📍 बिरौल, दरभंगा | DarbhangaNews.in
दरभंगा जिले के बिरौल थाना क्षेत्र के व्यस्त हाटी-कोठी पुल चौक को जल्द अतिक्रमणमुक्त कराया जाएगा। स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद अनुमंडल प्रशासन ने अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष को सरकारी जमीन पर बनी अवैध दुकानों की सूची तैयार कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, शिकायत में कहा गया था कि कोठी पुल चौक के पास सरकारी जमीन पर अवैध दुकानें संचालित की जा रही हैं और कुछ दबंग लोग दुकानदारों से वसूली कर रहे हैं। पैसा नहीं देने पर गाली-गलौज, धमकी और मारपीट की शिकायत भी सामने आई है।
एसडीओ शशांक राज के निर्देश पर बुधवार को अंचल कर्मियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। जांच के दौरान सरकारी जमीन पर अवैध दुकान संचालन और वसूली से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। प्रारंभिक जांच में 2 से 3 लोगों को चिन्हित किए जाने की बात सामने आई है।
📌 मुख्य बातें
✅ बिरौल थाना क्षेत्र के हाटी-कोठी पुल चौक का मामला
✅ सरकारी जमीन पर अवैध दुकानें संचालित होने की शिकायत
✅ दुकानदारों से एडवांस और मासिक वसूली का आरोप
✅ पैसा नहीं देने पर धमकी और मारपीट की शिकायत
✅ SDO शशांक राज ने CO और थानाध्यक्ष को कार्रवाई का निर्देश दिया
✅ अंचल कर्मियों की टीम ने मौके पर जांच की
✅ 2 से 3 लोगों को चिन्हित किए जाने की जानकारी
✅ CO कुमारी सरिता रानी ने शीघ्र अतिक्रमण हटाने की बात कही
✅ वसूली करने वालों पर प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी
🚧 हाटी-कोठी पुल चौक पर वर्षों से अतिक्रमण की शिकायत
हाटी-कोठी पुल चौक बिरौल क्षेत्र का व्यस्त स्थान माना जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहां वर्षों से सरकारी जमीन पर अवैध दुकानें लगाई जा रही हैं। इससे आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है और चौक पर जाम जैसी स्थिति भी बनती है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से शिकायत की थी कि सरकारी जमीन पर कब्जा कर दुकानें संचालित की जा रही हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ दबंग युवक दुकानदारों से जबरन पैसे वसूलते हैं और विरोध करने पर धमकाते हैं।
💰 एडवांस और हर महीने वसूली का आरोप
जांच के दौरान दुकानदारों ने बताया कि उनसे एडवांस में 20 से 25 हजार रुपये तक लिए जाते हैं। इसके अलावा हर महीने 5 से 10 हजार रुपये तक वसूली की बात भी सामने आई है।
यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल अतिक्रमण का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर आर्थिक वसूली का गंभीर मामला बन सकता है। प्रशासन के लिए यह पता लगाना जरूरी होगा कि वसूली करने वाले लोग कौन हैं और क्या उन्हें किसी स्तर पर संरक्षण मिल रहा था।
👮 SDO ने मांगी थी दो दिनों में रिपोर्ट
स्थानीय लोगों की शिकायत पर SDO शशांक राज ने 9 जुलाई को अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष को पत्र लिखा था। इसमें कहा गया था कि कोठी पुल चौक के पास सरकारी जमीन पर अवैध दुकानें लगी हैं और दुकानदारों से दबंगों द्वारा वसूली की जा रही है। SDO ने मामले की जांच कर दो दिनों के भीतर प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था।
इसी निर्देश के बाद अंचल कर्मियों की टीम ने बुधवार को मौके पर जांच की और अपना प्रतिवेदन SDO को भेज दिया। अब इस रिपोर्ट के आधार पर आगे अतिक्रमण हटाने और वसूली करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
🏢 CO बोलीं—शीघ्र हटेगा अवैध कब्जा
अंचलाधिकारी कुमारी सरिता रानी ने बताया कि शीघ्र ही कोठी चौक को अतिक्रमणमुक्त कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि दुकानदारों से वसूली करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी और सरकारी जमीन से अवैध कब्जा हटाया जाएगा।
इस बयान से स्पष्ट है कि प्रशासन मामले को केवल नोटिस या चेतावनी तक सीमित रखने के बजाय कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि कार्रवाई की तारीख, हटाई जाने वाली दुकानों की संख्या और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विस्तृत कार्यक्रम अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
🥩 पहले भी खुले में मांस-मछली बिक्री पर उठे थे सवाल
बिरौल क्षेत्र में कोठी पुल चौक और आसपास खुले में मांस-मछली की दुकानों को लेकर भी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। मार्च 2026 की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि बिरौल में खुले में मांस-मछली की बिक्री से स्थानीय लोगों, यात्रियों और छात्रों को परेशानी हो रही है। कोठी पुल चौक पर मांस बिक्री से दुर्गंध और संक्रमण के खतरे की बात भी उठी थी।
इस पृष्ठभूमि में हाटी-कोठी पुल चौक पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई स्थानीय सफाई, यातायात और सार्वजनिक व्यवस्था से भी जुड़ी दिखाई देती है। यदि कार्रवाई निष्पक्ष और नियमित निगरानी के साथ होती है तो क्षेत्र की व्यवस्था में सुधार हो सकता है।
⚠️ दुकानदारों की आजीविका का भी सवाल
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जरूरी हो सकती है, लेकिन इसके साथ छोटे दुकानदारों की आजीविका का सवाल भी जुड़ा होता है। यदि कोई दुकानदार वास्तव में वसूली का शिकार है, तो उसे आरोपी मानने के बजाय पीड़ित के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
प्रशासन को अवैध कब्जा हटाने के साथ यह भी जांचना चाहिए कि दुकानदारों से पैसा किसने लिया, कितने समय से लिया जा रहा था और क्या किसी ने सरकारी जमीन पर अवैध रूप से दुकान लगाने की अनुमति बेचने जैसा काम किया।
📊 जरूरी जानकारी एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| 📍 स्थान | हाटी-कोठी पुल चौक |
| 🏛️ क्षेत्र | बिरौल, दरभंगा |
| 🎯 मामला | सरकारी जमीन पर अतिक्रमण |
| 🛒 आरोप | अवैध दुकान संचालन |
| 💰 वसूली | 20-25 हजार एडवांस, 5-10 हजार मासिक |
| 👮 निर्देश | SDO शशांक राज |
| 🏢 कार्रवाई | CO और थानाध्यक्ष को निर्देश |
| 🔍 जांच | अंचल कर्मियों की टीम ने की |
| 👥 चिन्हित | 2 से 3 लोगों की जानकारी |
| ⚖️ अगला कदम | अतिक्रमण हटाने और प्राथमिकी की तैयारी |
🔍 DarbhangaNews.in Analysis
हाटी-कोठी पुल चौक का मामला केवल सड़क किनारे लगी दुकानों का सामान्य अतिक्रमण नहीं दिखता। यहां शिकायत सरकारी जमीन पर कब्जा, दुकानदारों से कथित वसूली और धमकी से जुड़ी है। इसलिए प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के साथ वसूली नेटवर्क की भी जांच करनी चाहिए।
यदि दुकानदारों से एडवांस और मासिक रकम वसूली गई है, तो यह पता लगाना जरूरी है कि पैसा किन लोगों तक पहुंच रहा था। कार्रवाई केवल दुकान हटाने तक सीमित रही तो असली समस्या फिर किसी दूसरे स्थान पर खड़ी हो सकती है।
साथ ही, छोटे दुकानदारों को सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए। जिन लोगों ने मजबूरी में पैसा देकर दुकान लगाई, उन्हें अपराधी की तरह नहीं बल्कि जांच में महत्वपूर्ण गवाह की तरह देखा जाना चाहिए। निष्पक्ष कार्रवाई, वैकल्पिक व्यवस्था और नियमित निगरानी से ही चौक को स्थायी रूप से अतिक्रमणमुक्त रखा जा सकता है।अपडेट जारी करना चाहिए। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और कर्मचारियों का भरोसा मजबूत होगा।








