शादी का कार्ड समझकर .APK फाइल डाउनलोड की, बिना OTP बताए खाते से ₹7.91 लाख गायब

शादी का कार्ड समझकर .APK फाइल डाउनलोड की, बिना OTP बताए खाते से ₹7.91 लाख गायब
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📍 बेगूसराय, बिहार | DarbhangaNews.in

डिजिटल शादी के निमंत्रण का बढ़ता चलन अब साइबर अपराधियों के लिए ठगी का नया हथियार बनता जा रहा है। बेगूसराय में ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने मोबाइल पर आए शादी के निमंत्रण को असली समझकर .APK फाइल डाउनलोड कर ली। इसके बाद उनके बैंक खाते से कुल ₹7 लाख 91 हजार 693 निकल गए। पीड़िता का कहना है कि उन्होंने न किसी को एक बार इस्तेमाल होने वाला पासवर्ड यानी OTP बताया और न ही अपनी ओर से इन भुगतानों को मंजूरी दी।

मामला नगर थाना क्षेत्र में रहने वाली सबिता बरनवाल से जुड़ा है। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार उनका खाता आईसीआईसीआई बैंक में है। उन्होंने 12 अगस्त को साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि 4 अगस्त को उनके मोबाइल पर शादी के कार्ड के नाम से एक फाइल आई थी। बाद में पता चला कि वह सामान्य तस्वीर या दस्तावेज नहीं बल्कि “.APK” फाइल थी। पीड़िता के अनुसार फाइल डाउनलोड करने के बाद उनका मोबाइल प्रभावित हो गया।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि 8 से 9 अगस्त के बीच यूपीआई के माध्यम से ₹7,91,693 खाते से निकल गए, जबकि महिला के मुताबिक उन्हें किसी लेनदेन के लिए OTP तक प्राप्त नहीं हुआ था। मामले की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर भी की गई और पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

📌 मुख्य बातें

✅ बेगूसराय की महिला के साथ ₹7,91,693 की कथित साइबर ठगी
✅ 4 अगस्त को शादी के निमंत्रण के नाम से आई थी फाइल
✅ सामान्य कार्ड नहीं बल्कि .APK फाइल थी
✅ महिला ने जानकारी के अभाव में फाइल डाउनलोड कर ली
✅ 8 और 9 अगस्त के बीच यूपीआई से पैसे निकलने का आरोप
✅ पीड़िता का दावा—किसी को OTP नहीं बताया
✅ 12 अगस्त को साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज
✅ पीड़िता ने 1930 पर भी शिकायत की
✅ पुलिस ने मामले की जांच शुरू की
✅ CERT-In पहले भी नकली शादी निमंत्रण वाली .APK फाइलों को लेकर चेतावनी जारी कर चुका है

💌 4 अगस्त को मोबाइल पर आया था ‘शादी का कार्ड’

पीड़िता ने प्राथमिकी में बताया कि 4 अगस्त को उनके मोबाइल पर शादी के निमंत्रण के रूप में एक फाइल आई।

उन्होंने इसे सामान्य डिजिटल शादी कार्ड समझा।

लेकिन वह तस्वीर या पीडीएफ दस्तावेज नहीं था। फाइल का अंत “.APK” से हो रहा था। यही वह फाइल प्रकार है जिसका इस्तेमाल एंड्रॉयड फोन में अनुप्रयोग स्थापित करने के लिए किया जाता है। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार महिला को इसकी जानकारी नहीं थी और उन्होंने फाइल डाउनलोड कर ली।

महिला ने पुलिस को बताया कि शादी का कार्ड खुला भी नहीं और बाद में उन्हें लगा कि फोन पर अनधिकृत नियंत्रण हो गया है।

💸 दो दिनों में ₹7.91 लाख से ज्यादा निकले

पीड़िता के अनुसार 8 से 9 अगस्त के बीच उनके बैंक खाते से कई यूपीआई भुगतानों के माध्यम से कुल ₹7,91,693 निकाल लिए गए।

यह राशि करीब आठ लाख रुपये के बराबर है।

महिला का दावा है कि उन्होंने:

  • किसी व्यक्ति को OTP नहीं बताया,
  • OTP साझा नहीं किया,
  • इन लेनदेन को स्वयं मंजूरी नहीं दी।

यही कारण है कि पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फोन में आई संदिग्ध फाइल के बाद खाते से अनधिकृत भुगतान किस तरह हुए।

⚠️ सिर्फ ‘लिंक खोलने’ की बात नहीं, .APK फाइल है असली खतरा

इस मामले को समझते समय एक महत्वपूर्ण तकनीकी तथ्य जरूरी है।

इसे केवल यह कह देना कि “शादी का कार्ड खोलते ही पैसा कट गया” पूरी कहानी नहीं बताता।

हिन्दुस्तान में दर्ज प्राथमिकी के विवरण के अनुसार महिला ने .APK फाइल डाउनलोड की थी।

भारत सरकार की कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया टीम CERT-In ने भी पहले चेतावनी जारी की है कि साइबर अपराधी व्हाट्सऐप जैसे संदेश माध्यमों पर नकली शादी निमंत्रण के रूप में हानिकारक .APK फाइल भेज रहे हैं। ऐसी फाइल स्थापित होने पर वह उपयोगकर्ता से संवेदनशील अनुमतियां मांग सकती है और संपर्क सूची, संदेश, बैंक OTP तथा सूचनाओं तक पहुंच हासिल कर सकती है।

इसलिए हर डिजिटल शादी निमंत्रण खतरनाक नहीं है।

खतरा विशेष रूप से तब बढ़ता है जब कोई कथित निमंत्रण तस्वीर या पीडीएफ की जगह .APK फाइल के रूप में आए और फोन में अनुप्रयोग स्थापित करने को कहे।

📱 CERT-In ने भी दी है इसी तरह के खतरे की चेतावनी

यह केवल बेगूसराय का एक अलग मामला नहीं है।

CERT-In की आधिकारिक चेतावनी में SpyMax नाम के एंड्रॉयड दूरस्थ नियंत्रण वाले हानिकारक सॉफ्टवेयर का उल्लेख किया गया है। एजेंसी के अनुसार इस प्रकार के हानिकारक अनुप्रयोग को नकली शादी निमंत्रण के रूप में फैलाए जाने के मामले देखे गए हैं।

CERT-In के अनुसार ऐसी फाइल स्थापित होने के बाद वह उपयोगकर्ता से कई संवेदनशील अनुमतियां मांग सकती है, जिनमें:

  • संदेश पढ़ने की अनुमति,
  • सूचनाएं देखने की अनुमति,
  • संपर्क सूची तक पहुंच,
  • फोन की गतिविधियों पर नजर,
  • बैंकिंग से जुड़े OTP देखने की क्षमता

जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।

एजेंसी ने लोगों को आधिकारिक अनुप्रयोग भंडार के बाहर से .APK फाइल डाउनलोड करने से बचने की सलाह दी है।

🔐 OTP नहीं बताया, फिर भी कैसे हो सकती है ठगी?

इस बेगूसराय मामले में पुलिस जांच पूरी होने से पहले यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि ₹7.91 लाख निकालने के लिए साइबर अपराधियों ने कौन-सी तकनीक इस्तेमाल की।

लेकिन CERT-In की चेतावनी यह बताती है कि हानिकारक एंड्रॉयड अनुप्रयोग संवेदनशील संदेशों, सूचनाओं और OTP तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं। कुछ ऐसे हानिकारक अनुप्रयोग उपयोगकर्ता की गतिविधियां भी दर्ज कर सकते हैं।

इसलिए “मैंने OTP किसी को बताया ही नहीं, इसलिए ठगी नहीं हो सकती” जैसी धारणा सुरक्षित नहीं है।

यदि किसी हानिकारक अनुप्रयोग को फोन की संवेदनशील अनुमतियां मिल गई हों तो अपराधी उपयोगकर्ता के सीधे OTP बताने के बिना भी आवश्यक जानकारी तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। यह सामान्य तकनीकी खतरे का विवरण है; बेगूसराय के इस विशेष मामले में वास्तव में यही तरीका इस्तेमाल हुआ था या नहीं, इसकी पुष्टि पुलिस जांच से होनी बाकी है।

👮 12 अगस्त को साइबर थाने में प्राथमिकी

महिला ने 12 अगस्त 2026 को साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। शिकायत में पूरे घटनाक्रम और खाते से निकली रकम का उल्लेख किया गया है।

उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर भी संपर्क किया।

गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के अनुसार वित्तीय साइबर ठगी होने पर 1930 पर तुरंत शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायत को बाद में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर आवश्यक विवरण के साथ पूरा किया जा सकता है।

बेगूसराय साइबर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

🚨 पैसे कटें तो देर न करें, तुरंत 1930 पर शिकायत करें

वित्तीय साइबर ठगी में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की आधिकारिक व्यवस्था के तहत 1930 पर आने वाली वित्तीय ठगी की शिकायतों को पुलिस, बैंक और वित्तीय संस्थानों को जोड़ने वाली प्रणाली में दर्ज किया जाता है ताकि तत्काल कार्रवाई की जा सके।

सरकारी दिशा-निर्देश के अनुसार 1930 पर शिकायत के बाद मिलने वाली पावती संख्या का उपयोग करके राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर औपचारिक शिकायत भी पूरी करनी चाहिए।

इसलिए पैसे कटने के बाद केवल बैंक शाखा खुलने का इंतजार करना सही रणनीति नहीं है।

तुरंत बैंक को सूचना + 1930 पर शिकायत सबसे जरूरी शुरुआती कदम हैं।

📵 WhatsApp पर आए शादी कार्ड को कैसे पहचानें?

हर व्हाट्सऐप शादी कार्ड से डरने की जरूरत नहीं है।

सामान्य डिजिटल निमंत्रण आमतौर पर तस्वीर, वीडियो या पीडीएफ जैसे प्रारूप में आ सकता है।

लेकिन यदि फाइल का नाम कुछ इस तरह हो—

Wedding Invitation.apk
Marriage Card.apk
Shaadi Card.apk

तो उसे खोलने या स्थापित करने से बचना चाहिए।

CERT-In विशेष रूप से आधिकारिक अनुप्रयोग भंडार के बाहर से आने वाली APK फाइलों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देता है।

यदि संदेश परिचित व्यक्ति के नंबर से भी आया हो तो फोन करके पूछ लेना बेहतर है, क्योंकि किसी परिचित का संदेश खाता भी पहले से प्रभावित हो सकता है।

🛑 फोन पर ‘Install Unknown Apps’ की अनुमति न दें

ऐसी ठगी तभी ज्यादा खतरनाक हो सकती है जब उपयोगकर्ता फोन को बाहरी स्रोत की फाइल स्थापित करने की अनुमति दे देता है।

CERT-In ने बाहरी स्रोतों के बजाय आधिकारिक अनुप्रयोग भंडार का इस्तेमाल करने और किसी अनुप्रयोग द्वारा मांगी जाने वाली संवेदनशील अनुमतियों की सावधानी से जांच करने की सलाह दी है।

यदि कोई कथित शादी कार्ड:

  • संदेश पढ़ने,
  • संपर्क सूची देखने,
  • सूचनाओं तक पहुंच,
  • फोन की विशेष पहुंच,
  • या अनजान अनुप्रयोग स्थापित करने

की अनुमति मांग रहा है, तो यह गंभीर चेतावनी संकेत है।

📲 गलती से APK स्थापित हो जाए तो क्या करें?

यदि किसी ने गलती से संदिग्ध .APK फाइल स्थापित कर ली हो और फोन असामान्य व्यवहार करने लगे, तो मामले को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

सुरक्षित कदमों में बैंक को तुरंत सूचित करना, डिजिटल भुगतान की पहुंच सुरक्षित करना, संदिग्ध अनुप्रयोग हटाना और साइबर अपराध की शिकायत करना शामिल हो सकता है। गंभीर स्थिति में तकनीकी विशेषज्ञ की मदद लेकर फोन की जांच या सुरक्षित रीसेट की आवश्यकता भी पड़ सकती है।

CERT-In बाहरी स्रोतों से अनुप्रयोग डाउनलोड न करने और जोखिमपूर्ण अनुमतियों से बचने की सलाह देता है, जबकि I4C वित्तीय ठगी की तुरंत 1930 पर सूचना देने को कहता है।

📊 जरूरी जानकारी एक नजर में

विवरणजानकारी
मामलाशादी निमंत्रण के नाम पर साइबर ठगी का आरोप
जिलाबेगूसराय
पीड़ितासबिता बरनवाल
वर्तमान क्षेत्रनगर थाना क्षेत्र, बेगूसराय
बैंकआईसीआईसीआई बैंक
संदिग्ध फाइल मिली4 अगस्त 2026
फाइल का प्रकार.APK
रकम निकली8 से 9 अगस्त
कुल राशि₹7,91,693
भुगतान का माध्यमयूपीआई
पीड़िता का दावाOTP न मिला, न साझा किया
प्राथमिकी12 अगस्त 2026
थानासाइबर थाना
हेल्पलाइन शिकायत1930
पुलिस कार्रवाईजांच शुरू
आधिकारिक चेतावनीनकली शादी निमंत्रण वाली APK से सावधान

🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण: डिजिटल कार्ड नहीं, फाइल का प्रकार देखना सीखना होगा

इस घटना से सबसे बड़ी सीख यह नहीं है कि अब मोबाइल पर आने वाला हर शादी कार्ड संदिग्ध है।

असल सीख है—

फाइल खोलने से पहले उसका प्रकार देखिए।

एक फोटो और एक .APK फाइल दोनों मोबाइल स्क्रीन पर शादी के कार्ड जैसे नाम से दिखाई दे सकती हैं, लेकिन दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है।

.APK वास्तव में एंड्रॉयड अनुप्रयोग स्थापित करने वाली फाइल है।

यदि कोई व्यक्ति “शादी का कार्ड देखने” के लिए आपसे नया अनुप्रयोग स्थापित करने को कह रहा है तो वहीं रुक जाना चाहिए।

बेगूसराय की इस घटना में ₹7.91 लाख की बड़ी राशि निकलने का आरोप है और पीड़िता का कहना है कि उन्होंने OTP तक साझा नहीं किया। इससे यह संदेश और मजबूत होता है कि आधुनिक साइबर ठगी में केवल OTP नहीं बताना पर्याप्त सुरक्षा नहीं है।

फोन में किस अनुप्रयोग को स्थापित किया जा रहा है और उसे कौन-सी अनुमति दी जा रही है—यह समझना भी उतना ही जरूरी है।

इस मामले की पुलिस जांच से यह स्पष्ट होना बाकी है कि पैसे किन खातों में गए, यूपीआई लेनदेन किस तरह अधिकृत हुए और रकम की कितनी वसूली या रोक संभव हो सकी।

लेकिन तब तक एक सावधानी सभी के लिए जरूरी है—

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