📍 लहेरियासराय, दरभंगा | DarbhangaNews.in
दरभंगा व्यवहार न्यायालय ने मनीगाछी थाना क्षेत्र के बाजितपुर गांव में आम तोड़ने को लेकर हुए विवाद के बाद मोहम्मद सलाउद्दीन की हत्या के मामले में दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-11 रंजन कुमार मिश्रा की अदालत ने अशरफ नद्दाफ और मोहम्मद अकबर नद्दाफ को अलग-अलग धाराओं में कारावास की सजा देते हुए प्रत्येक पर कुल ₹75 हजार का अर्थदंड भी लगाया।
अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302/149 के तहत दोनों को आजीवन कारावास और ₹40 हजार अर्थदंड की सजा दी। हत्या के प्रयास से संबंधित धारा 307 में सात वर्ष की कैद और ₹30 हजार जुर्माना, जबकि धारा 324 में दो वर्ष की कैद तथा ₹5 हजार अर्थदंड लगाया गया। अन्य धाराओं में भी अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई गई है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
यह मामला 2 जून 2021 को हुई मोहम्मद सलाउद्दीन की हत्या से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार आम तोड़ने को लेकर विवाद के बाद सलाउद्दीन पर लोहे की रॉड से हमला किया गया था। मामले में मृतक के भाई फखरुद्दीन नद्दाफ के आवेदन पर मनीगाछी थाने में प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जिसमें कुल 13 लोगों को नामजद किया गया था।
📌 मुख्य बातें
✅ मनीगाछी थाना क्षेत्र के बाजितपुर गांव का मामला
✅ आम तोड़ने को लेकर शुरू हुआ था विवाद
✅ मोहम्मद सलाउद्दीन की 2 जून 2021 को हुई थी हत्या
✅ अशरफ नद्दाफ और मोहम्मद अकबर नद्दाफ दोषी करार
✅ धारा 302/149 में दोनों को आजीवन कारावास
✅ प्रत्येक दोषी पर कुल ₹75 हजार का अर्थदंड
✅ धारा 307 में सात वर्ष की अतिरिक्त सजा
✅ धारा 324 में दो वर्ष की सजा
✅ मामले की प्राथमिकी में 13 लोग नामजद थे
✅ अभियोजन ने डॉक्टर सहित छह गवाह प्रस्तुत किए
✅ अदालत ने 14 जुलाई 2026 को दोषी ठहराया था
✅ सजा का ऐलान 20 जुलाई 2026 को किया गया
✅ सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी
✅ दोनों दोषी 6 जून 2021 से न्यायिक हिरासत में हैं
🥭 आम तोड़ने को लेकर शुरू हुआ था विवाद
अभियोजन पक्ष के अनुसार बाजितपुर गांव में आम तोड़ने को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। विवाद बढ़ने के बाद मोहम्मद सलाउद्दीन पर लोहे की रॉड से हमला किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना 2 जून 2021 की बताई गई है।
अदालत में पेश साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अभियोजन ने दावा किया कि हमला एक से अधिक लोगों की साझा कार्रवाई का हिस्सा था। इसी कारण हत्या की धारा 302 के साथ गैरकानूनी समूह के समान उद्देश्य से संबंधित धारा 149 भी लगाई गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने प्रस्तुत अभिलेखों और साक्ष्यों को दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त माना।
👤 मृतक के भाई ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी
घटना के बाद मृतक मोहम्मद सलाउद्दीन के भाई फखरुद्दीन नद्दाफ ने मनीगाछी थाने में आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में कुल 13 लोगों को नामजद किया गया था।
साझा रिपोर्टों में मौजूदा निर्णय दो दोषियों—अशरफ नद्दाफ और मोहम्मद अकबर नद्दाफ—से संबंधित बताया गया है। प्राथमिकी में नामजद बाकी व्यक्तियों के मामलों की वर्तमान न्यायिक स्थिति उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं की गई है। इसलिए उन्हें दोषमुक्त, फरार या अलग मुकदमे में विचाराधीन बताना आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड के बिना उचित नहीं होगा।
⚖️ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-11 ने सुनाया फैसला
मामले की सुनवाई दरभंगा व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-11 रंजन कुमार मिश्रा की अदालत में हुई। अदालत ने 14 जुलाई 2026 को अशरफ नद्दाफ और मोहम्मद अकबर नद्दाफ को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के प्रश्न पर सुनवाई करते हुए सोमवार, 20 जुलाई को दंड की घोषणा की गई।
दोष सिद्ध करने और सजा सुनाने की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में हुई। पहले अदालत ने उपलब्ध गवाही, दस्तावेजों और प्रदर्शों के आधार पर दोनों को दोषी पाया, जिसके बाद अपराध की प्रकृति और लागू कानूनी धाराओं के अनुसार सजा निर्धारित की गई।
👨⚖️ अभियोजन की ओर से अरुण कुमार सिंह ने रखा पक्ष
मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक अरुण कुमार सिंह ने अदालत के सामने पक्ष रखा। अभियोजन ने घटना, प्राथमिकी, चिकित्सकीय प्रमाण और गवाहों के बयानों के माध्यम से आरोप साबित करने का प्रयास किया।
अभियोजन की ओर से डॉक्टर सहित कुल छह गवाहों की गवाही न्यायालय में कराई गई। चिकित्सक की गवाही सामान्यतः मृतक की चोटों, मृत्यु के कारण और पोस्टमार्टम निष्कर्षों को न्यायालय के सामने प्रमाणित करने के लिए महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में अदालत ने छह गवाहों और अभिलेख पर उपलब्ध प्रदर्शों को देखने के बाद निर्णय दिया।
📅 दिसंबर 2021 में हुआ था आरोप गठन
दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध 17 दिसंबर 2021 को आरोप गठित किए गए थे। आरोप गठन के बाद अभियोजन और बचाव पक्ष को अपने साक्ष्य तथा तर्क प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
घटना जून 2021 में हुई थी और उसी वर्ष दिसंबर में आरोप तय हुए। इसके बाद गवाहों की गवाही, चिकित्सकीय प्रमाण और दूसरे दस्तावेजों की सुनवाई पूरी होने पर जुलाई 2026 में अदालत का निर्णय आया।
🔨 धारा 302/149 में आजीवन कारावास
अदालत ने दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/149 के तहत आजीवन कारावास और प्रत्येक को ₹40 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। धारा 302 हत्या के अपराध से संबंधित थी, जबकि धारा 149 गैरकानूनी समूह के समान उद्देश्य के तहत किए गए अपराध में प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी निर्धारित करती थी।
यह मामला 2021 की घटना से संबंधित है, इसलिए मुकदमा उस समय प्रभावी भारतीय दंड संहिता की धाराओं के अंतर्गत चलाया गया। फैसला भी उन्हीं धाराओं के आधार पर दिया गया है।
🚨 धारा 307 में सात वर्ष की सजा
अदालत ने दोनों दोषियों को धारा 307 के तहत सात वर्ष कारावास और प्रत्येक पर ₹30 हजार अर्थदंड की सजा भी सुनाई। उपलब्ध रिपोर्टों में मामले में हत्या के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति पर जानलेवा हमले या घायल होने का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
अदालती निर्णय की प्रमाणित प्रति में संबंधित आरोप, पीड़ित और घटना का विस्तृत क्रम उपलब्ध होगा। समाचार रिपोर्टों के आधार पर केवल इतना प्रमाणित है कि दोनों को धारा 307 के तहत भी दोषी मानते हुए सात वर्ष की सजा दी गई।
🩸 धारा 324 में दो वर्ष का कारावास
भारतीय दंड संहिता की धारा 324 के तहत दोनों दोषियों को दो वर्ष की कैद और ₹5 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई गई। इस प्रकार धारा 302/149, 307 और 324 के तहत प्रत्येक दोषी पर लगाया गया कुल अर्थदंड ₹75 हजार होता है।
अर्थदंड जमा नहीं किए जाने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास का कोई स्पष्ट विवरण उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में नहीं दिया गया है। इसकी निश्चित जानकारी अदालत के लिखित आदेश से ही सामने आएगी।
📋 दूसरी धाराओं में भी मिली अलग-अलग सजा
अदालत ने दोनों दोषियों को अन्य धाराओं में भी कारावास की सजा सुनाई है। इनमें धारा 147 और 148 में एक-एक वर्ष, धारा 323 और 342 में छह-छह महीने तथा धारा 447 में तीन महीने की कैद शामिल है।
⚖️ धारावार सजा
| कानूनी धारा | अदालत द्वारा सुनाई गई सजा |
|---|---|
| धारा 302/149 | आजीवन कारावास और ₹40,000 अर्थदंड |
| धारा 307 | सात वर्ष कारावास और ₹30,000 अर्थदंड |
| धारा 324 | दो वर्ष कारावास और ₹5,000 अर्थदंड |
| धारा 147 | एक वर्ष कारावास |
| धारा 148 | एक वर्ष कारावास |
| धारा 323 | छह महीने कारावास |
| धारा 342 | छह महीने कारावास |
| धारा 447 | तीन महीने कारावास |
| कुल घोषित अर्थदंड | प्रत्येक दोषी पर ₹75,000 |
यह धारावार विवरण हिन्दुस्तान और टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित अदालती रिपोर्टों पर आधारित है।
⏳ सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी
अदालत ने आदेश दिया कि दोनों दोषियों की सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसका अर्थ है कि अलग-अलग धाराओं में दी गई कारावास की अवधि क्रमशः एक के बाद एक नहीं जोड़ी जाएगी। आजीवन कारावास इस मामले की मुख्य और सबसे लंबी सजा रहेगी।
हालांकि जुर्माने की अलग-अलग राशियों को जोड़कर प्रत्येक दोषी पर कुल ₹75 हजार का अर्थदंड लागू होगा। लिखित निर्णय में जुर्माने की वसूली और भुगतान नहीं करने के परिणाम से संबंधित विस्तृत निर्देश हो सकते हैं।
🔒 जून 2021 से न्यायिक हिरासत में हैं दोनों
अशरफ नद्दाफ और मोहम्मद अकबर नद्दाफ 6 जून 2021 से न्यायिक हिरासत में बताए गए हैं। अदालत ने सजा सुनाते समय उनकी हिरासत की अवधि से संबंधित तथ्य को भी रिकॉर्ड का हिस्सा माना।
दोषियों की पहले से बिताई गई हिरासत अवधि को सजा में किस प्रकार समायोजित किया जाएगा, इसका क्रियान्वयन अदालत के आदेश और जेल नियमों के अनुसार होगा।
🧾 13 नामजद लोगों में सिर्फ दो पर आया यह फैसला
प्राथमिकी में 13 लोगों को नामजद किया गया था, लेकिन मौजूदा सजा दो व्यक्तियों से संबंधित है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अन्य नामजद लोगों के विरुद्ध जांच या मुकदमे का परिणाम क्या रहा।
इस कारण बाकी नामजद लोगों की न्यायिक स्थिति को लेकर अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। आरोपपत्र और अलग-अलग सत्र वादों के रिकॉर्ड से ही यह स्पष्ट हो सकता है कि सभी आरोपियों का मुकदमा एक साथ चला था या मामले अलग किए गए थे।
📂 मनीगाछी थाना कांड संख्या 128/21
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार मामला मनीगाछी थाना कांड संख्या 128/21 और सत्र वाद संख्या 275/21 से संबंधित है। इसी मामले में अदालत ने धारा 302/149 सहित दूसरी धाराओं में दोषियों को सजा सुनाई।
कांड संख्या और सत्र वाद संख्या के माध्यम से संबंधित पक्ष अदालत से निर्णय की प्रमाणित प्रति तथा मामले के अन्य आदेश प्राप्त कर सकते हैं।
🏛️ दोषियों के पास हाईकोर्ट में अपील का विकल्प
सत्र न्यायालय से दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद दोषियों के पास पटना हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती देने का कानूनी विकल्प रहेगा।
अपील में बचाव पक्ष गवाहों की विश्वसनीयता, चिकित्सकीय प्रमाण, आरोपों की समानता और निचली अदालत द्वारा साक्ष्यों के मूल्यांकन को चुनौती दे सकता है। सत्र न्यायालय का निर्णय तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक उच्च न्यायालय उसे स्थगित, संशोधित या रद्द नहीं करता।
👨👩⚖️ फैसला पीड़ित पक्ष के लिए क्यों महत्वपूर्ण?
हत्या की घटना के करीब पांच वर्ष बाद मामले में दोषसिद्धि और सजा का निर्णय आया है। आपराधिक मामलों में गवाहों की उपलब्धता, चिकित्सकीय रिपोर्ट, आरोप गठन और न्यायालयी सुनवाई के कारण मुकदमे में लंबा समय लग सकता है। घटना 2 जून 2021 की थी और अंतिम सजा 20 जुलाई 2026 को सुनाई गई।
न्यायिक फैसला पीड़ित परिवार को कानूनी निष्कर्ष उपलब्ध कराता है, लेकिन निर्णय की प्रमाणित प्रति और संभावित अपील के बाद मुकदमे की अगली स्थिति स्पष्ट होगी।
⚠️ आम विवाद जैसी छोटी बात ने लिया हिंसक रूप
अभियोजन के अनुसार विवाद आम तोड़ने को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन बाद में हिंसक हमले और एक व्यक्ति की हत्या तक पहुंच गया। अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर दोनों दोषियों को हत्या और दूसरी धाराओं में जिम्मेदार माना।
यह घटना दिखाती है कि खेत, फल, रास्ते या संपत्ति से जुड़े स्थानीय विवाद समय रहते शांत नहीं कराए जाएं तो गंभीर हिंसा में बदल सकते हैं। ऐसे विवादों में ग्रामीण स्तर पर बातचीत, प्रशासनिक हस्तक्षेप और पुलिस को समय पर सूचना देना आवश्यक होता है।
🔮 आगे क्या होगा?
सजा के विस्तृत लिखित आदेश के बाद दोनों दोषियों को कारागार में आजीवन कारावास की सजा के अनुसार रखा जाएगा। न्यायालय अर्थदंड जमा कराने और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं से संबंधित आदेश जेल तथा संबंधित अधिकारियों को भेजेगा।
दोषी सत्र न्यायालय के फैसले के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में अपील दायर कर सकते हैं। वहीं प्राथमिकी में नामजद अन्य व्यक्तियों के मामलों की स्थिति न्यायालय और पुलिस रिकॉर्ड से अलग से स्पष्ट होगी।
📊 जरूरी जानकारी एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
| ⚖️ अदालत | अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-11, दरभंगा |
| 👨⚖️ न्यायाधीश | रंजन कुमार मिश्रा |
| 📍 घटनास्थल | बाजितपुर गांव, मनीगाछी |
| 📅 हत्या की तारीख | 2 जून 2021 |
| 👤 मृतक | मोहम्मद सलाउद्दीन |
| 🥭 विवाद | आम तोड़ने को लेकर |
| 🔨 हथियार | अभियोजन के अनुसार लोहे की रॉड |
| 👨 शिकायतकर्ता | फखरुद्दीन नद्दाफ, मृतक के भाई |
| 📄 प्राथमिकी | मनीगाछी थाना कांड संख्या 128/21 |
| 🏛️ सत्र वाद | 275/21 |
| 👥 प्राथमिकी में नामजद | 13 लोग |
| 👨⚖️ दोषी | अशरफ नद्दाफ और मोहम्मद अकबर नद्दाफ |
| 📅 आरोप गठन | 17 दिसंबर 2021 |
| 🗣️ अभियोजन के गवाह | डॉक्टर सहित छह |
| ⚖️ दोषसिद्धि की तारीख | 14 जुलाई 2026 |
| 🔒 सजा की तारीख | 20 जुलाई 2026 |
| ⏳ मुख्य सजा | आजीवन कारावास |
| 💰 कुल जुर्माना | प्रत्येक दोषी पर ₹75,000 |
| 🔗 सजाओं की स्थिति | सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी |
| 🏢 न्यायिक हिरासत | 6 जून 2021 से |
| 👨💼 अपर लोक अभियोजक | अरुण कुमार सिंह |
| ⏭️ आगे का विकल्प | पटना हाईकोर्ट में अपील |
🔍 DarbhangaNews.in Analysis
घटना का कारण सामान्य ग्रामीण विवाद था, लेकिन हिंसा ने इसे हत्या के मामले में बदल दिया। छह गवाहों और चिकित्सकीय साक्ष्यों के आधार पर आया फैसला बताता है कि स्थानीय विवादों में भी समय पर प्रमाण सुरक्षित रखना न्यायिक प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है।
प्राथमिकी में 13 लोगों के नाम थे, जबकि मौजूदा फैसला दो दोषियों से संबंधित है। अदालत या अभियोजन को अन्य नामजद लोगों की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि मामले को लेकर भ्रम और अपुष्ट दावे न फैलें।








