📍 दरभंगा | DarbhangaNews.in
दरभंगा और आसपास के गन्ना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण औद्योगिक पहल सामने आई है। इंडियन पोटाश लिमिटेड—IPL के बिहार प्रमुख सतविंदर सिंह सैनी के नेतृत्व में आई टीम ने दरभंगा के ईख अधिकारियों के साथ नई चीनी मिल की स्थापना से जुड़े आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा की। बैठक के बाद टीम ने रैयाम और सकरी के पुराने चीनी मिल क्षेत्रों का स्थल निरीक्षण भी किया।
दरभंगा जिला प्रशासन के अनुसार बैठक 17 जुलाई 2026 को ईख पदाधिकारी के कार्यालय में हुई। चर्चा के दौरान क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, गन्ने की पारंपरिक खेती और वैज्ञानिक पद्धति से उत्पादन बढ़ाने की संभावनाओं पर विशेष रूप से विचार किया गया।
हालांकि इस बैठक को नई चीनी मिल की दिशा में सकारात्मक शुरुआती कदम माना जा रहा है, लेकिन इंडियन पोटाश लिमिटेड की ओर से निवेश, मिल की क्षमता, स्थान, लागत या निर्माण शुरू करने की कोई औपचारिक घोषणा अभी नहीं की गई है।
📌 मुख्य बातें
✅ IPL के बिहार प्रमुख सतविंदर सिंह सैनी के नेतृत्व में दरभंगा पहुंची टीम
✅ ईख पदाधिकारी के कार्यालय में नई चीनी मिल की संभावना पर चर्चा
✅ क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और गन्ने की उपलब्धता पर विचार
✅ पारंपरिक और वैज्ञानिक गन्ना खेती पर हुआ मंथन
✅ रैयाम और सकरी के पुराने चीनी मिल क्षेत्रों का निरीक्षण
✅ दोनों बंद मिलों को पुनर्जीवित करने की अलग सरकारी प्रक्रिया भी जारी
✅ रैयाम चीनी मिल की डीपीआर तैयार होने की जानकारी
✅ गन्ना किसानों की सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू
✅ प्रस्तावित परिसरों में चीनी के साथ एथेनॉल, बिजली और CBG उत्पादन की योजना
✅ IPL की भागीदारी और निवेश पर अंतिम निर्णय अभी सामने नहीं आया
🏢 ईख पदाधिकारी के कार्यालय में हुई महत्वपूर्ण बैठक
जिला प्रशासन की सूचना के अनुसार IPL की टीम ने दरभंगा के ईख पदाधिकारी के कार्यालय में अधिकारियों के साथ बैठक की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य नई चीनी मिल स्थापित करने के लिए आवश्यक प्रारंभिक परिस्थितियों को समझना था। इसमें संभावित गन्ना क्षेत्र, किसानों की वर्तमान खेती, मिट्टी, सिंचाई, बाढ़ और परिवहन जैसी स्थानीय परिस्थितियों पर चर्चा की गई।
चीनी मिल की व्यवहार्यता केवल जमीन की उपलब्धता से तय नहीं होती। मिल को नियमित रूप से चलाने के लिए पर्याप्त मात्रा में गन्ना, समय पर ढुलाई, पानी, बिजली और प्रशिक्षित श्रमिकों की उपलब्धता आवश्यक होती है।
👨💼 सतविंदर सिंह सैनी ने किया टीम का नेतृत्व
बैठक में इंडियन पोटाश लिमिटेड के बिहार प्रमुख सतविंदर सिंह सैनी और उनकी टीम शामिल हुई।
IPL मूल रूप से उर्वरक वितरण से जुड़ी प्रमुख कंपनी है, लेकिन कंपनी ने समय के साथ चीनी, एथेनॉल, बायो-CNG, डेयरी और ग्रामीण भंडारण जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार किया है। कंपनी की आधिकारिक जानकारी के अनुसार उसकी कई उत्पादन इकाइयां चीनी और उससे जुड़े उत्पादों के क्षेत्र में काम करती हैं।
इस अनुभव के कारण IPL की टीम का रैयाम और सकरी क्षेत्र का निरीक्षण औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
🗺️ भौगोलिक स्थिति पर हुई चर्चा
बैठक में क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों पर विशेष चर्चा की गई। दरभंगा और मधुबनी का बड़ा हिस्सा बाढ़ तथा जलजमाव से प्रभावित रहता है।
नई चीनी मिल के लिए ऐसी जमीन की जरूरत होगी जहां भारी मशीनरी, गोदाम, गन्ना यार्ड, बॉयलर, डिस्टिलरी और बिजली उत्पादन इकाई सुरक्षित तरीके से विकसित की जा सके।
मिल परिसर के साथ मजबूत सड़क, वर्षभर उपयोग योग्य पहुंच मार्ग और जलनिकासी की पर्याप्त व्यवस्था भी आवश्यक होगी।
🌱 पारंपरिक गन्ना खेती का लिया गया जायजा
मिथिला में पहले बड़े क्षेत्र में गन्ने की खेती होती थी। रैयाम और सकरी चीनी मिलों के बंद होने के बाद किसानों का स्थानीय बाजार समाप्त हो गया और धीरे-धीरे गन्ने का रकबा कम होता चला गया।
IPL और ईख विभाग के बीच हुई चर्चा में क्षेत्र की पारंपरिक खेती और पुराने गन्ना उत्पादन इलाकों पर भी विचार किया गया। जिला प्रशासन ने बैठक में पारंपरिक और वैज्ञानिक खेती दोनों पर विशेष प्रकाश डाले जाने की जानकारी दी है।
🧪 वैज्ञानिक खेती से उत्पादन बढ़ाने पर जोर
किसी बड़ी चीनी मिल के नियमित संचालन के लिए हर वर्ष पर्याप्त गन्ने की जरूरत होगी। इसके लिए किसानों को अधिक उपज देने वाली किस्म, रोगमुक्त बीज, मिट्टी परीक्षण, समय पर सिंचाई और आधुनिक कृषि यंत्रों से जोड़ना होगा।
वैज्ञानिक खेती अपनाने से प्रति एकड़ गन्ना उत्पादन और चीनी की रिकवरी बढ़ाई जा सकती है। साथ ही किसानों को बीज नर्सरी, प्रशिक्षण और फसल सुरक्षा से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध करानी होंगी।
बैठक में इन विषयों पर चर्चा होना इस बात का संकेत है कि परियोजना के साथ गन्ना आपूर्ति व्यवस्था को भी प्रारंभिक स्तर से समझने का प्रयास किया जा रहा है।
🚗 बैठक के बाद रैयाम और सकरी का निरीक्षण
कार्यालय में चर्चा के बाद IPL की टीम ने रैयाम और सकरी चीनी मिल क्षेत्रों का भ्रमण किया।
निरीक्षण के दौरान उपलब्ध जमीन, पुरानी इमारतों, संपर्क सड़क, आसपास की खेती और भविष्य में नई औद्योगिक इकाई विकसित करने की संभावनाओं का प्रारंभिक जायजा लिया गया। जिला प्रशासन की सूचना में निरीक्षण की पुष्टि की गई है, लेकिन टीम की विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।
🏭 पुरानी मशीनों की जगह बन सकती है आधुनिक इकाई
रैयाम और सकरी की पुरानी चीनी मिलें दशकों से बंद हैं। पुरानी मशीनरी और भवनों की स्थिति को देखते हुए केवल मरम्मत करके उत्पादन शुरू करना व्यवहारिक होगा या पूरी तरह नई इकाई बनानी पड़ेगी, इसका निर्णय तकनीकी अध्ययन के बाद होगा।
राज्य सरकार की मौजूदा योजना दोनों स्थानों पर आधुनिक सहकारी औद्योगिक परिसर स्थापित करने की है। इनमें चीनी उत्पादन के साथ बिजली, एथेनॉल और कंप्रेस्ड बायोगैस उत्पादन की इकाइयां शामिल करने का प्रस्ताव है।
📜 रैयाम और सकरी के पुनरुद्धार की प्रक्रिया पहले से जारी
IPL टीम का निरीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब बिहार सरकार पहले से ही रैयाम और सकरी की बंद चीनी मिलों को सहकारी मॉडल पर पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।
फरवरी 2026 में बिहार के सहकारिता विभाग और नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड—NFCSF के बीच समझौता हुआ था। NFCSF को व्यवहार्यता रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई।
📄 रैयाम चीनी मिल की डीपीआर तैयार
जून 2026 की समीक्षा में बताया गया था कि रैयाम चीनी मिल की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होकर सहकारिता विभाग को सौंपी जा चुकी है।
सरकार ने कहा था कि डीपीआर के आधार पर परियोजना के लिए राशि आवंटित की जाएगी। डीपीआर में मिल की प्रस्तावित क्षमता, तकनीक, निवेश और संचालन से जुड़े प्रमुख बिंदु शामिल होने की उम्मीद है।
अब यह स्पष्ट होना बाकी है कि IPL टीम का मौजूदा दौरा इसी सहकारी परियोजना के लिए संभावित तकनीकी या संचालन साझेदारी से जुड़ा है अथवा कंपनी अलग निवेश प्रस्ताव का अध्ययन कर रही है।
🤝 IPL और NFCSF की भूमिका में अंतर
रैयाम और सकरी चीनी मिलों के पुनरुद्धार के लिए वर्तमान औपचारिक समझौता बिहार सरकार और NFCSF के बीच हुआ है।
NFCSF को डीपीआर, व्यवहार्यता अध्ययन और सलाहकार सेवाओं के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। IPL के साथ दरभंगा में हुई बैठक को जिला प्रशासन ने नई चीनी मिल की स्थापना से जुड़े आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा और क्षेत्र भ्रमण के रूप में बताया है।
IPL के साथ किसी नए समझौता ज्ञापन, संचालन अनुबंध या निवेश प्रस्ताव की घोषणा अभी नहीं हुई है।
🌾 2,401 गांवों को मिल क्षेत्रों से जोड़ने की योजना
सरकार ने रैयाम और सकरी मिलों के लिए गन्ना आपूर्ति क्षेत्र निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू की है।
रैयाम चीनी मिल के लिए मधुबनी के 438 और दरभंगा के 580 गांव चिह्नित किए गए हैं। सकरी के लिए मधुबनी के 686 और दरभंगा के 697 गांव आरक्षित किए गए हैं। इस प्रकार दोनों प्रस्तावित मिल क्षेत्रों से कुल 2,401 गांवों को जोड़ने की योजना है।
इन क्षेत्रों में किसानों को दोबारा बड़े स्तर पर गन्ने की खेती के लिए प्रेरित किया जाएगा।
👨🌾 किसानों की सहकारी समितियां बनाने की प्रक्रिया
रैयाम और सकरी के लिए अलग-अलग प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियां गठित की जा रही हैं।
इन समितियों में संबंधित क्षेत्रों के गन्ना किसानों को सदस्य बनाया जाएगा। सामान्य श्रेणी के किसान के लिए न्यूनतम 100 डिसमिल जमीन पर गन्ना उत्पादन की पात्रता निर्धारित की गई है। अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग और महिला किसानों के लिए न्यूनतम सीमा 50 डिसमिल रखी गई है।
सदस्य किसानों का कृषि विभाग के DBT पोर्टल पर पंजीकरण आवश्यक होगा।
💵 किसानों को मिल सकता है स्थायी बाजार
चीनी मिल शुरू होने पर किसानों को अपने गन्ने के लिए स्थानीय और स्थायी खरीदार उपलब्ध हो सकता है।
अभी किसानों को गन्ना बेचने के लिए दूर स्थित मिलों पर निर्भर रहना पड़ सकता है, जिससे ढुलाई खर्च बढ़ता है और कटाई के बाद समय पर पेराई की समस्या उत्पन्न होती है।
स्थानीय मिल होने से गन्ना कटाई और पेराई के बीच का समय कम किया जा सकता है। इससे गन्ने की गुणवत्ता और किसानों के भुगतान दोनों में सुधार हो सकता है।
⚡ चीनी के साथ बिजली और एथेनॉल की योजना
आधुनिक चीनी मिलें केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं रहतीं। गन्ने की खोई से बिजली, शीरे से एथेनॉल और दूसरे अवशेषों से कंप्रेस्ड बायोगैस बनाई जा सकती है।
सरकार की रैयाम और सकरी परियोजना में भी चीनी के साथ बिजली, एथेनॉल और CBG उत्पादन वाले एकीकृत औद्योगिक परिसर प्रस्तावित हैं।
इन अतिरिक्त उत्पादों से मिल की आय के स्रोत बढ़ सकते हैं और केवल चीनी के बाजार मूल्य पर निर्भरता कम हो सकती है।
🧑🏭 स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार की उम्मीद
नई चीनी मिल स्थापित होने पर निर्माण, मशीन संचालन, परिवहन, गोदाम, सुरक्षा, तकनीकी रखरखाव और प्रशासनिक कार्यों में रोजगार पैदा हो सकते हैं।
इसके अलावा गन्ना कटाई, ट्रैक्टर और ट्रक परिवहन, बीज उत्पादन, कृषि उपकरण और खाद-कीटनाशक से जुड़े स्थानीय व्यवसाय भी बढ़ सकते हैं।
रोजगार की वास्तविक संख्या मिल की क्षमता और परियोजना के अंतिम स्वरूप के बाद ही स्पष्ट होगी।
🛤️ सड़क और गन्ना ढुलाई नेटवर्क होगा जरूरी
मिल की सफलता के लिए किसानों के खेत से गन्ना समय पर परिसर तक पहुंचाना आवश्यक होगा।
इसके लिए गांवों को मुख्य मिल से जोड़ने वाली सड़कों, छोटे पुलों और गन्ना खरीद केंद्रों की जरूरत होगी। बारिश तथा बाढ़ के समय भी ढुलाई जारी रखने के लिए मजबूत परिवहन व्यवस्था विकसित करनी होगी।
रैयाम में पुराने समय की करीब 14 किलोमीटर लंबी ट्रॉली लाइन होने की जानकारी भी सरकारी पुनरुद्धार से जुड़ी रिपोर्टों में दी गई है।
🏚️ 1997 से बंद हैं दोनों पुरानी मिलें
रैयाम और सकरी की चीनी मिलें वर्ष 1997 से बंद बताई गई हैं।
रैयाम चीनी मिल की स्थापना 1914 और सकरी मिल की स्थापना 1933 में हुई थी। सरकारी पुनरुद्धार योजना से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार सकरी में करीब 47 एकड़ और रैयाम में 68 एकड़ से अधिक जमीन उपलब्ध है।
लंबे समय से बंद रहने के कारण पुराने भवनों और मशीनों की तकनीकी उपयोगिता की अलग से जांच आवश्यक होगी।
⚠️ अभी केवल संभावनाओं पर चर्चा
नई बैठक को मिल का निर्माण शुरू होने या IPL द्वारा परियोजना स्वीकार कर लेने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में केवल नई चीनी मिल की स्थापना के आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा और रैयाम-सकरी क्षेत्र के निरीक्षण का उल्लेख है।
निवेश, जमीन, उत्पादन क्षमता, परियोजना लागत, निर्माण एजेंसी और काम शुरू होने की तारीख पर कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है।
🔍 व्यवहार्यता अध्ययन में क्या देखा जाएगा?
किसी संभावित निवेशक या संचालन एजेंसी को निम्न प्रमुख पहलुओं का अध्ययन करना होगा:
- मिल से जुड़े क्षेत्र में संभावित गन्ना उत्पादन
- किसानों की नई फसल लगाने की तैयारी
- सिंचाई और बाढ़ की स्थिति
- जमीन और पुराने परिसरों की कानूनी स्थिति
- सड़क, रेलवे और बिजली कनेक्टिविटी
- पानी की औद्योगिक आवश्यकता
- एथेनॉल तथा बिजली उत्पादन की व्यवहार्यता
- मिल तक गन्ने की औसत ढुलाई दूरी
- परियोजना की लागत और लाभ की संभावना
इन अध्ययनों के बाद ही किसी निजी, सार्वजनिक या सहकारी संस्था की भागीदारी का निर्णय लिया जा सकता है।
📣 किसानों को समय पर स्पष्ट जानकारी देना जरूरी
किसानों को गन्ने की खेती बढ़ाने के लिए प्रेरित करने से पहले सरकार को मिल निर्माण की विश्वसनीय समयसीमा जारी करनी चाहिए।
गन्ना लंबी अवधि की फसल है। यदि किसान उत्पादन बढ़ा दें और मिल समय पर शुरू न हो, तो उन्हें फसल बेचने में कठिनाई हो सकती है।
इसलिए क्षेत्र विस्तार, बीज वितरण और मिल निर्माण के बीच समन्वित योजना आवश्यक होगी।
🔮 आगे क्या होगा?
IPL की टीम अपने क्षेत्रीय निरीक्षण और अधिकारियों के साथ हुई चर्चा के आधार पर प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर सकती है। हालांकि ऐसी रिपोर्ट जमा करने की औपचारिक समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है।
दूसरी ओर, सहकारिता विभाग रैयाम की डीपीआर के आधार पर धन आवंटन और किसान सहकारी समिति के पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।
आने वाले समय में यह स्पष्ट हो सकता है कि IPL परियोजना में तकनीकी सलाहकार, निवेशक, संचालक या किसी दूसरे रूप में शामिल होगी या नहीं।
📊 जरूरी जानकारी एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| 🏢 कंपनी | इंडियन पोटाश लिमिटेड |
| 👨💼 टीम प्रमुख | सतविंदर सिंह सैनी, बिहार प्रमुख |
| 📅 बैठक | 17 जुलाई 2026 |
| 📍 बैठक स्थल | ईख पदाधिकारी कार्यालय, दरभंगा |
| 🏭 चर्चा | नई चीनी मिल स्थापित करने की संभावनाएं |
| 🌱 प्रमुख विषय | भौगोलिक स्थिति, पारंपरिक और वैज्ञानिक खेती |
| 🚗 स्थल निरीक्षण | रैयाम और सकरी चीनी मिल क्षेत्र |
| 🏛️ रैयाम | दरभंगा जिला |
| 🏛️ सकरी | मधुबनी जिला |
| 📄 रैयाम डीपीआर | तैयार होकर विभाग को सौंपे जाने की जानकारी |
| 🤝 सरकारी नोडल एजेंसी | NFCSF |
| 👨🌾 योजना | किसानों की सहकारी समितियों का गठन |
| 🏘️ कुल चिह्नित गांव | 2,401 |
| ⚡ प्रस्तावित सहायक इकाइयां | बिजली, एथेनॉल और CBG |
| ✅ IPL निवेश स्वीकृति | अभी घोषित नहीं |
| 💰 परियोजना लागत | अभी सार्वजनिक नहीं |
| 📅 निर्माण समयसीमा | अभी घोषित नहीं |
🔍 DarbhangaNews.in Analysis
IPL जैसी अनुभवी कंपनी की टीम का रैयाम और सकरी क्षेत्र का निरीक्षण सकारात्मक संकेत है, लेकिन इसे अंतिम निवेश निर्णय नहीं माना जाना चाहिए।
अब सबसे जरूरी है कि सरकार IPL की संभावित भूमिका, परियोजना की लागत और निर्माण की समयसीमा स्पष्ट करे। किसानों को गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित करने से पहले मिल शुरू होने का व्यावहारिक कार्यक्रम सार्वजनिक किया जाना चाहिए।








