
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) में अतिथि शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को बड़ा झटका लगा है। 561 पदों पर चल रही बहाली प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लग गई है। इस फैसले से 13 हजार से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है, जिन्होंने भर्ती के लिए आवेदन किया था।
📚 561 पदों की बहाली प्रक्रिया अचानक रुकी
मिथिला विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कॉलेजों में शैक्षणिक व्यवस्था मजबूत करने के लिए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की गई थी। कुल 561 रिक्त पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे।
लेकिन अब लोकभवन के निर्देश के बाद भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। इसके कारण नियुक्ति का इंतजार कर रहे हजारों अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
🏫 चार जिलों के कॉलेजों में होनी थी नियुक्ति
विश्वविद्यालय के अधीन दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और बेगूसराय जिले के अंगीभूत एवं नवस्थापित कॉलेजों में अतिथि शिक्षकों की बहाली प्रस्तावित थी।
पहले चरण में 14 विषयों के लिए 201 पदों पर आवेदन आमंत्रित किए गए थे। बाद में नवस्थापित 30 डिग्री कॉलेजों के लिए 360 अतिरिक्त पद जोड़ दिए गए, जिसके बाद कुल रिक्तियों की संख्या 561 हो गई।
📈 13 हजार से अधिक युवाओं ने किया आवेदन
भर्ती प्रक्रिया को लेकर युवाओं में जबरदस्त उत्साह था।
विश्वविद्यालय की ओर से जारी आवेदन प्रक्रिया में बिहार समेत अन्य राज्यों के 13 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किया था।
कई उम्मीदवार दस्तावेज सत्यापन और आगे की चयन प्रक्रिया की तैयारी में जुटे हुए थे, लेकिन अचानक आई रोक ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है।
⚠️ गजट अधिसूचना नहीं होने पर उठा विवाद
इस पूरे मामले की जड़ में नवसृजित 360 पदों को बताया जा रहा है।
जानकारों के अनुसार किसी भी नए पद पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने से पहले सरकार द्वारा आधिकारिक गजट (राजपत्र) प्रकाशित किया जाना आवश्यक होता है। लेकिन इस मामले में गजट अधिसूचना जारी होने से पहले ही भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
🎓 शिक्षाविदों ने उठाए सवाल
शिक्षा जगत से जुड़े विशेषज्ञों ने इस मामले को प्रशासनिक चूक बताया है।
उनका कहना है कि—
🗣️ “नवसृजित पदों पर बहाली शुरू करने से पहले गजट अधिसूचना प्रकाशित होना जरूरी था। कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना भर्ती शुरू करना बड़ी तकनीकी गलती है।”
इसी आधार पर लोकभवन ने पूरी प्रक्रिया पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
😟 अभ्यर्थियों में बढ़ी चिंता
भर्ती प्रक्रिया रुकने के बाद उम्मीदवारों के बीच निराशा का माहौल है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे वर्षों से शिक्षक बहाली का इंतजार कर रहे थे। अब प्रशासनिक और तकनीकी खामियों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
🗣️ “सरकार और विभाग की आपसी समन्वय की कमी के कारण हमारे भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।”
🔍 आगे क्या होगा?
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन सरकार और संबंधित विभागों के अगले निर्देश का इंतजार कर रहा है।
यदि गजट अधिसूचना संबंधी प्रक्रिया पूरी हो जाती है, तो भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू हो सकती है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई आधिकारिक समयसीमा तय नहीं की गई है।
हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें अब सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।
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