📍 दरभंगा, बिहार | DarbhangaNews.in विशेष रिपोर्ट
दरभंगा में बिजली उपभोक्ताओं की परेशानी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। कभी बिजली आधे घंटे के लिए आती है, फिर चली जाती है; कभी बार-बार फीडर बंद होता है तो कहीं कम वोल्टेज की शिकायत है। 12 अगस्त को प्रकाशित दैनिक जागरण की रिपोर्ट में भी शहर में अनियंत्रित और बार-बार हो रही बिजली कटौती से लोगों की बढ़ती बेचैनी को प्रमुखता से उठाया गया।
हालात को लेकर सबसे बड़ा सवाल अब केवल यह नहीं है कि “बिजली क्यों जा रही है?” बल्कि यह भी है कि उपभोक्ता हर महीने अपना बिल समय पर जमा करता है तो उसे उसके बदले भरोसेमंद बिजली आपूर्ति कब मिलेगी?
दरभंगा के उपभोक्ताओं की नाराजगी को एक वाक्य में समझें तो सवाल कुछ ऐसा है—
“बिजली विभाग बिल वसूलने में जितना नियमित है, क्या बिजली देने में भी उतना ही नियमित होगा?”
इस सवाल को केवल नाराजगी समझकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जुलाई में लहेरियासराय के वार्ड 31 स्थित भीगो मंदिर चौक पर बिजली संकट से परेशान लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया था। स्थानीय निवासियों का आरोप था कि करीब चार महीने से कम वोल्टेज और बार-बार बिजली कटौती की समस्या बनी हुई थी और अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने का आश्वासन मिलने के बावजूद उस समय तक काम नहीं हुआ था।
📌 मुख्य बातें
✅ दरभंगा में बार-बार बिजली कटने की समस्या फिर चर्चा में
✅ 12 अगस्त की रिपोर्ट में अनियंत्रित कटौती से लोगों की परेशानी सामने आई
✅ जुलाई में लहेरियासराय के लोग बिजली संकट के खिलाफ सड़क पर उतर चुके हैं
✅ भीगो क्षेत्र में चार महीने तक कम वोल्टेज और बार-बार कटौती की शिकायत सामने आई थी
✅ बढ़े भार के मुकाबले ट्रांसफार्मर क्षमता को लेकर सवाल
✅ NBPDCL की वेबसाइट पर वर्तमान निर्धारित बिजली कटौती सूची में “No Records Found” दिखाई दे रहा है
✅ कंपनी 1912 सहित कई शिकायत माध्यम उपलब्ध कराती है
✅ राज्यभर में जुलाई में प्रतिदिन 30 से 40 हजार बिजली संबंधी कॉल आने की रिपोर्ट
✅ इनमें करीब 9 हजार शिकायतें बिजली कटौती, फ्यूज और ट्रांसफार्मर से जुड़ी बताई गई थीं
✅ NBPDCL ने दरभंगा समेत पांच विद्युत आपूर्ति क्षेत्रों में अतिरिक्त बिजली ट्रांसफार्मर लगाने के लिए निविदा भी निकाली है
⚡ “बिजली आई… फिर गई”—यही कब तक चलेगा?
दरभंगा में लोगों की सबसे बड़ी परेशानी केवल कई घंटे की एक लंबी कटौती नहीं है।
उससे भी ज्यादा परेशानी बार-बार बिजली आने और जाने से होती है।
बिजली आई।
पंखा शुरू हुआ।
पानी की मोटर चालू की।
कुछ देर बाद फिर बिजली चली गई।
फिर आई।
फिर चली गई।
ऐसी स्थिति न केवल गर्मी में लोगों को परेशान करती है बल्कि घर में लगे पंखे, फ्रिज, मोटर, कंप्यूटर, इन्वर्टर और दूसरे विद्युत उपकरणों पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
लहेरियासराय के भीगो इलाके के निवासियों ने जुलाई के प्रदर्शन के दौरान भी यही शिकायत की थी कि बिजली बार-बार आती-जाती है और कम वोल्टेज के कारण उपकरणों को नुकसान का डर बना रहता है।
💸 जनता समय पर बिल दे तो विभाग की जवाबदेही क्या?
यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल उपभोक्ता और बिजली वितरण कंपनी के रिश्ते का है।
उपभोक्ता से अपेक्षा की जाती है कि वह बिजली का बिल समय पर जमा करे।
बकाया होने पर उसे संदेश आता है।
बिल भुगतान के लिए डिजिटल व्यवस्था है।
ऑनलाइन भुगतान की सुविधा है।
उपभोक्ता से उपयोग की गई बिजली की प्रत्येक इकाई का हिसाब लिया जाता है। NBPDCL की आधिकारिक वेबसाइट पर बिल देखने और भुगतान करने की ऑनलाइन व्यवस्था उपलब्ध है।
तो फिर उपभोक्ता भी पूछ सकता है—
हमें मिली बिजली का हिसाब कौन देगा?
एक महीने में कितनी बार बिजली गई?
कुल कितने घंटे आपूर्ति बंद रही?
किस फीडर पर समस्या थी?
किस ट्रांसफार्मर में अधिक भार था?
कितनी बार फॉल्ट हुआ?
मरम्मत में कितना समय लगा?
ये आंकड़े भी उपभोक्ता के सामने आसानी से उपलब्ध क्यों नहीं होने चाहिए?
😓 “कोई सुनने वाला नहीं”—लोगों की नाराजगी की सबसे बड़ी वजह
सबसे ज्यादा हताशा तब होती है जब बिजली चली जाए और नागरिक को यह भी पता न हो कि आखिर हुआ क्या है।
पांच मिनट में आएगी?
एक घंटे में?
चार घंटे बाद?
ट्रांसफार्मर जला है?
फीडर बंद है?
लाइन में खराबी है?
मरम्मत हो रही है?
या विभाग ने खुद आपूर्ति बंद की है?
उपभोक्ता अंधेरे में रहता है—शाब्दिक अर्थ में भी और सूचना के मामले में भी।
NBPDCL स्वयं 1912, फ्यूज कॉल केंद्र, सुविधा ऐप, ऑनलाइन शिकायत और शिकायत स्थिति देखने जैसी कई व्यवस्थाएं बताता है।
लेकिन लोगों के लिए सिर्फ शिकायत दर्ज करना ही पर्याप्त समाधान नहीं है।
शिकायत करने के बाद समस्या कब दूर होगी, यह जानकारी भी मिलनी चाहिए।
🌐 वेबसाइट खोलो तो “No Records Found”
DarbhangaNews.in ने 13 अगस्त 2026 को NBPDCL की आधिकारिक Scheduled Power Outage सेवा की जांच की।
पेज पर उस समय साफ लिखा था—
“No Records Found!”
यहां एक जरूरी तथ्य स्पष्ट करना होगा।
यह पृष्ठ मुख्य रूप से पहले से निर्धारित बिजली कटौती दिखाने के लिए है। अचानक होने वाले फॉल्ट या ट्रांसफार्मर खराब होने की प्रत्येक घटना का इस पृष्ठ पर होना आवश्यक रूप से अपेक्षित नहीं है।
लेकिन समस्या यहीं है।
यदि निर्धारित कटौती अलग है और अचानक खराबी अलग, तो आम उपभोक्ता के लिए एक ऐसा सार्वजनिक पटल कहां है जहां वह अपने इलाके की वर्तमान स्थिति तुरंत देख सके?
NBPDCL की वेबसाइट “Power Outage” और “Power Outages (URJAMITRA)” के विकल्प भी दिखाती है।
फिर क्यों न प्रत्येक फीडर की वास्तविक समय स्थिति जनता के लिए सरल तरीके से उपलब्ध हो?
📱 मोबाइल पर दिखना चाहिए—आपके इलाके में बिजली क्यों बंद है
आज जब बिल, भुगतान, शिकायत और स्मार्ट मीटर डिजिटल हैं, तो बिजली कटौती की जानकारी भी डिजिटल क्यों नहीं?
उपभोक्ता अपना उपभोक्ता क्रमांक डाले और तुरंत देख सके:
आपका फीडर: XYZ
बिजली बंद: 12:42 बजे
कारण: ट्रांसफार्मर अधिक भार / लाइन खराबी / रखरखाव
मरम्मत दल: मौके पर
अनुमानित बहाली: 2:00 बजे
वास्तविक बहाली: 1:48 बजे
इतनी जानकारी मिलने से उपभोक्ता को बार-बार 1912 पर फोन करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
🔥 समस्या सिर्फ दरभंगा की नहीं, राज्यभर में शिकायतों का दबाव
14 जुलाई की हिन्दुस्तान की विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया था कि बिहार में बिजली उपलब्ध होने के बावजूद स्थानीय फॉल्ट, तार टूटने, ट्रांसफार्मर खराब होने और फीडर पर बढ़े भार के कारण कई जिलों में आपूर्ति बाधित हो रही थी। रिपोर्ट के अनुसार राज्यभर से बिजली विभाग के कॉल सेंटर में प्रतिदिन औसतन 30 से 40 हजार कॉल आ रही थीं, जिनमें करीब 9 हजार शिकायतें बिजली कटने, फ्यूज कॉल और ट्रांसफार्मर जलने से संबंधित बताई गई थीं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि फीडर पर अधिक भार के कारण फ्यूज संबंधी शिकायतें बढ़ रही थीं और छोटी तकनीकी खराबियों को दूर करने में भी कई बार घंटों लग रहे थे।
यानी शिकायतों का स्तर खुद यह बताता है कि समस्या केवल कुछ नाराज उपभोक्ताओं की धारणा भर नहीं है।
🏘️ लहेरियासराय में लोग सड़क पर क्यों उतरे थे?
28 जुलाई को भीगो मंदिर चौक पर स्थानीय लोगों का धैर्य टूट गया।
लोगों ने सड़क जाम कर बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी की।
उनका आरोप था कि चार महीने से कम वोल्टेज और बार-बार बिजली कटौती की शिकायत की जा रही थी, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
स्थानीय लोगों ने बताया था कि क्षेत्र में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ गई है और मौजूदा ट्रांसफार्मर पर्याप्त क्षमता से काम नहीं कर पा रहा है।
उन्होंने अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने की मांग की।
रिपोर्ट के अनुसार बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाकर सड़क जाम समाप्त कराया।
लेकिन सवाल यह है—
हर समस्या के समाधान के लिए क्या नागरिक को सड़क जाम करना पड़ेगा?
शिकायत पहले क्यों नहीं सुनी जाए?
🔌 NBPDCL खुद अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने की तैयारी में
एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि NBPDCL ने हाल में 14 अतिरिक्त 5 एमवीए बिजली ट्रांसफार्मर लगाने के लिए निविदा निकाली है। यह काम बेगूसराय, दरभंगा, सहरसा, किशनगंज और पूर्णिया विद्युत आपूर्ति क्षेत्रों के विभिन्न बिजली उपकेंद्रों में प्रस्तावित है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि दरभंगा की आज की हर बिजली कटौती सिर्फ ट्रांसफार्मर क्षमता के कारण हो रही है।
लेकिन यह जरूर दिखाता है कि वितरण क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता विभाग की योजनाओं में भी मौजूद है।
अब दरभंगा के लिए यह सार्वजनिक होना चाहिए कि:
- जिले के किन उपकेंद्रों में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगेगा?
- किस क्षेत्र को फायदा मिलेगा?
- कब तक काम पूरा होगा?
- कौन-कौन से फीडर अभी अधिक भार पर हैं?
🚰 बिजली जाती है तो केवल पंखा नहीं रुकता
शहर में बिजली जाने का असर सिर्फ रोशनी और पंखे तक सीमित नहीं है।
बहुत से घरों में पानी के लिए बिजली की मोटर चलती है।
बिजली नहीं तो पानी नहीं।
इन्वर्टर बार-बार चार्ज और डिस्चार्ज होता है।
दुकानदारों का काम प्रभावित होता है।
ऑनलाइन पढ़ाई और काम करने वाले परेशान होते हैं।
छोटे व्यवसायों की लागत बढ़ती है।
फ्रिज और दूसरे उपकरणों पर दबाव बढ़ता है।
भीगो क्षेत्र के लोगों ने भी जुलाई में मोबाइल चार्ज करने और पानी की मोटर चलाने तक में परेशानी होने की शिकायत की थी।
यानी बिजली अब कोई विलासिता नहीं है।
यह शहर की बुनियादी सेवा है।
😡 लोगों को क्यों लगने लगा है कि “नर्क जैसी जिंदगी” जी रहे हैं?
बार-बार बिजली कटे।
गर्मी में पंखा बंद हो।
पानी की मोटर न चले।
शिकायत करो।
फिर इंतजार करो।
बिजली आए।
थोड़ी देर में फिर चली जाए।
और यह रोज का सिलसिला बन जाए तो नागरिक की नाराजगी स्वाभाविक है।
इसी हताशा को लोग बोलचाल में “नर्क जैसी स्थिति” कह रहे हैं।
इसे शाब्दिक तथ्य के बजाय नागरिक असंतोष की अभिव्यक्ति के रूप में समझना चाहिए।
एक शहर के नागरिक को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसे नियमित बिजली पाने के लिए रोज विभाग से लड़ना पड़ेगा।
🧾 बिल की तरह ‘बिजली आपूर्ति रिपोर्ट’ भी भेजिए
NBPDCL यदि वास्तव में पारदर्शिता बढ़ाना चाहता है तो हर महीने उपभोक्ता को बिजली बिल के साथ आपूर्ति रिपोर्ट भी दे सकता है।
उदाहरण:
| विवरण | मासिक आंकड़ा |
|---|---|
| कुल घंटे | 744 |
| बिजली उपलब्ध | 714 घंटे |
| बिजली बाधित | 30 घंटे |
| निर्धारित कटौती | 5 घंटे |
| अचानक खराबी | 25 घंटे |
| सबसे लंबी कटौती | 3 घंटे |
| फीडर ट्रिप | 12 बार |
| ट्रांसफार्मर खराबी | 2 बार |
तब उपभोक्ता खुद जान सकेगा कि सेवा कैसी रही।
🚨 शिकायत का नंबर देने से जिम्मेदारी खत्म नहीं होती
NBPDCL आधिकारिक रूप से उपभोक्ताओं को 1912, फ्यूज कॉल केंद्र, सुविधा ऐप, वेबसाइट और शिकायत पोर्टल से शिकायत करने का विकल्प देता है।
यह अच्छी व्यवस्था है।
लेकिन एक जिम्मेदार बिजली वितरण कंपनी को शिकायत का इंतजार ही क्यों करना चाहिए?
यदि पूरा फीडर बंद है तो विभाग को खुद पता होना चाहिए।
यदि ट्रांसफार्मर अधिक भार से बार-बार ट्रिप कर रहा है तो उसकी निगरानी खुद होनी चाहिए।
यदि एक इलाके से एक सप्ताह में सैकड़ों शिकायतें आ रही हैं तो स्वतः तकनीकी जांच शुरू होनी चाहिए।
उपभोक्ता का काम बिजली विभाग को उसकी अपनी खराबी ढूंढकर बताना नहीं होना चाहिए।
📊 दरभंगा के लिए हर महीने सार्वजनिक हो ये आंकड़े
DarbhangaNews.in की मांग है कि NBPDCL दरभंगा के लिए हर महीने सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करे:
- कुल बिजली आपूर्ति कितने घंटे रही
- प्रत्येक फीडर कितनी बार बंद हुआ
- निर्धारित और अचानक कटौती अलग-अलग
- अधिक भार वाले ट्रांसफार्मरों की सूची
- कितने ट्रांसफार्मर खराब हुए
- औसत मरम्मत समय
- 1912 पर कितनी शिकायतें आईं
- कितनी शिकायतें निर्धारित समय में बंद हुईं
- किन इलाकों में नए ट्रांसफार्मर लगेंगे
- किन क्षेत्रों में लाइन और फीडर मजबूत किए जाएंगे
तभी जनता यह जांच पाएगी कि बिजली व्यवस्था वास्तव में सुधर रही है या नहीं।
📊 जरूरी जानकारी एक नजर में
| विषय | स्थिति |
| क्षेत्र | दरभंगा |
| प्रमुख शिकायत | बार-बार बिजली कटौती |
| दूसरी समस्या | कम वोल्टेज |
| ताजा समाचार | 12 अगस्त को बार-बार कटौती से परेशानी की रिपोर्ट |
| जुलाई का बड़ा विरोध | भीगो मंदिर चौक, लहेरियासराय |
| वहां शिकायत की अवधि | करीब चार महीने |
| लोगों की मांग | अतिरिक्त ट्रांसफार्मर |
| NBPDCL निर्धारित कटौती पेज | फिलहाल “No Records Found” |
| आधिकारिक शिकायत | 1912 व अन्य माध्यम |
| राज्यभर की दैनिक कॉल | 30–40 हजार, जुलाई की रिपोर्ट के अनुसार |
| कटौती/फ्यूज/ट्रांसफार्मर शिकायत | करीब 9 हजार प्रतिदिन, उसी रिपोर्ट के अनुसार |
| नई विभागीय योजना | दरभंगा समेत पांच क्षेत्रों में अतिरिक्त 5 एमवीए ट्रांसफार्मर की निविदा |
🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण: पैसे के बदले सिर्फ यूनिट नहीं, भरोसेमंद सेवा भी मिलनी चाहिए
दरभंगा की बिजली समस्या पर सबसे बड़ी बहस यही होनी चाहिए।
उपभोक्ता बिल नहीं दे तो विभाग कार्रवाई कर सकता है। लेकिन यदि विभाग नियमित बिजली नहीं दे पाए तो उसकी जवाबदेही कैसे तय होगी?
यह सवाल किसी एक अधिकारी पर व्यक्तिगत आरोप नहीं है।
यह पूरी व्यवस्था का सवाल है।
बिजली विभाग को राजस्व भी चाहिए—बिल्कुल चाहिए।
बिजली चोरी रोकनी चाहिए।
बकाया वसूलना चाहिए।
स्मार्ट मीटर लगना चाहिए।
लेकिन उसी कठोरता से यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि ट्रांसफार्मर अधिक भार में न चले, फीडर बार-बार न ट्रिप करे और खराबी होने पर उसे घंटों लटकाया न जाए।
पैसा लेना सेवा का आधा हिस्सा है। सेवा देना दूसरा आधा।
दरभंगा के नागरिकों को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि कंपनी केवल बिल भुगतान के समय सक्रिय है और बिजली जाने के बाद उपभोक्ता खुद फोन करता रहे।
और सबसे महत्वपूर्ण—
बिजली कटने का पूरा सार्वजनिक रिकॉर्ड होना चाहिए।
यदि बिजली दो घंटे गई है तो वेबसाइट पर दिखाई दे।
यदि फीडर पांच बार ट्रिप हुआ है तो दिखाई दे।
यदि ट्रांसफार्मर अधिक भार पर है तो दिखाई दे।
यदि नया ट्रांसफार्मर स्वीकृत है तो उसकी तारीख दिखाई दे।
जनता को सिर्फ “शिकायत दर्ज हो गई” नहीं, “समस्या हल हो गई” चाहिए।
दरभंगा के लोग कोई विशेष सुविधा नहीं मांग रहे।
वे वही मांग रहे हैं जिसका बिल हर महीने चुकाते हैं—
नियमित, स्थिर और भरोसेमंद बिजली।
और आखिर में बिजली विभाग से एक सीधा सवाल:








