📍 दरभंगा, बिहार | DarbhangaNews.in
दरभंगा में बुधवार, 12 अगस्त 2026 को बार-बार हो रही बिजली कटौती ने शहरवासियों की परेशानी बढ़ा दी है। कहीं बिजली कुछ देर के लिए आती है और फिर चली जाती है, तो कहीं लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने की शिकायत सामने आ रही है। दिन में प्रकाशित एक स्थानीय रिपोर्ट में भीषण गर्मी के बीच बिजली कटौती बढ़ने और ओवरलोड ट्रांसफार्मरों को प्रमुख कारणों में शामिल किया गया है। इसका असर पानी, कारोबार, पढ़ाई और घरेलू कामों पर पड़ रहा है।
लेकिन इस बिजली संकट के बीच एक बड़ा सवाल नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (NBPDCL) की सूचना व्यवस्था और जवाबदेही पर भी उठता है। DarbhangaNews.in ने बुधवार रात कंपनी की आधिकारिक “Scheduled Power Outage” सेवा की जांच की। उस समय पेज पर स्पष्ट रूप से “No Records Found!” दिख रहा था। यानी आम उपभोक्ता आधिकारिक वेबसाइट खोलकर यह नहीं जान सकता कि दरभंगा में बार-बार बिजली क्यों जा रही है, कौन-सा फीडर प्रभावित है और आपूर्ति कब सामान्य होगी।
यहां यह फर्क समझना जरूरी है कि वेबसाइट का यह पेज मुख्य रूप से पूर्व निर्धारित बिजली कटौती के लिए है। इसलिए स्थानीय खराबी या अचानक फीडर ट्रिप होने का उस सूची में न होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि विभाग के आंतरिक तंत्र में उसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन उपभोक्ता के दृष्टिकोण से समस्या यही है—बिजली बंद है, लेकिन सार्वजनिक मंच पर उसकी वजह और बहाली का समय दिखाई नहीं देता।
📌 मुख्य बातें
✅ 12 अगस्त को दरभंगा में बार-बार बिजली कटौती की शिकायत
✅ स्थानीय रिपोर्ट में अधिक भार वाले ट्रांसफार्मरों को प्रमुख कारण बताया गया
✅ गर्मी और अधिक बिजली खपत से वितरण व्यवस्था पर दबाव
✅ कुछ इलाकों में बिजली आने-जाने का सिलसिला बार-बार जारी
✅ पानी के मोटर, पंखे, कूलर और घरेलू काम प्रभावित
✅ NBPDCL के आधिकारिक निर्धारित कटौती पेज पर “No Records Found”
✅ आज के लिए कोई शहरव्यापी निर्धारित कटौती सूची दिखाई नहीं दी
✅ 11 अगस्त को अलग से पहले घोषित रखरखाव कटौती हुई थी
✅ बुधवार शाम दरभंगा में बिजली चमकने/आंधी का मौसम अलर्ट भी जारी
✅ अचानक होने वाली खराबी और फीडर बंद होने की जानकारी भी सार्वजनिक करने की जरूरत
⚡ क्यों बार-बार जा रही है बिजली?
बुधवार को सामने आई रिपोर्ट में दरभंगा में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली कटौती की समस्या बढ़ने की बात कही गई है। रिपोर्ट में पानी और अन्य दैनिक काम प्रभावित होने के साथ ट्रांसफार्मर पर अधिक भार को समस्या का प्रमुख कारण बताया गया है।
गर्मी और उमस बढ़ने पर घरों में पंखे, कूलर, वातानुकूलन यंत्र और पानी के मोटर लंबे समय तक चलते हैं। यदि किसी क्षेत्र में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ चुकी है लेकिन उसी अनुपात में ट्रांसफार्मर की क्षमता नहीं बढ़ी है, तो वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
दरभंगा के भीगो इलाके में जुलाई में भी इसी तरह की समस्या सामने आ चुकी है। स्थानीय लोगों ने करीब चार महीने से कम वोल्टेज और बार-बार बिजली जाने की शिकायत करते हुए सड़क जाम किया था। वहां लोगों का कहना था कि बढ़े हुए भार के कारण मौजूदा ट्रांसफार्मर पर्याप्त क्षमता से काम नहीं कर रहा। विभाग ने अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने का आश्वासन दिया था।
यह पुराना मामला बुधवार की हर कटौती का कारण सिद्ध नहीं करता, लेकिन यह जरूर दिखाता है कि दरभंगा के कुछ हिस्सों में वितरण क्षमता और बढ़ते भार का मुद्दा पहले से मौजूद है।
🔄 बिजली आती है, फिर कुछ देर बाद चली जाती है—क्यों?
लगातार लंबे समय की कटौती और बार-बार कुछ मिनट या आधे घंटे के अंतराल पर बिजली जाने में अंतर होता है।
यदि फीडर या ट्रांसफार्मर पर अधिक भार, स्थानीय खराबी या सुरक्षा प्रणाली सक्रिय होने जैसी स्थिति हो तो आपूर्ति बंद हो सकती है। मरम्मत या पुनः चालू करने के बाद जैसे ही बड़ी संख्या में घरों का पूरा भार एक साथ वापस आता है, कमजोर व्यवस्था पर दोबारा दबाव पड़ सकता है।
दरभंगा में लोगों द्वारा बताई जा रही “बिजली आई, कुछ देर चली, फिर चली गई” जैसी स्थिति ऐसी स्थानीय वितरण समस्या के अनुरूप हो सकती है। हालांकि प्रत्येक इलाके के वास्तविक कारण की पुष्टि संबंधित फीडर के तकनीकी रिकॉर्ड से ही हो सकती है।
🏘️ पहले से भी सामने आ चुका है ट्रांसफार्मर क्षमता का संकट
28 जुलाई को लहेरियासराय के वार्ड 31 स्थित भीगो मंदिर चौक पर बिजली संकट को लेकर लोगों ने प्रदर्शन किया था। स्थानीय निवासियों का आरोप था कि करीब चार महीने से कम वोल्टेज और लगातार कटौती की समस्या बनी हुई है। बिजली विभाग से अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की मांग भी की गई थी।
उस समय स्थानीय लोगों ने कहा था कि क्षेत्र में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ गई है और एक अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की जरूरत है। विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे थे और लोगों को समझाने के बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ था।
यदि शहर के दूसरे क्षेत्रों में भी इसी तरह ट्रांसफार्मर क्षमता से अधिक भार चल रहा है तो विभाग को क्षेत्रवार भार का आंकड़ा सार्वजनिक करना चाहिए।
🌩️ आज मौसम भी बढ़ा सकता है परेशानी
बुधवार रात दरभंगा का तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया और मौसम उमस भरा बना हुआ है। इसके साथ ही भारत मौसम विज्ञान विभाग की ओर से दरभंगा के लिए रात 10:14 बजे तक बिजली चमकने का पीला अलर्ट जारी किया गया था। आगे रात में गरज-चमक की संभावना भी दर्ज की गई।
तेज हवा, बिजली चमकने या बारिश के दौरान स्थानीय लाइन में खराबी आने पर बिजली आपूर्ति अतिरिक्त रूप से प्रभावित हो सकती है।
लेकिन मौसम को दिनभर की सभी कटौतियों का कारण नहीं माना जा सकता। बुधवार की स्थानीय रिपोर्ट में बिजली संकट का मुद्दा मौसम चेतावनी से अलग और पहले से मौजूद वितरण समस्या के रूप में सामने आया है।
❗ सबसे बड़ा सवाल: NBPDCL की वेबसाइट पर बिजली बंद होने की जानकारी कहां है?
DarbhangaNews.in की जांच में NBPDCL की आधिकारिक वेबसाइट पर “Schedule Power Outage” नाम से व्यवस्था मौजूद मिली। वेबसाइट स्वयं “Power Outage” और “Power Outages (URJAMITRA)” के विकल्प दिखाती है। लेकिन बुधवार रात निर्धारित बिजली कटौती वाले सार्वजनिक पेज पर केवल “No Records Found!” दिखाई दे रहा था।
यहीं से जवाबदेही का सवाल पैदा होता है।
यदि दरभंगा के उपभोक्ता वास्तविक रूप से बार-बार बिजली कटौती झेल रहे हैं, तो विभाग की सार्वजनिक सूचना व्यवस्था में कम से कम यह जानकारी क्यों नहीं होनी चाहिए कि:
- कौन-सा फीडर बंद है?
- खराबी किस समय आई?
- कितने उपभोक्ता प्रभावित हैं?
- कारण ट्रांसफार्मर है, तार है या उपकेंद्र?
- मरम्मत दल कब पहुंचा?
- बिजली बहाल होने का अनुमानित समय क्या है?
- आपूर्ति कितनी देर तक बाधित रही?
आज उपभोक्ता के सामने स्थिति यह है कि उसके घर की बिजली घंटों या बार-बार बंद हो सकती है, लेकिन कंपनी की मुख्य सार्वजनिक वेबसाइट पर उसे “No Records Found” दिखाई देता है।
⚠️ निर्धारित और अचानक कटौती अलग हैं, लेकिन जनता के लिए दोनों बिजली कटौती ही हैं
NBPDCL यह तर्क दे सकता है कि संबंधित पेज केवल पूर्व निर्धारित रखरखाव कटौती के लिए है और अचानक ट्रांसफार्मर खराब होने या फीडर ट्रिप होने की सूचना उसमें नहीं आती।
तकनीकी दृष्टि से यह अंतर सही हो सकता है।
लेकिन आम उपभोक्ता के लिए सवाल सरल है—बिजली क्यों बंद है और कब आएगी?
इसलिए सार्वजनिक व्यवस्था केवल पहले से घोषित कटौती तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अचानक होने वाली खराबियों को भी तुरंत दर्ज किया जाना चाहिए।
देश की कई आधुनिक बिजली वितरण प्रणालियां वर्तमान और पूर्व निर्धारित दोनों प्रकार की बाधाओं की जानकारी उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रही हैं। NBPDCL को भी फीडर स्तर की वास्तविक समय जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर देना चाहिए।
🗓️ 11 अगस्त की घोषित कटौती और आज की समस्या अलग
दरभंगा में 11 अगस्त 2026 को कुछ इलाकों के लिए पहले से बिजली बंद रहने की सूचना जारी की गई थी। उस दिन सुबह कुछ समय के लिए रखरखाव और संबंधित कार्य के कारण आपूर्ति प्रभावित रहने की घोषणा की गई थी।
लेकिन वह कटौती 11 अगस्त की निर्धारित कार्रवाई थी।
12 अगस्त को सामने आ रही बार-बार की बाधा को उसी सूचना से जोड़ना सही नहीं होगा। NBPDCL के निर्धारित कटौती पेज पर बुधवार रात कोई नई सूची नहीं दिखाई दे रही थी।
इससे आज की समस्या के स्थानीय खराबी, अधिक भार या अचानक फीडर बंद होने से संबंधित होने की संभावना बढ़ती है, हालांकि इसकी अंतिम पुष्टि विभाग को ही करनी चाहिए।
📞 विभाग शिकायत दर्ज करने को कहता है, लेकिन जानकारी देना भी उसकी जिम्मेदारी
NBPDCL की आधिकारिक वेबसाइट बिजली से संबंधित शिकायत के लिए उपभोक्ताओं को ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था और 1912 हेल्पलाइन का इस्तेमाल करने को कहती है। शिकायत दर्ज होने के बाद उपभोक्ता को एक शिकायत संख्या उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी बताई गई है।
शिकायत दर्ज करने की सुविधा जरूरी है, लेकिन बिजली वितरण कंपनी की जिम्मेदारी केवल शिकायत लेने तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
यदि एक ही फीडर के हजारों लोगों की बिजली बंद है तो हर परिवार से अलग-अलग फोन कराने के बजाय विभाग को स्वयं सार्वजनिक सूचना जारी करनी चाहिए।
उदाहरण के लिए:
“11 केवी फलां फीडर रात 8:15 बजे ट्रांसफार्मर ओवरलोड होने के कारण बंद है। मरम्मत जारी है। संभावित बहाली रात 9:30 बजे।”
इतनी सी जानकारी भी हजारों उपभोक्ताओं की अनिश्चितता खत्म कर सकती है।
🧾 हर कटौती का सार्वजनिक रिकॉर्ड क्यों जरूरी?
फीडर स्तर पर बिजली बंद होने का सार्वजनिक इतिहास उपलब्ध होने से केवल उपभोक्ता को सुविधा नहीं होगी, बल्कि विभाग की जवाबदेही भी बढ़ेगी।
महीने के अंत में आसानी से देखा जा सकेगा कि:
- किस इलाके में सबसे ज्यादा बिजली गई?
- किस ट्रांसफार्मर में बार-बार समस्या आई?
- किस फीडर की मरम्मत के बाद भी खराबी दोहराई गई?
- औसतन आपूर्ति कितनी देर बाधित रही?
- किन इलाकों में क्षमता बढ़ाने की जरूरत है?
यदि ऐसी जानकारी सार्वजनिक ही नहीं होगी तो किसी क्षेत्र में खराब बिजली व्यवस्था का मूल्यांकन केवल लोगों की शिकायतों पर निर्भर रह जाएगा।
🏗️ अतिरिक्त ट्रांसफार्मर और क्षमता वृद्धि पर ठोस योजना जरूरी
दरभंगा के भीगो इलाके में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की मांग पहले ही सामने आ चुकी है। यदि बुधवार की कटौती में भी अधिक भार मुख्य कारण है तो कंपनी को शहर के सभी अधिक भार वाले ट्रांसफार्मरों की सूची तैयार करनी चाहिए।
इन जगहों पर तीन संभावित कदम जरूरी हैं:
- अधिक क्षमता का ट्रांसफार्मर लगाना
- मौजूदा भार को दो ट्रांसफार्मरों में बांटना
- जरूरत के अनुसार नया फीडर या वितरण व्यवस्था विकसित करना
सिर्फ खराबी आने पर मरम्मत करने से समस्या बार-बार लौट सकती है।
📊 जरूरी जानकारी एक नजर में
| विवरण | स्थिति |
|---|---|
| तारीख | 12 अगस्त 2026 |
| क्षेत्र | दरभंगा शहर और आसपास शिकायतें |
| प्रमुख समस्या | बार-बार बिजली कटौती |
| स्थानीय रिपोर्ट में प्रमुख कारण | ट्रांसफार्मर पर अधिक भार |
| असर | पानी, व्यापार, पढ़ाई और घरेलू काम |
| NBPDCL निर्धारित कटौती पेज | “No Records Found” |
| आज की शहरव्यापी निर्धारित कटौती | वेबसाइट पर दर्ज नहीं |
| 11 अगस्त | अलग निर्धारित कटौती हुई थी |
| मौसम | गर्मी-उमस, शाम को बिजली चमकने का अलर्ट |
| शिकायत नंबर | 1912 |
| सबसे बड़ा सवाल | अचानक होने वाली कटौती का सार्वजनिक रिकॉर्ड क्यों नहीं? |
🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण: बिजली कटे तो विभाग को कारण भी बताना चाहिए
दरभंगा में बार-बार बिजली जाने की समस्या को केवल “गर्मी बहुत है, इसलिए ट्रांसफार्मर पर भार है” कहकर छोड़ा नहीं जा सकता। यदि हर गर्मी में बढ़ी मांग का अनुमान पहले से होता है, तो ट्रांसफार्मर क्षमता और फीडर व्यवस्था बढ़ाना बिजली वितरण कंपनी की योजना का हिस्सा होना चाहिए।
इससे भी गंभीर समस्या सूचना की है। बुधवार रात NBPDCL की अपनी निर्धारित बिजली कटौती वेबसाइट पर कोई रिकॉर्ड नहीं दिख रहा था, जबकि उसी दिन शहर में बार-बार बिजली कटने की खबर सामने आ रही थी।
यह जरूर स्पष्ट होना चाहिए कि “Scheduled Power Outage” पेज पर अचानक खराबी दर्ज होना अनिवार्य रूप से अपेक्षित नहीं है। लेकिन यदि कंपनी के पास “Power Outages (URJAMITRA)” जैसी सेवा भी है, तो उपभोक्ताओं को आसानी से उपलब्ध एक ऐसा सार्वजनिक पटल मिलना चाहिए जहां निर्धारित और अचानक—दोनों तरह की बिजली बाधाओं की वास्तविक समय जानकारी मिले। NBPDCL की वेबसाइट स्वयं दोनों विकल्प दिखाती है।
DarbhangaNews.in का मानना है कि प्रत्येक 11 केवी फीडर और बिजली उपकेंद्र की कटौती का सार्वजनिक डिजिटल रिकॉर्ड होना चाहिए—कटौती कब शुरू हुई, क्यों हुई और कब बहाल हुई।
जब उपभोक्ता से हर यूनिट का हिसाब लिया जाता है, तो उपभोक्ता को हर लंबी बिजली कटौती का हिसाब मिलना भी चाहिए।
यही पारदर्शिता तय करेगी कि किसी इलाके में वास्तव में बिजली व्यवस्था सुधर रही है या केवल शिकायत आने पर अस्थायी मरम्मत की जा रही है।








