📍 पटना/दरभंगा | DarbhangaNews.in
बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों, प्रधान शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के तबादले को लेकर शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन होगी। विभाग ने साफ किया है कि पुराने ऑफलाइन और ऑनलाइन आवेदन मान्य नहीं होंगे और अब केवल पोर्टल से किए गए आवेदन पर ही विचार किया जाएगा। यह नियम दरभंगा सहित राज्य के सभी जिलों के शिक्षकों पर लागू होगा।
नई व्यवस्था में शिक्षकों को बड़ी राहत भी दी गई है। पहली बार स्थानांतरण प्रक्रिया में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए 5 वर्ष की न्यूनतम सेवा अवधि की शर्त को एक बार के लिए शिथिल किया गया है। इसका मतलब है कि कम सेवा अवधि वाले शिक्षक भी निर्धारित पात्रता पूरी करने पर आवेदन कर सकेंगे। हालांकि परिवीक्षा अवधि में कार्यरत शिक्षक, प्रधान शिक्षक और प्रधानाध्यापक इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे।
शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर 25 जून 2026 को “बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली, 2026” से संबंधित अधिसूचना दर्ज है। विभागीय पोर्टल पर नियमित, विद्यालय अध्यापक, विशिष्ट शिक्षक, प्रधान शिक्षक और प्रधानाध्यापकों के स्थानांतरण को विनियमित करने की अधिसूचना का उल्लेख किया गया है।
📌 मुख्य बातें
✅ शिक्षक तबादला प्रक्रिया अब ई-शिक्षाकोष पोर्टल से होगी
✅ पुराने ऑफलाइन और ऑनलाइन आवेदन रद्द माने जाएंगे
✅ पहली बार आवेदन करने वालों के लिए 5 साल की सेवा शर्त में एक बार की छूट
✅ परिवीक्षा अवधि में कार्यरत शिक्षक आवेदन नहीं कर सकेंगे
✅ सेवा अवधि और पात्रता की गणना के लिए 31 मार्च 2026 आधार तिथि
✅ शिक्षक अधिकतम 30 विद्यालयों का विकल्प दे सकेंगे
✅ अंतर-जिला या अंतर-प्रमंडल तबादले के लिए 5 जिलों/प्रमंडलों का विकल्प
✅ पहले अधिशेष शिक्षकों का समायोजन, फिर पारस्परिक और अंत में सामान्य तबादला
✅ 58 वर्ष या अधिक उम्र वाले शिक्षकों को बिना इच्छा अधिशेष मानकर नहीं हटाया जाएगा
✅ गंभीर बीमारी और दिव्यांगता के दावे वैध मेडिकल प्रमाणपत्र से मान्य होंगे
🏫 ई-शिक्षाकोष से ही पूरी होगी प्रक्रिया
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा बदलाव यह है कि तबादले से जुड़ी पूरी प्रक्रिया डिजिटल कर दी गई है। आवेदन, विद्यालय विकल्प, आपत्ति, शिकायत और अंतिम विद्यालय आवंटन जैसी गतिविधियां ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से होंगी। विभाग का उद्देश्य तबादला प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और पैरवी-मुक्त बनाना है।
इससे शिक्षकों को विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी। पोर्टल पर उपलब्ध रिक्ति और नियमों के आधार पर शिक्षक अपने विकल्प भर सकेंगे। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि पोर्टल के अलावा किसी अन्य माध्यम से आवेदन या आपत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी।
🧾 5 साल की सेवा शर्त में छूट, लेकिन परिवीक्षा वालों को इंतजार
शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी राहत 5 वर्ष की न्यूनतम सेवा अवधि की शर्त में दी गई छूट है। नई एसओपी के अनुसार पहली स्थानांतरण प्रक्रिया में आवेदन के लिए यह शर्त एक बार के लिए शिथिल की गई है। इससे वे शिक्षक भी आवेदन कर सकेंगे, जिनकी सेवा अवधि 5 साल से कम है।
लेकिन परिवीक्षा अवधि में कार्यरत शिक्षक, प्रधान शिक्षक और प्रधानाध्यापक इस प्रक्रिया में आवेदन नहीं कर पाएंगे। यह बात उन नए शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है जो हाल की नियुक्ति के बाद अपने गृह क्षेत्र या मनचाहे विद्यालय में जाने की उम्मीद कर रहे थे। उनके लिए पात्रता विभागीय सेवा स्थिति और परिवीक्षा अवधि पूरी होने पर निर्भर करेगी।
📍 30 विद्यालय और 5 जिलों का विकल्प
जिले के अंदर स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षक अधिकतम 30 विद्यालयों का विकल्प प्राथमिकता क्रम में दे सकेंगे। इससे शिक्षक अपने लिए सुविधाजनक विद्यालयों की सूची बना पाएंगे। वहीं अंतर-जिला या अंतर-प्रमंडल स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षक अधिकतम 5 जिलों या 5 प्रमंडलों का विकल्प दे सकेंगे।
हालांकि शिक्षक को यह स्पष्ट करना होगा कि वह अपने वर्तमान जिला/प्रमंडल के भीतर स्थानांतरण चाहता है या अंतर-जिला/अंतर-प्रमंडल स्थानांतरण। दोनों विकल्पों में से किसी एक को चुनना होगा।
🔢 अंक आधारित व्यवस्था से होगा आवंटन
तबादला प्रक्रिया में 100 अंकों वाली अंक आधारित प्रणाली का भी उपयोग किया जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार गंभीर बीमारी, दिव्यांगता, महिला शिक्षक, पति-पत्नी की अलग-अलग तैनाती, सेवा अवधि और वर्तमान पदस्थापन जैसे मानकों को वरीयता में शामिल किया गया है। एक ही विद्यालय के लिए कई दावेदार होने पर अंक आधारित वरीयता से फैसला होगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि तबादला केवल सिफारिश या दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि स्पष्ट मानकों के आधार पर हो। इससे शिक्षक अपनी पात्रता और प्राथमिकता को पोर्टल पर देख सकेंगे और प्रक्रिया पर भरोसा बढ़ेगा।
🔄 पहले अधिशेष समायोजन, फिर पारस्परिक तबादला
नई प्रक्रिया चरणबद्ध होगी। सबसे पहले अधिशेष शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा, ताकि जिन विद्यालयों में शिक्षक अधिक हैं और जहां कमी है, वहां संतुलन बनाया जा सके। इसके बाद पारस्परिक स्थानांतरण यानी दो शिक्षकों की आपसी सहमति से अदला-बदली की प्रक्रिया होगी। अंत में सामान्य स्थानांतरण की कार्रवाई की जाएगी।
जिन विद्यालयों में शिक्षक अधिशेष हैं, वहां 5 साल या उससे अधिक समय से कार्यरत शिक्षकों को चिह्नित करने की बात भी सामने आई है। एक से अधिक शिक्षक होने पर सेवा अवधि के आधार पर चयन होगा।
👩🏫 महिला, दिव्यांग और वरिष्ठ शिक्षकों को राहत
नई व्यवस्था में महिला शिक्षकों, गंभीर बीमारी से पीड़ित शिक्षकों, दिव्यांग शिक्षकों और वरिष्ठ शिक्षकों के लिए विशेष प्रावधान रखे गए हैं। गंभीर बीमारी या दिव्यांगता के दावे के लिए सक्षम चिकित्सा पदाधिकारी या मेडिकल बोर्ड का वैध प्रमाणपत्र जरूरी होगा। जरूरत पड़ने पर ऐसे प्रमाणपत्रों का मेडिकल बोर्ड से सत्यापन भी कराया जा सकता है।
31 मार्च 2026 तक 58 वर्ष या उससे अधिक आयु पूरी कर चुके शिक्षकों को बिना उनकी इच्छा के अधिशेष मानकर स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। वे तभी तबादले की प्रक्रिया में आएंगे जब वे स्वयं पोर्टल पर आवेदन करेंगे।
📍 दरभंगा के शिक्षकों पर क्या असर?
दरभंगा जिले के सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए यह व्यवस्था सीधे असर डालने वाली है। जिले के अंदर तबादला चाहने वाले शिक्षक 30 विद्यालयों का विकल्प दे सकेंगे। वहीं जो शिक्षक दरभंगा से दूसरे जिले या दूसरे प्रमंडल में जाना चाहते हैं, वे निर्धारित नियमों के अनुसार 5 जिलों/प्रमंडलों का विकल्प दे पाएंगे।
दरभंगा जैसे जिले में कई शिक्षक ग्रामीण, दूरस्थ या आवागमन में कठिन विद्यालयों में कार्यरत हैं। नई पोर्टल व्यवस्था से उन्हें दफ्तरों की भागदौड़ के बजाय ऑनलाइन आवेदन का रास्ता मिलेगा। हालांकि अंतिम फैसला रिक्ति, अंक, सेवा स्थिति और विभागीय पात्रता के आधार पर होगा।
📊 जरूरी जानकारी एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| राज्य | बिहार |
| विभाग | शिक्षा विभाग |
| नियमावली | बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली, 2026 |
| आवेदन माध्यम | ई-शिक्षाकोष पोर्टल |
| पुराने आवेदन | रद्द/अमान्य |
| 5 साल सेवा शर्त | पहली प्रक्रिया के लिए एक बार शिथिल |
| परिवीक्षा अवधि | ऐसे शिक्षक आवेदन के पात्र नहीं |
| आधार तिथि | 31 मार्च 2026 |
| जिले के अंदर विकल्प | अधिकतम 30 विद्यालय |
| अंतर-जिला/प्रमंडल विकल्प | अधिकतम 5 जिले या 5 प्रमंडल |
| प्रक्रिया क्रम | अधिशेष समायोजन, पारस्परिक, सामान्य तबादला |
| वरिष्ठ शिक्षक राहत | 58 वर्ष या अधिक उम्र वालों को बिना इच्छा अधिशेष नहीं हटाया जाएगा |
🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण
बिहार में शिक्षक तबादले की नई व्यवस्था शिक्षा विभाग के लिए बड़ा प्रशासनिक प्रयोग है। यदि ई-शिक्षाकोष पोर्टल सही ढंग से चलता है और रिक्तियों की सूची स्पष्ट रहती है, तो तबादले में पारदर्शिता बढ़ सकती है। इससे शिक्षकों को दफ्तरों की दौड़, सिफारिश और अनिश्चितता से राहत मिल सकती है।
5 साल की सेवा शर्त में छूट उन शिक्षकों के लिए बड़ी राहत है, जो कम सेवा अवधि के बावजूद पारिवारिक, स्वास्थ्य या अन्य कारणों से स्थानांतरण चाहते थे। लेकिन परिवीक्षा अवधि वाले शिक्षकों को बाहर रखने से नए नियुक्त शिक्षकों का इंतजार अभी जारी रहेगा।
दरभंगा सहित बिहार के सभी जिलों में असली चुनौती स्कूलों की वास्तविक रिक्ति, छात्र-शिक्षक अनुपात और पोर्टल डेटा की शुद्धता होगी। अगर डेटा गलत हुआ तो पारदर्शी व्यवस्था भी विवाद में फंस सकती है। इसलिए विभाग को आवेदन से पहले स्कूलवार स्वीकृत पद, कार्यरत शिक्षक, विषयवार रिक्ति और अधिशेष स्थिति स्पष्ट रूप से सार्वजनिक करनी चाहिए।








