Darbhanga News: जाले के जोगियारा में सीपीआई नेता हरेश सिंह का निधन, मजरा गांव में अंतिम दर्शन को उमड़ी भीड़

Darbhanga News: जाले के जोगियारा में सीपीआई नेता हरेश सिंह का निधन, मजरा गांव में अंतिम दर्शन को उमड़ी भीड़
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📍 जोगियारा पंचायत, जाले प्रखंड, दरभंगा | DarbhangaNews.in

दरभंगा जिले के जाले प्रखंड की जोगियारा पंचायत से दुखद खबर सामने आई है। सीपीआई नेता, जोगियारा पंचायत के पूर्व सरपंच और जाले विधानसभा क्षेत्र की वामपंथी-समाजवादी राजनीति से लंबे समय तक जुड़े रहे हरेश सिंह का शुक्रवार को निधन हो गया। वे 68 वर्ष के थे और कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। इलाज के दौरान उन्होंने डीएमसीएच में अंतिम सांस ली।

हरेश सिंह के निधन की सूचना मिलते ही जोगियारा, मजरा गांव, जाले और आसपास के इलाके में शोक की लहर फैल गई। अंतिम दर्शन के लिए उनके पार्थिव शरीर को जोगियारा पंचायत के मजरा गांव स्थित आवास पर रखा गया, जहां स्थानीय लोगों, सीपीआई कार्यकर्ताओं, समर्थकों और जनप्रतिनिधियों की बड़ी संख्या पहुंची।

स्थानीय राजनीति और पंचायत स्तर के जनसरोकारों में सक्रिय रहने वाले हरेश सिंह ने 2007 से 2022 तक जाले अंचल सीपीआई के सचिव के रूप में काम किया। वे 2016 से 2021 तक जोगियारा पंचायत के सरपंच भी रहे। वर्तमान में वे बिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन की राज्य काउंसिल के सदस्य थे।

📌 मुख्य बातें

✅ जाले प्रखंड की जोगियारा पंचायत के पूर्व सरपंच हरेश सिंह का निधन
✅ 68 वर्ष की उम्र में डीएमसीएच में इलाज के दौरान अंतिम सांस
✅ कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे
✅ 2007 से 2022 तक जाले अंचल सीपीआई के सचिव रहे
✅ 2016 से 2021 तक जोगियारा पंचायत के सरपंच रहे
✅ बिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन राज्य काउंसिल के सदस्य थे
✅ मजरा गांव स्थित आवास पर अंतिम दर्शन के लिए भीड़ उमड़ी
✅ दरभंगा और मधुबनी के सीपीआई नेता अंतिम यात्रा में शामिल हुए
✅ विधायक जीबेश कुमार और पूर्व विधायक राम निवास प्रसाद ने शोक जताया

🟥 जोगियारा पंचायत और जाले की राजनीति में सक्रिय भूमिका

हरेश सिंह जाले विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाते थे। वे सीपीआई से जुड़े रहे और जाले अंचल स्तर पर संगठन को मजबूत करने में उनकी भूमिका मानी जाती थी।

जोगियारा पंचायत में सरपंच रहने के दौरान वे स्थानीय विवाद, पंचायत स्तर की समस्याओं और जनसरोकार के मुद्दों से जुड़े रहे। ग्रामीण राजनीति में सरपंच की भूमिका केवल पद तक सीमित नहीं होती, बल्कि गांव-समाज के बीच संवाद और समाधान से भी जुड़ी रहती है। इसी वजह से उनके निधन को जोगियारा पंचायत और जाले क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।

🏥 डीएमसीएच में ली अंतिम सांस

रिपोर्ट के अनुसार हरेश सिंह कुछ दिनों से बीमार थे और उनका इलाज दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल यानी डीएमसीएच में चल रहा था। शुक्रवार को इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।

डीएमसीएच दरभंगा और मिथिला क्षेत्र का प्रमुख सरकारी चिकित्सा केंद्र है। जाले, सिंहवाड़ा, कमतौल, केवटी और आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर रहते हैं।

🏡 मजरा गांव में अंतिम दर्शन के लिए जुटे लोग

निधन के बाद हरेश सिंह के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए जोगियारा पंचायत के मजरा गांव स्थित उनके आवास पर रखा गया। यहां स्थानीय ग्रामीणों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से यह साफ दिखा कि वे क्षेत्र के सामाजिक और राजनीतिक जीवन में गहरी पहचान रखते थे। ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे नेताओं का प्रभाव केवल पार्टी संगठन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि व्यक्तिगत संबंध और जनसंपर्क से भी जुड़ा होता है।

🚩 सीपीआई नेताओं और समर्थकों ने दी श्रद्धांजलि

हरेश सिंह की अंतिम यात्रा में दरभंगा जिला सीपीआई के सचिव नारायणजी झा, मधुबनी जिला सीपीआई के सचिव मिथिलेश झा, वर्तमान अंचल सचिव चंद्र किशोर झा, सीपीआई नेता अहमद अली तमन्ने, सीपीआई जिला कोषाध्यक्ष सुधीर कुमार शाह, शब्बीर बेग, सीपीआई राज्य कंट्रोल कमीशन के पूर्व सदस्य शशिकांत चौधरी सहित कई नेता शामिल हुए।

इसके अलावा शरफराज अंसारी, नरेश चौधरी, शहजाद तमन्ना, छात्र नेता अवनीश कुमार, कुमार किशलय और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। नेताओं और समर्थकों ने उनके राजनीतिक योगदान और जनसरोकार से जुड़े कामों को याद किया।

🕯️ विधायक और पूर्व विधायक ने जताया शोक

जाले क्षेत्र के विधायक जीबेश कुमार और पूर्व विधायक राम निवास प्रसाद ने भी हरेश सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ओर से शोक व्यक्त किया जाना इस बात का संकेत है कि हरेश सिंह की पहचान दलगत सीमा से आगे भी थी। पंचायत और प्रखंड स्तर पर सक्रिय रहे नेताओं का योगदान अक्सर स्थानीय समाज की स्मृति में लंबे समय तक बना रहता है।

🌾 खेत मजदूरों और आम लोगों से जुड़ा रहा काम

हरेश सिंह वर्तमान में बिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन की राज्य काउंसिल के सदस्य थे। यह तथ्य बताता है कि उनका राजनीतिक काम केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि खेत मजदूरों, ग्रामीण श्रमिकों और कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों तक फैला हुआ था।

मिथिला और खासकर जाले क्षेत्र में कृषि, मजदूरी, पलायन, जमीन विवाद और ग्रामीण रोजी-रोटी जैसे मुद्दे आज भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में खेत मजदूर संगठन से जुड़े नेता गांवों के सामाजिक-आर्थिक सवालों को उठाने में भूमिका निभाते रहे हैं।

📊 जरूरी जानकारी एक नजर में

विवरणजानकारी
नामहरेश सिंह
उम्र68 वर्ष
क्षेत्रजोगियारा पंचायत, जाले प्रखंड, दरभंगा
गांवमजरा गांव
राजनीतिक दलसीपीआई
पदजोगियारा पंचायत के पूर्व सरपंच
संगठनात्मक भूमिका2007 से 2022 तक जाले अंचल सीपीआई सचिव
पंचायत पद2016 से 2021 तक सरपंच
वर्तमान भूमिकाबिहार राज्य खेत मजदूर यूनियन राज्य काउंसिल सदस्य
निधन स्थलडीएमसीएच, दरभंगा
शोक व्यक्त करने वालेविधायक जीबेश कुमार, पूर्व विधायक राम निवास प्रसाद और सीपीआई नेता

🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण

हरेश सिंह का निधन जाले प्रखंड और जोगियारा पंचायत की स्थानीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति है। वे लंबे समय तक सीपीआई संगठन से जुड़े रहे और पंचायत स्तर पर सरपंच के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। ऐसे नेता गांवों में पार्टी, पंचायत और आम लोगों के बीच सेतु का काम करते हैं।

मिथिला के ग्रामीण इलाकों में स्थानीय राजनीति अक्सर व्यक्तिगत भरोसे, सामाजिक भागीदारी और लगातार मौजूदगी पर टिकती है। हरेश सिंह का लंबा राजनीतिक जीवन इसी तरह की जमीनी सक्रियता से जुड़ा रहा।

उनकी अंतिम यात्रा में स्थानीय लोगों और अलग-अलग जिलों के सीपीआई नेताओं की मौजूदगी बताती है कि उनका प्रभाव केवल जोगियारा पंचायत तक सीमित नहीं था, बल्कि जाले अंचल और दरभंगा-मधुबनी के वामपंथी राजनीतिक दायरे में भी उनकी पहचान थी।

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