हनुमाननगर में 385.48 एकड़ भूमि अधिग्रहण का विरोध, किसानों ने कहा—औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन नहीं देंगे

हनुमाननगर में 385.48 एकड़ भूमि अधिग्रहण का विरोध, किसानों ने कहा—औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन नहीं देंगे
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📍 हनुमाननगर, दरभंगा | DarbhangaNews.in

दरभंगा जिले के हनुमाननगर में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन अधिग्रहण के खिलाफ किसानों का विरोध तेज हो गया है। शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को जमीन बचाओ किसान संघर्ष मोर्चा, दरभंगा के बैनर तले हनुमाननगर प्रखंड मुख्यालय पर सैकड़ों किसानों ने धरना-प्रदर्शन किया। किसानों ने करीब 385.48 एकड़ भूमि के कथित तौर पर बिना उनकी सहमति अधिग्रहण का विरोध करते हुए साफ कहा कि वे औद्योगिक क्षेत्र के लिए अपनी जमीन नहीं देना चाहते।

धरने में आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों के किसान शामिल हुए। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि प्रस्तावित भू-अर्जन की जद में आने वाले कई परिवार खेती की जमीन खो देंगे और उनके सामने आजीविका का संकट पैदा हो सकता है। मोर्चा के संयोजक डॉ. लक्ष्मेश्वर प्रसाद सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने दावा किया कि प्रभावित किसानों में आधे से अधिक भूमिहीन हो सकते हैं और उनके पास रोजगार का दूसरा साधन नहीं बचेगा।

📌 मुख्य बातें

✅ हनुमाननगर प्रखंड मुख्यालय पर किसानों का धरना-प्रदर्शन
✅ जमीन बचाओ किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आंदोलन
✅ करीब 385.48 एकड़ भूमि अधिग्रहण का विरोध
✅ एक दर्जन से अधिक गांवों के किसानों की भागीदारी
✅ किसानों ने कहा—औद्योगिक क्षेत्र के लिए नहीं देंगे जमीन
✅ किसानों की सहमति के बिना भू-अर्जन किए जाने का आरोप
✅ जमीन जाने से भूमिहीन होने और आजीविका खत्म होने की आशंका
✅ 11 अगस्त को जिला मुख्यालय पर भी धरने की तैयारी
✅ पूर्व केंद्रीय मंत्री अली अशरफ फातमी ने किसानों की मांग का समर्थन किया

🌾 385.48 एकड़ जमीन को लेकर किसानों में नाराजगी

हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार विवाद औद्योगिक क्षेत्र के विकास के नाम पर करीब 385.48 एकड़ भूमि के भू-अर्जन को लेकर है। प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि यह प्रक्रिया उनकी सहमति के बिना आगे बढ़ाई गई है।

किसानों ने धरना स्थल से एक स्वर में कहा कि वे अपनी जमीन इस योजना के लिए नहीं देना चाहते। आंदोलन में दर्जनभर से अधिक गांवों के सैकड़ों किसानों की मौजूदगी से यह संकेत मिला कि विरोध किसी एक परिवार या गांव तक सीमित नहीं है।

हालांकि उपलब्ध मूल रिपोर्ट में अधिग्रहण की सरकारी अधिसूचना, प्रभावित गांवों की पूरी सूची, प्रति एकड़ मुआवजे की प्रस्तावित दर या परियोजना की कुल लागत का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इन बिंदुओं को अनुमान के आधार पर शामिल नहीं किया जा रहा है।

🚜 किसानों ने कहा—खेती ही आजीविका का मुख्य सहारा

जमीन बचाओ किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ. लक्ष्मेश्वर प्रसाद सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने सभा में कहा कि भू-अर्जन से प्रभावित होने वाले आधे से अधिक किसान भूमिहीन हो सकते हैं। उनका कहना था कि जमीन जाने के बाद इन परिवारों के पास रोजगार का कोई दूसरा साधन नहीं बचेगा और परिवार का भरण-पोषण कठिन हो जाएगा।

यह दावा किसान संगठन की ओर से किया गया है। उपलब्ध रिपोर्ट में प्रशासन की ओर से इस दावे पर कोई विस्तृत जवाब प्रकाशित नहीं है। इसलिए कितने किसान वास्तव में पूरी तरह भूमिहीन होंगे, यह सरकारी भू-अर्जन अभिलेख और प्रत्येक परिवार की भूमि स्थिति सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

🧑‍🌾 दर्जनभर से अधिक गांवों के किसान धरने में पहुंचे

धरना-प्रदर्शन केवल हनुमाननगर के एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट के अनुसार आसपास के एक दर्जन से अधिक गांवों से किसान प्रखंड मुख्यालय पहुंचे और आंदोलन में शामिल हुए।

इससे यह मामला स्थानीय स्तर पर बड़े किसान आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। हालांकि मूल रिपोर्ट में सभी प्रभावित गांवों की नामवार सूची प्रकाशित नहीं है।

जमीन अधिग्रहण से सीधे प्रभावित किसानों की सही संख्या भी रिपोर्ट में नहीं दी गई है। ऐसे में “सैकड़ों किसानों की भागीदारी” और “दर्जनभर से अधिक गांव” तक ही उपलब्ध तथ्य सीमित हैं।

🗣️ देवेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में हुई सभा

धरना स्थल पर आयोजित सभा की अध्यक्षता जमीन बचाओ किसान संघर्ष मोर्चा के सचिव देवेंद्र मिश्र ने की, जबकि मोर्चा के संयोजक डॉ. लक्ष्मेश्वर प्रसाद सिंह उर्फ पप्पू सिंह ने सभा का संचालन किया।

सभा में किसानों ने जमीन बचाने, भू-अर्जन का विरोध करने और प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र को लेकर प्रशासन से अपनी आपत्तियों पर विचार करने की मांग उठाई।

प्रदर्शनकारियों का मुख्य तर्क यह रहा कि कृषि भूमि जाने से उनकी वर्तमान आजीविका प्रभावित होगी और केवल संभावित औद्योगिक विकास के आधार पर खेती छोड़ना उनके लिए स्वीकार्य नहीं है।

🏛️ अली अशरफ फातमी ने किसानों की मांग का किया समर्थन

धरने में पूर्व केंद्रीय मंत्री मो. अली अशरफ फातमी भी पहुंचे। उन्होंने किसानों की मांगों को जायज बताते हुए आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि 11 अगस्त को जिला मुख्यालय पर किसानों के प्रस्तावित धरने के बाद प्रभावित किसानों को लेकर मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के सामने भी विरोध दर्ज कराया जाएगा।

यह बयान बताता है कि आंदोलनकारी अब प्रखंड स्तर से आगे जिला और राज्य स्तर पर अपनी मांग उठाने की तैयारी में हैं।

हालांकि मुख्यमंत्री या राज्य सरकार के किसी संबंधित विभाग की ओर से इस धरने पर प्रतिक्रिया मूल रिपोर्ट में प्रकाशित नहीं है।

📅 11 अगस्त को जिला मुख्यालय पर अगला प्रदर्शन

किसान आंदोलन का अगला महत्वपूर्ण चरण 11 अगस्त 2026 को प्रस्तावित है। रिपोर्ट के अनुसार उस दिन जिला मुख्यालय पर किसानों का धरना होगा। इसके बाद मांगों को राज्य सरकार तक पहुंचाने की बात कही गई है।

इस प्रदर्शन में कितने गांव और किसान शामिल होंगे तथा प्रशासन को कौन-सा लिखित मांगपत्र दिया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

यदि जिला मुख्यालय पर बड़ी संख्या में किसान पहुंचते हैं तो प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच औपचारिक वार्ता की संभावना भी बन सकती है।

🏗️ औद्योगिक विकास बनाम कृषि भूमि का सवाल

हनुमाननगर का विवाद अब एक बड़े सवाल को सामने ला रहा है—औद्योगिक विकास के लिए जमीन उपलब्ध कराने और स्थानीय किसानों की आजीविका की सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

किसानों का कहना है कि उनके लिए जमीन केवल संपत्ति नहीं बल्कि रोजगार और परिवार के भरण-पोषण का मुख्य साधन है। दूसरी ओर प्रस्तावित योजना को औद्योगिक क्षेत्र के विकास से जोड़कर देखा जा रहा है।

मूल रिपोर्ट में प्रशासन या उद्योग विभाग की ओर से परियोजना से संभावित निवेश, रोजगार, उद्योगों की प्रकृति या प्रभावित परिवारों के पुनर्वास संबंधी कोई विस्तृत योजना नहीं दी गई है। इसलिए इन संभावित लाभों का दावा फिलहाल नहीं किया जा सकता।

👥 कई स्थानीय प्रतिनिधि भी आंदोलन में शामिल

सभा को गोढ़ियारी के पैक्स अध्यक्ष रामनरेश यादव, रामपुरडीह के पूर्व पैक्स अध्यक्ष अमर सिंह, पंचोभ के मुखिया राजीव चौधरी, नैयाम के पूर्व पंचायत समिति सदस्य रामदयाल यादव और मोर्चा के अध्यक्ष एवं थलवारा के पूर्व मुखिया अभिषेक मिश्र उर्फ मुन्नू समेत कई स्थानीय लोगों ने संबोधित किया।

राजद के पूर्व जिलाध्यक्ष उमेश राय भी प्रदर्शन में मौजूद रहे और किसानों की मांगों का समर्थन किया। सभा में उन्होंने एम्स से जुड़ा मुद्दा भी उठाया।

🤝 प्रशासन और किसानों के बीच संवाद जरूरी

विरोध को देखते हुए अगला महत्वपूर्ण कदम किसानों और प्रशासन के बीच स्पष्ट संवाद हो सकता है। किसानों की मुख्य चिंता जमीन और आजीविका को लेकर है। प्रशासन यदि अधिग्रहण का प्रस्ताव आगे बढ़ा रहा है तो उसे प्रभावित गांवों, जमीन की आवश्यकता, मुआवजा और पुनर्वास से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

साथ ही किसान संगठन को भी प्रभावित भू-धारकों की संख्या और उनकी आपत्तियों को लिखित रूप में प्रशासन के सामने रखना होगा। इससे आंदोलन और सरकारी पक्ष के बीच तथ्यों के आधार पर बातचीत हो सकेगी।

फिलहाल मूल रिपोर्ट में जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

📊 जरूरी जानकारी एक नजर में

विवरणजानकारी
मामलाऔद्योगिक क्षेत्र के लिए भूमि अधिग्रहण का विरोध
स्थानहनुमाननगर प्रखंड मुख्यालय
जिलादरभंगा
प्रदर्शन की तारीख7 अगस्त 2026
प्रस्तावित/विवादित भूमिकरीब 385.48 एकड़
आंदोलनजमीन बचाओ किसान संघर्ष मोर्चा
किसानों की भागीदारीसैकड़ों
गांवएक दर्जन से अधिक
मोर्चा के संयोजकडॉ. लक्ष्मेश्वर प्रसाद सिंह उर्फ पप्पू सिंह
सभा की अध्यक्षतादेवेंद्र मिश्र
किसानों की मुख्य मांगऔद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन नहीं देना
मुख्य आशंकाभूमिहीन होने और आजीविका खत्म होने का खतरा
अगला आंदोलन11 अगस्त को जिला मुख्यालय पर धरना
प्रशासन का विस्तृत पक्षमूल रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं

🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण

हनुमाननगर में सामने आया विरोध केवल मुआवजे का मामला नहीं दिखाई देता। किसानों की सबसे बड़ी चिंता खेती की जमीन और उससे जुड़ी स्थायी आजीविका है। यदि किसी परिवार की अधिकांश कृषि भूमि परियोजना में चली जाती है तो एकमुश्त मुआवजा उसके दीर्घकालीन रोजगार का विकल्प बनेगा या नहीं, यह महत्वपूर्ण प्रश्न है।

दूसरी ओर दरभंगा को बड़े उद्योग और स्थानीय रोजगार की भी आवश्यकता है। इसलिए इस विवाद को “उद्योग बनाम किसान” तक सीमित करने के बजाय ऐसी व्यवस्था जरूरी है जिसमें परियोजना की वास्तविक आवश्यकता, जमीन का चयन और किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव को पारदर्शी तरीके से सामने रखा जाए।

विशेष रूप से प्रशासन को 385.48 एकड़ जमीन की पंचायत और गांववार सूची, प्रभावित भू-धारकों की संख्या, परियोजना का प्रस्तावित स्वरूप और पुनर्वास/मुआवजा व्यवस्था सार्वजनिक करनी चाहिए। मूल रिपोर्ट में ये जानकारियां नहीं हैं।

11 अगस्त का जिला मुख्यालय धरना इस आंदोलन की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगा। उस दिन यदि किसान अपना लिखित मांगपत्र देते हैं और प्रशासन औपचारिक जवाब देता है तो विवाद के कई तथ्य अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।

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