बिहार में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को रफ्तार, 12 महीने में जरूरी मंजूरी पूरी करने का निर्देश

बिहार में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को रफ्तार, 12 महीने में जरूरी मंजूरी पूरी करने का निर्देश
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📍 पटना/बिहार | DarbhangaNews.in

बिहार में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर राज्य सरकार ने प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया है। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि प्रस्तावित 2×700 MW PHWR परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए जरूरी नियामकीय मंजूरियां और विभागीय स्वीकृतियां 12 महीने के भीतर पूरी की जाएं।

इन परियोजनाओं के लिए बिहार में चार संभावित स्थलों पर विचार किया गया था—भितिया और शंभूगंज, जिला बांका, रजौली, जिला नवादा और दरौली, जिला सीवान। हालांकि रजौली साइट को भूकंपीय सुरक्षा मानकों से जुड़ी आपत्ति के कारण सूची से हटाने की बात सामने आई है।


📌 मुख्य बातें

✅ बिहार में 2×700 MW PHWR परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की प्रक्रिया तेज
✅ प्रत्येक परियोजना की क्षमता 1,400 MW प्रस्तावित
✅ मुख्य सचिव ने 12 महीने में जरूरी मंजूरी पूरी करने का निर्देश दिया
✅ प्रस्तावित स्थल: भितिया, शंभूगंज, रजौली और दरौली
✅ रजौली साइट को fault line/भूकंपीय सुरक्षा कारणों से अनुपयुक्त बताया गया
✅ भितिया साइट के लिए बदुआ जलाशय से पानी की NOC और वन मंजूरी मिल चुकी बताई गई
✅ शंभूगंज और दरौली के लिए पानी की सशर्त उपलब्धता पर अध्ययन की तैयारी
✅ हर परियोजना के लिए लगभग 1,000 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई


बिहार में परमाणु ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम

बिहार लंबे समय से ऊर्जा खपत और औद्योगिक विकास के लिए बड़े बिजली स्रोतों की जरूरत महसूस करता रहा है। इसी संदर्भ में 2×700 MW की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को राज्य के भविष्य की ऊर्जा जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है।

हर परियोजना में दो 700 MW क्षमता वाली इकाइयां प्रस्तावित हैं। यानी एक परियोजना से कुल 1,400 MW बिजली उत्पादन की क्षमता बन सकती है।


चार प्रस्तावित स्थलों पर हुआ विचार

परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बिहार में चार स्थलों पर विचार किया गया—

प्रस्तावित स्थलजिलास्थिति
भितियाबांकापानी और वन मंजूरी से जुड़ी प्रगति बताई गई
शंभूगंजबांकाप्रारंभिक अध्ययन के लिए पानी की सशर्त उपलब्धता मांगी गई
रजौलीनवादाभूकंपीय सुरक्षा कारणों से अनुपयुक्त बताया गया
दरौलीसीवानभू-तकनीकी जांच और प्रारंभिक अध्ययन की तैयारी

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने अब तीन साइटों—भितिया, शंभूगंज और दरौली—के लिए मंजूरी प्रक्रिया तेज करने की दिशा में काम शुरू किया है।


भितिया साइट पर सबसे ज्यादा प्रगति

बांका जिले के भितिया स्थल को इस परियोजना में सबसे आगे माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भितिया के लिए बदुआ जलाशय से पानी उपलब्ध कराने की NOC और वन मंजूरी मिल चुकी है।

परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए पानी बेहद जरूरी होता है, क्योंकि रिएक्टर संचालन, कूलिंग सिस्टम और संयंत्र की अन्य प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर पानी की जरूरत होती है।


हर परियोजना को करीब 1,000 एकड़ जमीन की जरूरत

प्रस्तावित 2×700 MW PHWR परियोजना के लिए प्रति परियोजना करीब 1,000 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है। इतनी बड़ी जमीन की जरूरत के कारण भूमि चयन, पर्यावरणीय अनुमति, पुनर्वास, जल स्रोत और स्थानीय स्वीकृति जैसे मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

अगर परियोजना आगे बढ़ती है, तो जमीन अधिग्रहण या जमीन उपलब्धता की प्रक्रिया राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती होगी।


पानी की जरूरत भी बड़ी

प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए वार्षिक पानी की जरूरत करीब 80 मिलियन क्यूबिक मीटर बताई गई है। इसमें से लगभग 58 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी संचालन के दौरान खपत हो सकता है।

इसी कारण शंभूगंज और दरौली जैसी साइटों के लिए सरकार ने सशर्त जल उपलब्धता की मांग की है, ताकि भू-तकनीकी जांच और प्रारंभिक साइट अध्ययन आगे बढ़ सके।


रजौली साइट क्यों पीछे हट गई?

नवादा जिले के रजौली स्थल को पहले संभावित साइट के रूप में देखा गया था, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार NTPC ने इसे अनुपयुक्त माना है। वजह यह बताई गई है कि साइट के पास fault line है, जो AERB के भूकंपीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं बैठती।

परमाणु ऊर्जा परियोजना में भूकंपीय सुरक्षा सबसे अहम मानकों में से एक होती है। ऐसी परियोजनाओं में जमीन की मजबूती, भूकंप का जोखिम, जल स्रोत, आबादी से दूरी और पर्यावरणीय असर की कड़ी जांच की जाती है।


PHWR क्या होता है?

PHWR का मतलब है Pressurised Heavy Water Reactor। यह भारत में इस्तेमाल की जाने वाली महत्वपूर्ण परमाणु रिएक्टर तकनीक है। 700 MW क्षमता वाले स्वदेशी PHWR रिएक्टर भारत की परमाणु ऊर्जा योजना का अहम हिस्सा हैं।

PIB के अनुसार, 700 MW PHWR रिएक्टर भारत की 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। एक 700 MW रिएक्टर 85% प्लांट लोड फैक्टर पर सालाना लगभग 5.2 बिलियन यूनिट स्वच्छ बिजली पैदा कर सकता है और बड़े पैमाने पर कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद कर सकता है।


बिहार को क्या फायदा हो सकता है?

अगर बिहार में 2×700 MW की परमाणु ऊर्जा परियोजना स्थापित होती है, तो राज्य को कई स्तरों पर फायदा मिल सकता है।

  • राज्य को बड़े पैमाने पर स्थिर बिजली स्रोत मिलेगा
  • उद्योगों के लिए बिजली उपलब्धता मजबूत हो सकती है
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार और ठेका कार्य बढ़ सकते हैं
  • सड़क, पानी, आवास और सुरक्षा जैसी आधारभूत संरचना विकसित हो सकती है
  • ऊर्जा क्षेत्र में बिहार की रणनीतिक भूमिका मजबूत हो सकती है
  • स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन से कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम हो सकती है

स्थानीय स्तर पर क्या सवाल उठ सकते हैं?

परियोजना बड़ी है, इसलिए स्थानीय स्तर पर कई सवाल भी उठेंगे। इनमें जमीन, पानी, सुरक्षा, पर्यावरण और पुनर्वास सबसे अहम हैं।

लोग यह जानना चाहेंगे कि—

  • जमीन कैसे उपलब्ध कराई जाएगी
  • कितने परिवार प्रभावित होंगे
  • मुआवजा और पुनर्वास नीति क्या होगी
  • पानी किस स्रोत से आएगा
  • जलाशय और नदी पर कितना दबाव पड़ेगा
  • सुरक्षा व्यवस्था कैसी होगी
  • स्थानीय लोगों को रोजगार में कितनी प्राथमिकता मिलेगी
  • पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन कैसे होगा

इन सवालों पर स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी देना जरूरी होगा।


12 महीने की समयसीमा क्यों महत्वपूर्ण है?

मुख्य सचिव द्वारा 12 महीने की समयसीमा तय करना इस बात का संकेत है कि सरकार परियोजना को कागजी स्तर से आगे ले जाना चाहती है। परमाणु ऊर्जा परियोजना में कई तरह की मंजूरी जरूरी होती है—जल उपलब्धता, वन मंजूरी, पर्यावरणीय मंजूरी, भू-तकनीकी जांच, भूकंपीय सुरक्षा, भूमि, स्थानीय प्रशासनिक अनुमति और केंद्रीय नियामकीय स्वीकृति।

समयसीमा तय होने से संबंधित विभागों पर काम तेजी से आगे बढ़ाने का दबाव बनेगा।


📋 जरूरी जानकारी एक नजर में

विषयजानकारी
परियोजना2×700 MW PHWR परमाणु ऊर्जा परियोजना
प्रति परियोजना क्षमता1,400 MW
प्रस्तावित स्थलभितिया, शंभूगंज, रजौली, दरौली
जिलेबांका, नवादा, सीवान
समयसीमा12 महीने में जरूरी मंजूरी पूरी करने का निर्देश
जमीन जरूरतकरीब 1,000 एकड़ प्रति परियोजना
वार्षिक पानी जरूरतकरीब 80 MCM
संचालन में पानी खपतकरीब 58 MCM
भितिया स्थितिबदुआ जलाशय से पानी NOC और वन मंजूरी मिल चुकी बताई गई
रजौली स्थितिfault line के कारण अनुपयुक्त बताया गया
दरौली/शंभूगंजप्रारंभिक अध्ययन के लिए जल आश्वासन की मांग

📊 DarbhangaNews.in Analysis

बिहार में परमाणु ऊर्जा परियोजना राज्य के ऊर्जा भविष्य के लिए बड़ा मोड़ साबित हो सकती है। अगर 1,400 MW क्षमता वाली एक भी परियोजना जमीन पर उतरती है, तो बिहार को लंबे समय के लिए स्थिर और बड़े बिजली स्रोत का लाभ मिल सकता है। इससे उद्योग, शहरीकरण और रोजगार के अवसरों को भी गति मिल सकती है।

लेकिन परमाणु ऊर्जा परियोजनाएं बेहद संवेदनशील होती हैं। जमीन, पानी, भूकंपीय सुरक्षा, पर्यावरण, स्थानीय सहमति और पुनर्वास जैसे मुद्दों पर पूरी पारदर्शिता जरूरी है। रजौली साइट का भूकंपीय कारणों से बाहर होना दिखाता है कि सुरक्षा मानकों पर कोई समझौता नहीं हो सकता। अब सरकार और एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि भितिया, शंभूगंज और दरौली जैसी साइटों पर हर जांच वैज्ञानिक तरीके से पूरी करें और स्थानीय लोगों को समय रहते स्पष्ट जानकारी दें।

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