बेनीपुर में छह माह से मानदेय अटका, 283 आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविका-सहायिका आर्थिक संकट में

बेनीपुर में छह माह से मानदेय अटका, 283 आंगनबाड़ी केंद्रों की सेविका-सहायिका आर्थिक संकट में
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📍 बेनीपुर, दरभंगा | DarbhangaNews.in

दरभंगा जिले के बेनीपुर प्रखंड और नगर परिषद क्षेत्र में आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका पिछले छह माह से मानदेय भुगतान का इंतजार कर रही हैं। लंबे समय से राशि नहीं मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार बेनीपुर क्षेत्र में 306 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें 283 केंद्र कार्यशील बताए गए हैं। समाज कल्याण विभाग को 282 केंद्रों की सेविका-सहायिका की उपस्थिति और केंद्र संचालन की रिपोर्ट हर माह भेजी जाती है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार सेविका और सहायिका की उपस्थिति विभागीय पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है। नए निर्देश के तहत आधार सीडिंग अनिवार्य की गई थी और आईसीडीएस कार्यालय सूत्रों के अनुसार बेनीपुर क्षेत्र की सभी सेविका-सहायिका का आधार सीडिंग कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके बावजूद फरवरी माह से राज्यांश मानदेय का भुगतान लंबित है।

बेनीपुर की सेविकाओं को प्रतिमाह ₹9,000 और सहायिकाओं को ₹4,500 मानदेय मिलता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्रांश की राशि कुछ सेविका-सहायिका को मिल चुकी है, जबकि शेष भुगतान प्रक्रियाधीन है। लेकिन राज्यांश नहीं मिलने से परेशानी ज्यादा बढ़ गई है। सीडीपीओ रंजीत कुमार ने भी स्वीकार किया कि छह माह से राज्यांश मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है और बकाया राशि विभाग की ओर से दी जाएगी।

📌 मुख्य बातें

✅ बेनीपुर प्रखंड और नगर परिषद क्षेत्र की सेविका-सहायिका परेशान
✅ छह माह से राज्यांश मानदेय भुगतान नहीं हुआ
✅ बेनीपुर आईसीडीएस क्षेत्र में कुल 306 आंगनबाड़ी केंद्र
✅ 283 केंद्र कार्यशील बताए गए
✅ 282 केंद्रों की रिपोर्ट हर माह विभाग को भेजी जाती है
✅ उपस्थिति विभागीय पोर्टल पर अपलोड की जा चुकी है
✅ आधार सीडिंग का काम पूरा होने की जानकारी
✅ सेविका को ₹9,000 और सहायिका को ₹4,500 मासिक मानदेय
✅ सीडीपीओ रंजीत कुमार ने भुगतान लंबित होने की बात स्वीकार की
✅ सेविका-सहायिका ने आर्थिक संकट और नाराजगी जताई

👩‍👧 छह माह से भुगतान नहीं, परिवार चलाने में परेशानी

आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका गांव-कस्बे के स्तर पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और परिवारों से सीधे जुड़ी रहती हैं। लेकिन जब इन्हीं कर्मियों को महीनों तक मानदेय नहीं मिले, तो उनके सामने घर चलाने, बच्चों की पढ़ाई, इलाज, राशन और रोजमर्रा के खर्च की समस्या खड़ी हो जाती है।

बेनीपुर क्षेत्र की कुछ सेविकाओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना भुगतान के काम करना बहुत कठिन हो गया है। रिपोर्ट में सेविकाओं की पीड़ा को इस तरह व्यक्त किया गया कि “भूखे भजन न होत गोपाला।” यानी काम की जिम्मेदारी लगातार बनी हुई है, लेकिन मेहनत का भुगतान समय पर नहीं मिल रहा।

🏫 306 केंद्रों की व्यवस्था, 283 केंद्र कार्यशील

बेनीपुर आईसीडीएस क्षेत्र में कुल 306 आंगनबाड़ी केंद्र दर्ज हैं। इनमें 283 केंद्र कार्यशील बताए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से बच्चों की प्रारंभिक देखभाल, पोषण, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा, गर्भवती महिलाओं और माताओं से जुड़ी सेवाएं दी जाती हैं। विभाग को हर माह केंद्र संचालन और उपस्थिति से संबंधित रिपोर्ट भेजी जाती है।

इतने बड़े नेटवर्क में सेविका और सहायिका की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। वे केवल केंद्र खोलने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि लाभार्थियों की सूची, उपस्थिति, पोषण वितरण, स्वास्थ्य निगरानी, टीकाकरण सहयोग और कई सरकारी अभियानों में भी योगदान देती हैं।

📲 आधार सीडिंग पूरी, फिर भी भुगतान अटका

आईसीडीएस कार्यालय सूत्रों के अनुसार विभागीय निर्देश के बाद सभी सेविका और सहायिका की आधार सीडिंग पूरी कर ली गई है। सामान्य तौर पर आधार सीडिंग और पोर्टल अपडेट को भुगतान प्रक्रिया से जोड़कर देखा जाता है, ताकि लाभार्थी या कर्मी का विवरण सत्यापित रहे और भुगतान में पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन बेनीपुर में आधार सीडिंग पूरी होने के बाद भी राज्यांश भुगतान लंबित है।

यह स्थिति बताती है कि समस्या केवल स्थानीय दस्तावेज या उपस्थिति अपलोड तक सीमित नहीं है। यदि पोर्टल पर उपस्थिति और आधार सीडिंग पूरी है, तो विभागीय स्तर पर भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत है।

🍚 पहले पोषाहार संकट, अब मानदेय संकट

बेनीपुर क्षेत्र में आंगनबाड़ी व्यवस्था को लेकर चिंता नई नहीं है। करीब दो महीने पहले प्रभात खबर की रिपोर्ट में बेनीपुर बाल विकास परियोजना के 290 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार ठप होने की बात सामने आई थी। उसी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि बच्चों और महिलाओं को पोषण नहीं मिल पा रहा था और सेविका-सहायिका का मानदेय भी कई महीनों से लंबित था।

अब छह माह से मानदेय भुगतान नहीं होने की खबर से यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि बेनीपुर में आंगनबाड़ी सेवा की निगरानी और भुगतान व्यवस्था कितनी मजबूत है। यदि पोषण और मानदेय दोनों स्तर पर देरी होती है, तो इसका असर सीधे बच्चों, महिलाओं और केंद्र चलाने वाली कर्मियों पर पड़ता है।

🧒 आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका क्यों अहम?

आंगनबाड़ी केंद्र केवल बच्चों को बैठाने की जगह नहीं हैं। केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय से जुड़ी जानकारी के अनुसार मिशन सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0 के तहत छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और किशोरियों को पोषण, पूर्व-प्राथमिक शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण शिक्षा जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

इसलिए सेविका-सहायिका का नियमित भुगतान केवल कर्मचारी हित का मामला नहीं है। यह पूरी पोषण और बाल विकास व्यवस्था की मजबूती से जुड़ा सवाल है। जब जमीनी कर्मी आर्थिक तनाव में रहेंगे, तो केंद्र संचालन की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।

🏛️ विभाग से क्या उम्मीद?

बेनीपुर की सेविका-सहायिका की सबसे बड़ी मांग है कि लंबित राज्यांश मानदेय का भुगतान जल्द किया जाए। जब उपस्थिति पोर्टल पर अपलोड है और आधार सीडिंग भी पूरी बताई जा रही है, तो भुगतान में देरी का स्पष्ट कारण सामने आना चाहिए।

विभाग को यह भी बताना चाहिए कि राज्यांश और केंद्रांश भुगतान में देरी किस स्तर पर हो रही है। यदि तकनीकी कारण है तो उसका समाधान किया जाए। यदि आवंटन का मामला है तो जिला और राज्य स्तर से जल्द राशि जारी की जाए।

📊 जरूरी जानकारी एक नजर में

विवरणजानकारी
📍 क्षेत्रबेनीपुर प्रखंड और नगर परिषद
जिलादरभंगा
मामलाआंगनबाड़ी सेविका-सहायिका का मानदेय लंबित
अवधिछह माह से राज्यांश भुगतान नहीं
कुल आंगनबाड़ी केंद्र306
कार्यशील केंद्र283
रिपोर्ट भेजे जाने वाले केंद्र282
सेविका मानदेय₹9,000 प्रतिमाह
सहायिका मानदेय₹4,500 प्रतिमाह
भुगतान स्थितिकेंद्रांश कुछ को मिला, शेष प्रक्रियाधीन; राज्यांश लंबित
अधिकारीसीडीपीओ रंजीत कुमार
विभागीय स्थितिउपस्थिति अपलोड और आधार सीडिंग पूरी बताई गई

🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण

बेनीपुर में छह माह से आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका का मानदेय अटकना गंभीर प्रशासनिक समस्या है। आंगनबाड़ी केंद्र गांवों में बच्चों, माताओं और कमजोर परिवारों तक सरकार की पोषण और देखभाल सेवाएं पहुंचाने की पहली कड़ी हैं। यदि इसी कड़ी को समय पर भुगतान नहीं मिलेगा, तो सेवा की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्थानीय स्तर से उपस्थिति पोर्टल पर अपलोड होने और आधार सीडिंग पूरी होने की बात कही जा रही है। ऐसे में भुगतान रुकने का कारण स्पष्ट होना चाहिए। सेविका-सहायिका को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध भुगतान चाहिए।

बेनीपुर में पहले पोषाहार से जुड़ी समस्या और अब मानदेय भुगतान का मुद्दा सामने आना यह संकेत देता है कि आईसीडीएस व्यवस्था की नियमित समीक्षा जरूरी है। जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग को बेनीपुर परियोजना की भुगतान, पोषाहार, केंद्र संचालन और पोर्टल रिपोर्टिंग की संयुक्त समीक्षा करनी चाहिए।

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