, सर्जिकल, मेडिसिन और गंभीर रोग देखभाल इकाई |
| दूसरी समस्या | दवाओं की कमी |
| अनुपलब्ध सामग्री | 100 एमएल एनएस स्लाइन और सैनिटाइजर |
| अन्य कमी | कई जगह केंद्रीय शीतलन व्यवस्था बंद |
🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण
डीएमसीएच की यह स्थिति इसलिए गंभीर है क्योंकि मामला किसी महंगी मशीन या अत्याधुनिक उपचार सुविधा का नहीं, बल्कि पीने के पानी जैसी सबसे बुनियादी जरूरत का है।
उत्तर बिहार के हजारों मरीजों के भरोसे वाले अस्पताल में यदि परिजनों को पानी की बोतल लेकर वार्ड तक पहुंचना पड़े तो यह रखरखाव और निगरानी व्यवस्था की कमजोरी को दिखाता है। नल लगाना पर्याप्त नहीं है; उनका चालू रहना अधिक महत्वपूर्ण है।
इस मामले में सबसे उपयोगी कदम होगा कि अस्पताल प्रशासन हर भवन की पेयजल व्यवस्था की तत्काल जांच कर खराब नलों की मरम्मत करे और नियमित निगरानी की जिम्मेदारी तय करे।
डीएमसीएच में एक तरफ बरसात के समय जलजमाव और दूसरी तरफ वार्डों में पीने के पानी की कमी की स्थिति यह भी बताती है कि अस्पताल को समग्र जल प्रबंधन योजना की जरूरत है। जलनिकासी, पेयजल, भंडारण और सफाई को अलग-अलग समस्या मानने के बजाय एक साथ सुधारना होगा।








