📍 सदर अंचल, दरभंगा | DarbhangaNews.in
दरभंगा में सरकारी भूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री और गलत तरीके से दाखिल-खारिज करने के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। सदर अंचल के खोजकीपुर मौजा स्थित गैरमजरूआ खास यानी सरकारी झील की जमीन के 27 मामलों में रैयती जमाबंदी कायम किए जाने की पुष्टि प्रशासनिक जांच में हुई है।
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी कौशल कुमार ने तीन राजस्व कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा मामले में भूमिका पाए जाने वाले आठ वर्तमान और पूर्व राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध प्रपत्र-क गठित कर विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
📌 मुख्य बातें
✅ खोजकीपुर मौजा की सरकारी झील की जमीन से जुड़ा मामला
✅ जमीन का क्षेत्रफल करीब चार बीघा 13 कट्ठा 10 धूर
✅ सरकारी भूमि पर मिट्टी भरकर खरीद-बिक्री किए जाने की शिकायत
✅ 27 मामलों में दाखिल-खारिज कर रैयती जमाबंदी कायम की गई
✅ तीन राजस्व कर्मचारी तत्काल प्रभाव से निलंबित
✅ आठ अधिकारियों और कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई का निर्देश
✅ अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में दो सदस्यीय दल ने की जांच
चार बीघा से अधिक सरकारी झील की जमीन का मामला
प्रशासन को शिकायत मिली थी कि सदर अंचल के खोजकीपुर मौजा, थाना संख्या-600 में स्थित करीब चार बीघा 13 कट्ठा 10 धूर गैरमजरूआ खास झील की जमीन पर मिट्टी भरकर प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा कथित रूप से अवैध खरीद-बिक्री की जा रही है।
सरकारी अभिलेखों में गैरमजरूआ खास दर्ज होने के बावजूद जमीन के अलग-अलग हिस्सों का दाखिल-खारिज कर निजी लोगों के नाम रैयती जमाबंदी कायम किए जाने का मामला सामने आया। शिकायत को गंभीर मानते हुए डीएम ने विस्तृत जांच का आदेश दिया था।
दो सदस्यीय जांच दल ने खंगाले अभिलेख
पूरे मामले की तथ्यात्मक और निष्पक्ष जांच के लिए अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में दो सदस्यीय जांच दल बनाया गया। इसमें भूमि सुधार उप समाहर्ता, सदर को भी शामिल किया गया।
जांच दल को संबंधित दाखिल-खारिज वादों, जमाबंदी अभिलेखों, भूमि के मूल स्वरूप और संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल कर संयुक्त प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया गया था।
जांच में 27 मामलों का खुलासा
जांच रिपोर्ट में पाया गया कि तत्कालीन सदर अंचल अधिकारियों, राजस्व अधिकारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने सरकारी भूमि के 27 मामलों में दाखिल-खारिज स्वीकृत कर रैयती जमाबंदी कायम कर दी।
जिला प्रशासन ने इसे गंभीर राजस्व अनियमितता मानते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान की। यह कार्रवाई प्रशासनिक जांच रिपोर्ट पर आधारित है; अंतिम कानूनी जिम्मेदारी आगे की विभागीय या न्यायिक प्रक्रिया के बाद निर्धारित होगी।
किन तीन राजस्व कर्मचारियों को किया गया निलंबित?
जिलाधिकारी ने जांच में दोषी पाए जाने के बाद निम्न तीन राजस्व कर्मचारियों को निलंबित किया है—
- चन्दन कुमार शर्मा — राजस्व कर्मचारी, सदर अंचल
- नन्द लाल दास — तत्कालीन राजस्व कर्मचारी, सदर; वर्तमान में जाले अंचल में पदस्थापित और बहेड़ी अंचल में प्रतिनियुक्त
- नेहाल कुमार — राजस्व कर्मचारी, सदर अंचल
तीनों के खिलाफ आगे विभागीय प्रक्रिया भी चलाई जा सकती है।
आठ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई
जांच में भूमिका पाए जाने के बाद आठ वर्तमान और पूर्व अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध प्रपत्र-क गठित करने का निर्देश दिया गया है।
इनमें—
- तत्कालीन सदर अंचल अधिकारी अरुण कुमार सक्सेना
- तत्कालीन सदर अंचल अधिकारी इन्द्रसान साह
- तत्कालीन सदर अंचल अधिकारी रंधीर कुमार
- राजस्व अधिकारी विनीत चित्रा
- तत्कालीन राजस्व कर्मचारी बबन पाल
- तत्कालीन राजस्व कर्मचारी राधेश्याम चौधरी
- तत्कालीन राजस्व कर्मचारी भरत कुमार
- तत्कालीन राजस्व कर्मचारी पूर्णानन्द झा
के नाम शामिल हैं। इनमें कई अधिकारी और कर्मचारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि रंधीर कुमार वर्तमान में पश्चिम चंपारण के गौनाहा में अंचल अधिकारी बताए गए हैं।
सरकारी जमीन निजी नाम पर कैसे दर्ज हुई?
दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में जमीन खरीदने वाले व्यक्ति का नाम सरकारी राजस्व अभिलेख में दर्ज किया जाता है। लेकिन किसी सरकारी, झील, जलस्रोत या गैरमजरूआ भूमि को बिना वैध आदेश के निजी रैयती जमाबंदी में बदलना गंभीर अनियमितता मानी जाती है।
अब जांच का महत्वपूर्ण विषय यह होगा कि—
- किन दस्तावेजों के आधार पर आवेदन स्वीकार किए गए
- भूमि के सरकारी स्वरूप को अभिलेखों में क्यों नहीं देखा गया
- दाखिल-खारिज आदेश किस स्तर पर स्वीकृत हुए
- जमीन खरीदने और बेचने वाले कौन थे
- क्या प्रॉपर्टी कारोबारियों और राजस्व कर्मियों के बीच मिलीभगत थी
- अवैध जमाबंदियों को रद्द करने की आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी
झील और जलनिकासी पर भी पड़ सकता है असर
खोजकीपुर की संबंधित जमीन सरकारी अभिलेखों में झील भूमि बताई गई है। ऐसी जमीन पर मिट्टी भरकर कब्जा या निर्माण होने से केवल सरकारी संपत्ति का नुकसान नहीं होता, बल्कि आसपास की जलनिकासी और पर्यावरण पर भी असर पड़ सकता है।
दरभंगा पहले से जलजमाव की समस्या झेलता है। ऐसे में झील, तालाब और अन्य प्राकृतिक जलस्रोतों की जमीन को सुरक्षित रखना शहर के लिए विशेष रूप से जरूरी है।
डीएम ने दिया सख्त कार्रवाई का संकेत
जिलाधिकारी कौशल कुमार ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण, फर्जी दाखिल-खारिज या गलत तरीके से रैयती जमाबंदी कायम करने जैसी गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में संलिप्त अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों पर विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने इसे सरकारी भूमि की सुरक्षा और राजस्व अभिलेखों में पारदर्शिता से जुड़ा मामला बताया है।
📋 जरूरी जानकारी एक नजर में
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| स्थान | खोजकीपुर मौजा, सदर अंचल, दरभंगा |
| थाना संख्या | 600 |
| भूमि का प्रकार | गैरमजरूआ खास, झील भूमि |
| क्षेत्रफल | करीब चार बीघा 13 कट्ठा 10 धूर |
| कथित गड़बड़ी | सरकारी भूमि का दाखिल-खारिज कर रैयती जमाबंदी |
| कुल मामले | 27 |
| निलंबन | तीन राजस्व कर्मचारी |
| अन्य कार्रवाई | आठ अधिकारियों-कर्मचारियों पर प्रपत्र-क |
| जांच दल | अपर समाहर्ता और भूमि सुधार उप समाहर्ता, सदर |
| आगे की स्थिति | विभागीय कार्रवाई और अभिलेखों की समीक्षा |
📊 DarbhangaNews.in Analysis
खोजकीपुर की सरकारी झील भूमि का मामला केवल दाखिल-खारिज में गलती नहीं, बल्कि दरभंगा के भूमि प्रशासन और प्राकृतिक जलस्रोतों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। सरकारी जमीन को निजी नाम पर दर्ज करने से जमीन कारोबारियों को लाभ और सरकार तथा आम जनता को नुकसान हो सकता है।
तीन राजस्व कर्मचारियों का निलंबन महत्वपूर्ण कार्रवाई है, लेकिन मामले की पूरी जांच जमीन खरीदने-बेचने वालों और आदेश स्वीकृत करने वाले सभी स्तरों तक पहुंचनी चाहिए। साथ ही, जिन 27 मामलों में जमाबंदी कायम हुई, उनकी कानूनी समीक्षा कर सरकारी भूमि की मूल स्थिति बहाल करने की दिशा में भी कार्रवाई जरूरी होगी।
दरभंगा में जलजमाव की गंभीर समस्या को देखते हुए झील, पोखर और नालों की जमीन को बचाना केवल भूमि संरक्षण नहीं, बल्कि शहर के भविष्य की सुरक्षा भी है।








