📍 दरभंगा | DarbhangaNews.in
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के व्याकरण विभाग में आयोजित पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन के दौरान 13 विद्यार्थियों को सुलभ छात्रवृत्ति प्रदान की गई। अलग-अलग सत्र और सेमेस्टर के विद्यार्थियों को ₹3,750 से ₹7,500 तक के चेक दिए गए।
उपलब्ध लाभार्थी सूची के अनुसार, पांच विद्यार्थियों को ₹7,500, चार को ₹6,750 और चार विद्यार्थियों को ₹3,750 की छात्रवृत्ति मिली। इस हिसाब से कुल ₹79,500 की राशि वितरित की गई। कार्यक्रम में पूर्ववर्ती विद्यार्थियों ने वर्तमान छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं, शोध और रोजगार से संबंधित मार्गदर्शन भी दिया।
📌 मुख्य बातें
✅ व्याकरण विभाग में पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन आयोजित
✅ कुल 13 विद्यार्थियों को सुलभ छात्रवृत्ति
✅ सबसे अधिक ₹7,500 की सहायता राशि
✅ सूची के अनुसार कुल ₹79,500 का वितरण
✅ विद्यार्थियों को चेक के माध्यम से भुगतान
✅ प्रतियोगी परीक्षा, शोध और रोजगार पर मार्गदर्शन
✅ प्रत्येक दो महीने पर पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय
✅ पूर्व छात्रों से विश्वविद्यालय के विकास में सहयोग की अपील
व्याकरण विभाग में जुटे पूर्ववर्ती विद्यार्थी
कार्यक्रम का आयोजन व्याकरण विभागाध्यक्ष डॉ. सीताचरण झा की अध्यक्षता में किया गया। इसमें विभाग के पूर्ववर्ती छात्र-छात्राओं का स्वागत करते हुए उन्हें विश्वविद्यालय परिवार का अभिन्न हिस्सा बताया गया।
शिक्षकों ने पूर्व विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा और विकास में सहयोग करने की अपील की। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पुराने विद्यार्थियों को एक मंच पर लाना नहीं, बल्कि उनके अनुभव का लाभ वर्तमान विद्यार्थियों तक पहुंचाना भी था।
13 विद्यार्थियों को मिली सुलभ छात्रवृत्ति
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. निशिकांत सिंह के अनुसार, सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक स्वर्गीय डॉ. बिन्देश्वर पाठक द्वारा दान के रूप में दी गई राशि के ब्याज से यह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।
बताया गया कि योजना के तहत प्रत्येक कक्षा के श्रेष्ठ विद्यार्थियों को पढ़ाई में आर्थिक सहयोग देने का प्रयास किया जाता है। इस बार व्याकरण विभाग के 13 विद्यार्थियों को चेक के माध्यम से छात्रवृत्ति दी गई।
पांच विद्यार्थियों को मिले ₹7,500
आचार्य सत्र 2019-21 के तृतीय एवं चतुर्थ सेमेस्टर के पांच विद्यार्थियों को ₹7,500-₹7,500 की छात्रवृत्ति दी गई।
| विद्यार्थी | सत्र एवं सेमेस्टर | राशि |
|---|---|---|
| दिवेश कुमार झा | आचार्य 2019-21, तृतीय एवं चतुर्थ | ₹7,500 |
| गजेन्द्र कुमार झा | आचार्य 2019-21, तृतीय एवं चतुर्थ | ₹7,500 |
| दीपक कुमार | आचार्य 2019-21, तृतीय एवं चतुर्थ | ₹7,500 |
| शालिनी | आचार्य 2019-21, तृतीय एवं चतुर्थ | ₹7,500 |
| जवाहर पंडित | आचार्य 2019-21, तृतीय एवं चतुर्थ | ₹7,500 |
इन पांच विद्यार्थियों को कुल ₹37,500 दिए गए।
चार विद्यार्थियों को ₹3,750 की सहायता
आचार्य सत्र 2020-22 के द्वितीय सेमेस्टर के चार विद्यार्थियों को ₹3,750-₹3,750 की छात्रवृत्ति प्रदान की गई।
| विद्यार्थी | सत्र एवं सेमेस्टर | राशि |
| शुभम कुमार झा | आचार्य 2020-22, द्वितीय | ₹3,750 |
| हिमांशु मिश्र | आचार्य 2020-22, द्वितीय | ₹3,750 |
| गजेन्द्रनाथ झा | आचार्य 2020-22, द्वितीय | ₹3,750 |
| श्रवण कुमार यादव | आचार्य 2020-22, द्वितीय | ₹3,750 |
इस वर्ग के चार विद्यार्थियों को कुल ₹15,000 की सहायता मिली।
चार विद्यार्थियों को मिले ₹6,750
आचार्य सत्र 2021-23 के प्रथम सेमेस्टर के चार विद्यार्थियों को ₹6,750-₹6,750 की छात्रवृत्ति दी गई।
| विद्यार्थी | सत्र एवं सेमेस्टर | राशि |
| विश्वम्भर झा | आचार्य 2021-23, प्रथम | ₹6,750 |
| अपर्णा प्रियम्वदा | आचार्य 2021-23, प्रथम | ₹6,750 |
| मिथुन कुमार झा | आचार्य 2021-23, प्रथम | ₹6,750 |
| गुलशन कुमार शुक्ल | आचार्य 2021-23, प्रथम | ₹6,750 |
इन चार विद्यार्थियों को कुल ₹27,000 दिए गए। प्रकाशित सूची में दर्ज सभी राशियों को जोड़ने पर कुल वितरण ₹79,500 होता है।
पढ़ाई के साथ भविष्य की तैयारी पर संवाद
पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन में वर्तमान विद्यार्थियों के लिए परामर्श और संवाद सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें शिक्षा पूरी करने के बाद उपलब्ध अवसरों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, उच्च शिक्षा, शोध और रोजगार के विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा हुई।
पूर्व विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए छात्रों को लक्ष्य तय करने, नियमित अध्ययन करने और संस्कृत विषय के साथ आधुनिक रोजगार अवसरों की जानकारी जुटाने की सलाह दी।
संस्कृत विद्यार्थियों के लिए किन क्षेत्रों में अवसर?
व्याकरण और संस्कृत की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी केवल अध्यापन तक सीमित नहीं हैं। योग्यता और संबंधित प्रतियोगी परीक्षा के आधार पर वे विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ सकते हैं—
- विद्यालय और महाविद्यालय में अध्यापन
- विश्वविद्यालयों में शोध और उच्च शिक्षा
- संस्कृत अनुवाद और पांडुलिपि संपादन
- पुरातत्व, संग्रहालय और अभिलेखागार
- प्रतियोगी परीक्षाएं और प्रशासनिक सेवाएं
- धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थान
- डिजिटल संस्कृत सामग्री निर्माण
- प्रकाशन, संपादन और भाषा अनुसंधान
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को उपलब्ध अवसरों की समय पर जानकारी देने और पूर्व छात्रों के अनुभव से जोड़ने पर जोर दिया गया।
प्रत्येक दो महीने पर होगा पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन
सम्मेलन के दौरान यह निर्णय लिया गया कि व्याकरण विभाग में पूर्ववर्ती और वर्तमान विद्यार्थियों के बीच नियमित संवाद बनाए रखने के लिए अब प्रत्येक दो महीने पर पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
इस पहल से वर्तमान विद्यार्थियों को अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत पूर्व छात्रों से मार्गदर्शन मिल सकेगा। पूर्व विद्यार्थी रोजगार की जानकारी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, शोध विषय और व्यावसायिक संपर्क उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं।
कार्यक्रम में ये शिक्षक रहे उपस्थित
कार्यक्रम में व्याकरण-साहित्य संकायाध्यक्ष प्रो. दयानाथ झा, डॉ. साधना शर्मा, डॉ. एल. सविता आर्या और डॉ. यदुवीर स्वरूप शास्त्री सहित कई शिक्षक तथा पूर्व विद्यार्थी उपस्थित रहे।
उपस्थित शिक्षकों ने छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं और पूर्व छात्रों से विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की अपील की।
छात्रवृत्ति क्यों महत्वपूर्ण?
संस्कृत विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले अनेक विद्यार्थी ग्रामीण या सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं। छोटी सहायता राशि भी उन्हें पुस्तकें खरीदने, परीक्षा शुल्क देने, यात्रा और अन्य शैक्षणिक जरूरतें पूरी करने में मदद कर सकती है।
₹3,750 से ₹7,500 तक की राशि बहुत बड़ी न दिखाई दे, लेकिन मेधा के आधार पर मिलने वाली सहायता विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाती है। इससे अच्छे प्रदर्शन करने वाले दूसरे छात्रों को भी पढ़ाई में बेहतर परिणाम प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है।
पहले लंबित भुगतान का भी उठ चुका है मामला
दिसंबर 2025 की एक रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के छह स्नातकोत्तर विभागों के अलग-अलग सत्रों के करीब 250 पात्र विद्यार्थियों की सुलभ छात्रवृत्ति लंबित होने का दावा किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. बिन्देश्वर पाठक ने आर्थिक रूप से कमजोर और मेधावी विद्यार्थियों की सहायता के लिए विश्वविद्यालय को ₹25 लाख दिए थे।
व्याकरण विभाग में 13 विद्यार्थियों को किया गया ताजा वितरण सकारात्मक कदम है। हालांकि सार्वजनिक रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि दूसरे विभागों या शेष पात्र विद्यार्थियों की लंबित राशि की वर्तमान स्थिति क्या है।
विश्वविद्यालय को छात्रवृत्ति की पूरी जानकारी—पात्रता, चयन सूची, देय राशि और भुगतान की स्थिति—सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों के बीच भ्रम न रहे।
📋 जरूरी जानकारी एक नजर में
| विषय | जानकारी |
| संस्थान | कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय |
| विभाग | व्याकरण विभाग |
| आयोजन | पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन |
| छात्रवृत्ति | सुलभ छात्रवृत्ति |
| कुल लाभार्थी | 13 विद्यार्थी |
| न्यूनतम राशि | ₹3,750 |
| अधिकतम राशि | ₹7,500 |
| सूची के अनुसार कुल राशि | ₹79,500 |
| भुगतान का माध्यम | चेक |
| अध्यक्षता | विभागाध्यक्ष डॉ. सीताचरण झा |
| विशेष निर्णय | प्रत्येक दो महीने पर पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन |
| उद्देश्य | आर्थिक सहायता और भविष्य संबंधी मार्गदर्शन |
📊 DarbhangaNews.in Analysis
व्याकरण विभाग में 13 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देना सराहनीय पहल है। छात्रवृत्ति के साथ पूर्व छात्रों का मार्गदर्शन जोड़ना इस कार्यक्रम को अधिक उपयोगी बनाता है। केवल आर्थिक सहायता पर्याप्त नहीं होती; विद्यार्थियों को यह जानकारी भी चाहिए कि पढ़ाई के बाद उनके लिए रोजगार, शोध और प्रतियोगी परीक्षाओं के कौन-कौन से रास्ते खुले हैं।
प्रत्येक दो महीने पर पूर्ववर्ती छात्र सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय सही तरीके से लागू हुआ तो विभाग के विद्यार्थियों को लगातार मार्गदर्शन मिल सकता है। इसके लिए केवल औपचारिक बैठक के बजाय पूर्व छात्रों का रोजगार विवरण, मार्गदर्शक समूह, प्रशिक्षण सत्र और अवसरों की नियमित सूचना प्रणाली बनाई जानी चाहिए।
साथ ही, विश्वविद्यालय को सुलभ छात्रवृत्ति की विभागवार और सत्रवार स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। इससे समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा और प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को योजना का लाभ मिल सकेगा।








