Darbhanga News: आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे का 30% काम पूरा, दिसंबर 2026 तक यातायात शुरू करने का लक्ष्य

(Video) Amas–Darbhanga एक्सप्रेसवे Update (June 2026)
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📍 दरभंगा/पटना | DarbhangaNews.in

बिहार के महत्वाकांक्षी आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे—NH-119D का निर्माण अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। नवीनतम प्रगति रिपोर्ट के अनुसार परियोजना का करीब 30 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने चारों निर्माण पैकेज पर एक साथ काम तेज करते हुए दिसंबर 2026 तक पूरे कॉरिडोर को तैयार करने का लक्ष्य रखा है।

वर्तमान मीडिया रिपोर्ट में एक्सप्रेसवे की लंबाई करीब 189 किलोमीटर बताई गई है। यह दक्षिण बिहार के आमस क्षेत्र को पटना, वैशाली और समस्तीपुर होते हुए दरभंगा से जोड़ेगा। सड़क पूरी तरह नए भूभाग पर बनाई जा रही है और सामान्य राजमार्गों की तरह जगह-जगह से वाहनों के प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

परियोजना पूरी होने पर उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच यात्रा तेज होने, कृषि उत्पादों की ढुलाई आसान बनने और दरभंगा एयरपोर्ट की सड़क कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है। हालांकि दिसंबर 2026 अभी निर्माण लक्ष्य है, इसे एक्सप्रेसवे के निश्चित उद्घाटन या सार्वजनिक यातायात की अंतिम तारीख नहीं माना जाना चाहिए।

📌 मुख्य बातें

✅ एक्सप्रेसवे का करीब 30 प्रतिशत निर्माण पूरा
✅ कुल लंबाई नवीनतम रिपोर्ट में करीब 189 किलोमीटर
✅ परियोजना को चार निर्माण पैकेजों में बांटा गया
✅ पैकेज-1 और पैकेज-2 का करीब 31 प्रतिशत काम पूरा
✅ पैकेज-3 में लगभग 24 प्रतिशत निर्माण
✅ समस्तीपुर-दरभंगा पैकेज का करीब 34 प्रतिशत काम पूरा
✅ चार लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राष्ट्रीय राजमार्ग
✅ दिसंबर 2026 तक परियोजना पूरा करने का लक्ष्य
✅ जमीन अधिग्रहण में देरी से प्रभावित हुई पुरानी समयसीमा
✅ कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन गंगा पुल से जुड़ेगा मार्ग
✅ दरभंगा एयरपोर्ट तक बेहतर संपर्क मिलने की उम्मीद
✅ व्यापार, कृषि परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को संभावित लाभ

🛣️ चारों पैकेज पर एक साथ चल रहा निर्माण

निर्माण की गति बढ़ाने के लिए आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे को चार पैकेजों में बांटा गया है। अलग-अलग एजेंसियां मिट्टी भराई, मुख्य सड़क, पुल-पुलिया, फ्लाईओवर और दूसरी संरचनाओं का काम एक साथ कर रही हैं।

NHAI अधिकारी के अनुसार सभी पैकेजों की प्रगति की नियमित निगरानी की जा रही है, ताकि पिछली देरी की भरपाई करते हुए दिसंबर 2026 का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

🚧 पैकेज-1 का करीब 31 प्रतिशत काम पूरा

पहला पैकेज आमस से आगे जहानाबाद की दिशा में करीब 55 किलोमीटर का है। इस हिस्से में लगभग 31 प्रतिशत निर्माण पूरा होने की जानकारी दी गई है।

अभी सड़क के लिए जमीन तैयार करने, मिट्टी भरने और विभिन्न संरचनाओं के निर्माण का काम चल रहा है। सड़क की मजबूत आधार परत तैयार होने के बाद उसके ऊपर मुख्य कैरिजवे की अलग-अलग परतें बिछाई जाएंगी।

🏗️ पैकेज-2 में भी 31 प्रतिशत प्रगति

करीब 54 किलोमीटर लंबे दूसरे पैकेज में भी लगभग 31 प्रतिशत काम पूरा बताया गया है। यह हिस्सा जहानाबाद क्षेत्र से पटना और वैशाली की दिशा में आगे बढ़ता है।

इस सेक्शन में सड़क के साथ पुल और दूसरे ढांचों का निर्माण जारी है। पटना क्षेत्र में परियोजना का संपर्क गंगा नदी पर बने कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन पुल से निर्धारित किया गया है।

🌉 गंगा पार करने में महत्वपूर्ण होगा कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल

एक्सप्रेसवे पटना के दक्षिणी हिस्से से उत्तर बिहार में प्रवेश करने के लिए कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल का उपयोग करेगा। इसके कारण आमस-दरभंगा मार्ग केवल एक नई सड़क परियोजना न रहकर उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला एकीकृत कॉरिडोर बन जाएगा।

पुल और एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों का निर्माण समय पर पूरा होना आवश्यक है। किसी एक महत्वपूर्ण लिंक में देरी होने पर पूरे मार्ग पर निर्बाध यातायात शुरू करने की समयसीमा प्रभावित हो सकती है।

🚜 पैकेज-3 में करीब 24 प्रतिशत निर्माण

वैशाली से समस्तीपुर की दिशा में लगभग 47 किलोमीटर लंबे पैकेज-3 का करीब 24 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। चारों पैकेजों में इसकी प्रगति फिलहाल अपेक्षाकृत कम बताई गई है।

इस हिस्से में मिट्टी भराई, पुलिया और दूसरी संरचनाओं का निर्माण जारी है। आधिकारिक परियोजना दस्तावेजों में पैकेज-3 को कल्याणपुर से बलभद्रपुर तक चार लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में दर्ज किया गया है।

🚘 समस्तीपुर-दरभंगा पैकेज सबसे आगे

अंतिम समस्तीपुर-दरभंगा पैकेज की लंबाई नवीनतम रिपोर्ट में करीब 33 किलोमीटर बताई गई है। इस हिस्से में करीब 34 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है, जो चारों पैकेजों में सबसे अधिक प्रगति है।

यहां सड़क, पुल और दूसरी संरचनाओं पर काम तेजी से चलने की जानकारी है। इस पैकेज की प्रगति दरभंगा और समस्तीपुर के लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही हिस्सा एक्सप्रेसवे को मिथिला क्षेत्र से जोड़ेगा।

📊 पैकेजवार निर्माण की स्थिति

पैकेजअनुमानित लंबाईनवीनतम प्रगतिप्रमुख कार्य
🚧 पैकेज-1करीब 55 किमीलगभग 31%रोडबेड और संरचनाएं
🏗️ पैकेज-2करीब 54 किमीलगभग 31%कैरिजवे और पुल
🚜 पैकेज-3करीब 47 किमीलगभग 24%मिट्टी भराई और पुलिया
🚘 पैकेज-4करीब 33 किमीलगभग 34%सड़क, पुल और अन्य संरचनाएं
🛣️ कुल परियोजनाकरीब 189 किमीलगभग 30%चारों पैकेज पर समानांतर काम

पैकेजवार आंकड़े 19 जुलाई 2026 को प्रकाशित नवीनतम प्रगति रिपोर्ट पर आधारित हैं और निर्माण आगे बढ़ने के साथ बदल सकते हैं।

🌱 क्यों कहा जाता है ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे?

ग्रीनफील्ड परियोजना का अर्थ है कि सड़क को किसी पुराने राजमार्ग को चौड़ा करके बनाने के बजाय नए अलाइनमेंट और नई भूमि पर विकसित किया जा रहा है।

इससे सड़क को सीधा रखने, नियंत्रित प्रवेश देने और पुराने कस्बों तथा बाजारों की भीड़ से बचाने में मदद मिलती है। हालांकि इसके लिए बड़े स्तर पर भूमि अधिग्रहण और नई संरचनाओं के निर्माण की आवश्यकता होती है।

🔒 जगह-जगह से प्रवेश की अनुमति नहीं

एक्सेस-कंट्रोल्ड सड़क पर सामान्य राजमार्ग की तरह प्रत्येक गांव, दुकान या खेत से सीधे प्रवेश नहीं किया जा सकता। वाहनों को निर्धारित इंटरचेंज, प्रवेश और निकास बिंदुओं का उपयोग करना होगा।

इस व्यवस्था से स्थानीय यातायात और तेज गति से चलने वाले वाहनों को अलग रखने में मदद मिलती है। इससे सड़क सुरक्षा और औसत यात्रा गति बेहतर हो सकती है।

गांवों और खेतों तक स्थानीय पहुंच बनाए रखने के लिए सर्विस रोड, वाहन अंडरपास और छोटे संपर्क मार्गों का निर्माण महत्वपूर्ण होगा।

🗓️ मार्च 2023 में शुरू हुआ था निर्माण

नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार एक्सप्रेसवे का निर्माण मार्च 2023 में शुरू हुआ था और मूल अनुबंध अवधि 24 महीने निर्धारित थी।

इस हिसाब से परियोजना को पहले ही पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन मार्ग में भूमि अधिग्रहण और जमीन उपलब्ध कराने में हुई देरी से समयसीमा प्रभावित हुई। अब दिसंबर 2026 को नया लक्ष्य बनाया गया है।

🏞️ जमीन अधिग्रहण रही बड़ी चुनौती

इतनी लंबी ग्रीनफील्ड सड़क के लिए कई जिलों में खेत और दूसरी जमीन अधिगृहीत करनी पड़ी। निर्माण एजेंसी को काम तभी दिया जा सकता है, जब संबंधित हिस्से की जमीन विवाद और दूसरी बाधाओं से मुक्त होकर उपलब्ध हो।

मुआवजा, भूमि रिकॉर्ड, स्वामित्व विवाद और संरचनाएं हटाने जैसी प्रक्रियाएं समय लेने वाली होती हैं। नवीनतम रिपोर्ट में अधिकारियों ने जमीन अधिग्रहण की देरी को पुरानी समयसीमा प्रभावित होने का प्रमुख कारण बताया है।

🧱 अभी उद्घाटन नहीं, बड़े स्तर पर निर्माण बाकी

30 प्रतिशत प्रगति का अर्थ है कि करीब 70 प्रतिशत परियोजना कार्य अभी शेष है। कई स्थानों पर मिट्टी भराई और आधारभूत संरचनाएं बन रही हैं, जिसके बाद सड़क की ऊपरी परत, सुरक्षा अवरोधक, संकेतक, टोल व्यवस्था और परीक्षण का काम भी करना होगा।

दिसंबर 2026 तक यातायात शुरू करने के लिए निर्माण एजेंसियों को केवल सड़क की सतह ही नहीं, बल्कि सभी महत्वपूर्ण पुल, इंटरचेंज और संपर्क मार्ग भी तैयार करने होंगे।

🛫 दरभंगा एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

परियोजना की एक प्रमुख विशेषता दरभंगा एयरपोर्ट से बेहतर सड़क संपर्क बताई जा रही है। एक्सप्रेसवे शुरू होने पर दक्षिण बिहार और पटना की दिशा से आने वाले यात्रियों के लिए एयरपोर्ट तक पहुंच अधिक व्यवस्थित हो सकती है।

हालांकि मुख्य एक्सप्रेसवे से एयरपोर्ट टर्मिनल तक निर्बाध यात्रा के लिए स्थानीय संपर्क सड़क और शहर के भीतर यातायात व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। केवल मुख्य कॉरिडोर पूरा होने से एयरपोर्ट के आसपास जाम की समस्या स्वतः समाप्त नहीं होगी।

🏙️ दरभंगा शहर तक एलिवेटेड संपर्क का अलग प्रस्ताव

दरभंगा रेलवे स्टेशन से आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे तक शहर के प्रमुख चौराहों के रास्ते बेहतर संपर्क विकसित करने की अलग सड़क परियोजना पर भी प्रक्रिया चलने की जानकारी सामने आई है।

यह मुख्य एक्सप्रेसवे से अलग परियोजना है। इसके पूरा होने पर रेलवे स्टेशन, लहेरियासराय और दूसरे शहरी क्षेत्रों से एक्सप्रेसवे तक पहुंच बेहतर हो सकती है, लेकिन इसकी अपनी निविदा, निर्माण और समयसीमा होगी।

🚚 कृषि उत्पादों की ढुलाई में होगा लाभ

गया, पटना, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा के बीच बड़ी मात्रा में सब्जी, फल, दूध, मखाना और दूसरे कृषि उत्पादों का परिवहन होता है।

तेज और नियंत्रित सड़क उपलब्ध होने पर मालवाहक वाहनों का यात्रा समय कम हो सकता है। इससे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों को मंडियों, प्रसंस्करण केंद्रों और बड़े शहरों तक समय पर पहुंचाने में मदद मिल सकती है। परियोजना से व्यापार और कृषि परिवहन को लाभ मिलने की उम्मीद अधिकारियों ने भी जताई है।

🏭 उद्योग और लॉजिस्टिक्स को मिलेगा नया रास्ता

एक्सप्रेसवे के बनने से दक्षिण बिहार के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को उत्तर बिहार और मिथिला क्षेत्र से तेज संपर्क मिलेगा।

वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट नगर और कृषि प्रसंस्करण इकाइयां निर्धारित इंटरचेंजों के आसपास विकसित हो सकती हैं। हालांकि ऐसे निवेश अपने आप नहीं आएंगे; इसके लिए बिजली, औद्योगिक भूमि, स्थानीय सड़क और प्रशासनिक स्वीकृतियां भी आवश्यक होंगी।

🚌 पुराने राजमार्गों पर कम हो सकता है दबाव

वर्तमान में लंबी दूरी के वाहन कस्बों, बाजारों और सामान्य राजमार्गों से होकर गुजरते हैं। इससे स्थानीय यातायात और मालवाहक वाहनों के बीच टकराव तथा जाम की समस्या होती है।

नया एक्सप्रेसवे लंबी दूरी के वाहनों को अलग मार्ग उपलब्ध करा सकता है। इससे पुराने रास्तों पर दबाव कम हो सकता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रवेश-निकास बिंदु और टोल शुल्क वाहन चालकों के लिए कितने व्यावहारिक रहते हैं।

⏱️ यात्रा समय में बड़ी कमी का अनुमान

केंद्र सरकार की पुरानी पीएम गतिशक्ति परियोजना प्रस्तुति में इस कॉरिडोर से औसत यात्रा समय को लगभग 6.5 घंटे से घटाकर करीब तीन घंटे करने का अनुमान दिया गया था। उसी दस्तावेज में औसत गति 40 किलोमीटर प्रति घंटे से बढ़कर करीब 80 किलोमीटर प्रति घंटे होने का आकलन था।

ये परियोजना-आधारित अनुमान हैं। वास्तविक यात्रा समय वाहन की गति, टोल, इंटरचेंज, संपर्क सड़क और यातायात की स्थिति पर निर्भर करेगा।

📏 लंबाई और जिलों के आंकड़ों में अंतर

19 जुलाई की नवीनतम मीडिया रिपोर्ट में परियोजना की लंबाई 189 किलोमीटर और मार्ग में छह जिले—गया, जहानाबाद, पटना, वैशाली, समस्तीपुर और दरभंगा—बताए गए हैं।

इसके विपरीत जनवरी 2026 में लोकसभा में प्रस्तुत सरकारी उत्तर में पूरे NH-119D कॉरिडोर की लंबाई 198 किलोमीटर और मिथिला क्षेत्र में इसका हिस्सा 57 किलोमीटर दर्ज है। पुराने सरकारी गतिशक्ति दस्तावेज में नालंदा सहित सात प्रमुख जिलों का उल्लेख भी मिलता है।

यह अंतर अलग परियोजना खंडों, संपर्क हिस्सों या माप पद्धति के कारण हो सकता है। अंतिम तकनीकी लंबाई और जिला सीमा के लिए NHAI की नवीनतम स्वीकृत परियोजना सूची को निर्णायक माना जाना चाहिए।

💰 लागत के आंकड़ों में भी अलग-अलग दावे

टाइम्स ऑफ इंडिया की नवीनतम रिपोर्ट में परियोजना की अनुमानित लागत करीब ₹5,000 करोड़ बताई गई है। वहीं 2023 के केंद्र सरकार के पीएम गतिशक्ति दस्तावेज में व्यापक आमस-दरभंगा ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी का कुल परियोजना मूल्य ₹7,220 करोड़ दर्ज था।

अलग आंकड़े मुख्य एक्सप्रेसवे, गंगा पुल, संपर्क मार्गों और कुल पूंजीगत लागत को शामिल या अलग रखने के कारण हो सकते हैं। इसलिए किसी एक लागत आंकड़े को अंतिम संशोधित परियोजना लागत के रूप में प्रस्तुत करना जल्दबाजी होगी।

🛡️ सड़क सुरक्षा के लिए होंगे विशेष प्रबंध

एक्सप्रेसवे शुरू होने से पहले क्रैश बैरियर, दिशा संकेतक, रिफ्लेक्टर, आपातकालीन फोन, एंबुलेंस और पेट्रोलिंग की व्यवस्था जरूरी होगी।

इंटरचेंजों पर पर्याप्त रोशनी और गलत दिशा में प्रवेश रोकने के उपाय भी आवश्यक होंगे। एक्सेस-कंट्रोल का लाभ तभी मिलेगा, जब स्थानीय लोगों और पशुओं के अनधिकृत प्रवेश को सुरक्षित ढंग से रोका जाए।

🧑‍🌾 किसानों के लिए सर्विस रोड महत्वपूर्ण

जिन खेतों के बीच से एक्सप्रेसवे गुजर रहा है, वहां किसानों की शेष जमीन तक पहुंच बनाए रखना आवश्यक होगा।

निर्माण से यदि पुराने ग्रामीण रास्ते कटते हैं तो अंडरपास, सर्विस रोड या वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध कराना होगा। किसी गांव को इंटरचेंज न मिलने पर वहां के लोगों को एक्सप्रेसवे तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है।

⚠️ दिसंबर 2026 लक्ष्य को लेकर चुनौती

मार्च 2023 से जुलाई 2026 तक परियोजना का करीब 30 प्रतिशत काम पूरा होने की रिपोर्ट है। शेष काम को दिसंबर तक पूरा करने के लिए निर्माण गति में बहुत अधिक वृद्धि की आवश्यकता होगी।

संभव है कि कुछ पैकेज या हिस्से पहले तैयार होकर यातायात के लिए खोले जाएं और बाकी संरचनाओं पर काम जारी रहे। लेकिन NHAI ने अभी चरणवार उद्घाटन की आधिकारिक योजना सार्वजनिक नहीं की है।

🔮 आगे क्या होगा?

आने वाले महीनों में चारों पैकेजों पर मिट्टी भराई और पुल-पुलिया निर्माण के साथ मुख्य कैरिजवे बिछाने का काम तेज किया जाएगा।

NHAI को जमीन की शेष बाधाओं, बरसात के कारण निर्माण पर पड़ने वाले प्रभाव और गंगा पुल सहित महत्वपूर्ण लिंक की प्रगति का समन्वय करना होगा। दिसंबर 2026 में पूरा मार्ग खुलेगा या कुछ हिस्सों में चरणवार यातायात शुरू होगा, यह वर्ष के अंतिम महीनों की वास्तविक प्रगति से स्पष्ट होगा।

📊 जरूरी जानकारी एक नजर में

विवरणजानकारी
🛣️ परियोजनाआमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे
🏷️ राष्ट्रीय राजमार्गNH-119D
🏗️ प्रकारचार लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड मार्ग
📏 नवीनतम मीडिया लंबाईकरीब 189 किलोमीटर
📑 लोकसभा में दर्ज लंबाईकरीब 198 किलोमीटर
🚧 कुल पैकेजचार
📈 कुल वर्तमान प्रगतिकरीब 30 प्रतिशत
🥇 सबसे अधिक प्रगतिपैकेज-4, करीब 34 प्रतिशत
📉 सबसे कम प्रगतिपैकेज-3, करीब 24 प्रतिशत
🗓️ निर्माण शुरुआतमार्च 2023
⏳ मूल अनुबंध अवधि24 महीने
🎯 नया लक्ष्यदिसंबर 2026
🏢 निर्माण प्राधिकरणNHAI
🤝 निर्माण मॉडलहाइब्रिड एन्युटी मॉडल
🌉 महत्वपूर्ण संपर्ककच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन पुल
🛫 प्रमुख लाभदरभंगा एयरपोर्ट से बेहतर सड़क संपर्क
🌾 आर्थिक प्रभावकृषि, व्यापार और माल परिवहन को बढ़ावा
⚠️ प्रमुख चुनौतीजमीन, निर्माण गति और संरचनाओं का समन्वय
🚘 यातायात शुरू होने की निश्चित तारीखअभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं

🔍 DarbhangaNews.in Analysis

पैकेज-4 की 34 प्रतिशत प्रगति दरभंगा और समस्तीपुर के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन पूरी परियोजना का करीब 70 प्रतिशत काम अभी बाकी है। दिसंबर 2026 का लक्ष्य हासिल करने के लिए जमीन, पुल और कैरिजवे के काम में असाधारण तेजी लानी होगी।

NHAI को हर महीने पैकेजवार प्रगति और शेष बाधाओं की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। लंबाई, लागत और प्रभावित जिलों को लेकर अलग-अलग सरकारी तथा मीडिया आंकड़ों को भी नवीनतम तकनीकी दस्तावेज के माध्यम से स्पष्ट किया जाना चाहिए।

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