📍 झंझारपुर अनुमंडलीय अस्पताल, मधुबनी, बिहार | DarbhangaNews.in
मधुबनी जिले के झंझारपुर अनुमंडलीय अस्पताल में बारिश के बाद जलजमाव की स्थिति गंभीर हो गई है। अस्पताल परिसर से लेकर इमरजेंसी भवन तक डेढ़ से दो फीट बदबूदार पानी जमा है। मरीजों, उनके परिजनों, चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को इसी गंदे पानी से होकर आना-जाना पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि पानी अस्पताल के बरामदे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इमरजेंसी वार्ड, प्रसव कक्ष, ऑपरेशन थिएटर और महिला वार्ड के भीतर भी प्रवेश कर गया है।
बारिश के बीच अस्पताल का आपातकालीन भवन किसी टापू जैसा दिखाई देने लगा है। भर्ती मरीज और उनके परिजन गंदे पानी तथा दुर्गंध के बीच रात बिताने को मजबूर हैं। अस्पताल प्रबंधन ने स्थिति की गंभीरता की लिखित सूचना जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजी है। अस्पताल प्रबंधक गिरीश कुमार झा के अनुसार जलजमाव के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप होने के कगार पर पहुंच गई हैं।
यह समस्या अचानक पैदा नहीं हुई है। झंझारपुर अनुमंडलीय अस्पताल में वर्ष 2024, 2025 और 2026 के दौरान भी बारिश के बाद परिसर, इमरजेंसी तथा ऑपरेशन थिएटर में पानी भरने की खबरें सामने आती रही हैं। इसके बावजूद स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था नहीं बन पाना प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
📌 मुख्य बातें
✅ अस्पताल परिसर में डेढ़ से दो फीट तक गंदा पानी जमा
✅ इमरजेंसी वार्ड और ऑपरेशन थिएटर के भीतर घुसा पानी
✅ प्रसव कक्ष, महिला वार्ड और बरामदा भी प्रभावित
✅ चिकित्सकों और नर्सिंग कर्मचारियों के कक्षों में जलजमाव
✅ मरीज और परिजन बदबूदार पानी से होकर आने-जाने को मजबूर
✅ स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने के कगार पर पहुंचने की जानकारी
✅ सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल सहायता मांगी गई
✅ जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों को लिखित सूचना भेजी गई
✅ कई वर्षों से बार-बार सामने आ रही जलनिकासी की समस्या
🏥 इमरजेंसी भवन तक पहुंचना हुआ मुश्किल
अस्पताल के आपातकालीन भवन के चारों ओर पानी जमा होने से गंभीर मरीजों को भीतर पहुंचाना कठिन हो गया है। एंबुलेंस या वाहन से लाए गए मरीजों को भी मुख्य प्रवेश मार्ग से वार्ड तक पहुंचने के लिए जलजमाव का सामना करना पड़ रहा है।
हल्की बारिश में भी परिसर में पानी जमा हो जाने के कारण मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर से सुरक्षित ले जाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। पानी की गहराई और फिसलन के बीच बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों तथा चलने में असमर्थ मरीजों के गिरने का खतरा बना रहता है।
अस्पताल में आने वाले लोगों का कहना है कि इलाज कराने से पहले उन्हें जलजमाव की बाधा पार करनी पड़ती है। सार्वजनिक अस्पताल में आपातकालीन सेवा तक सुरक्षित रास्ता उपलब्ध न होना सामान्य असुविधा नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है।
🚑 इमरजेंसी वार्ड में भी भरा बारिश और नाले का पानी
रिपोर्ट के अनुसार बारिश और नाले का पानी इमरजेंसी वार्ड, बरामदे तथा वार्डों को जोड़ने वाले रास्ते में भर गया है। इससे चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए मरीजों तक पहुंचना तथा आवश्यक उपकरण और दवाएं सुरक्षित रखना कठिन हो गया है।
इमरजेंसी सेवा अस्पताल की सबसे संवेदनशील इकाई होती है। दुर्घटना, हृदय रोग, सांस की तकलीफ, तेज बुखार या दूसरे गंभीर मामलों में मरीजों को तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है। ऐसे में वार्ड के भीतर पानी भरना सेवा की गति और मरीजों की सुरक्षा दोनों को प्रभावित कर सकता है।
खबर लिखे जाने तक किसी गंभीर मरीज का उपचार जलजमाव के कारण पूरी तरह रोक दिए जाने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी अस्पताल प्रबंधन का यह कहना कि सेवाएं ठप होने के कगार पर हैं, स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करता है।
🩺 ऑपरेशन थिएटर तक पहुंचा गंदा पानी
अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में भी पानी प्रवेश करने की जानकारी सामने आई है। ऑपरेशन थिएटर में स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। वहां नाले या बारिश का दूषित पानी पहुंचना उपकरणों, फर्श और चिकित्सा वातावरण की सुरक्षा पर सवाल उठाता है।
इस स्थिति में किसी नियोजित शल्यक्रिया को रोका या दूसरे स्थान पर भेजा गया या नहीं, इसका आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य विभाग को पानी निकलने के बाद केवल सामान्य सफाई पर निर्भर रहने के बजाय पूरे ऑपरेशन थिएटर का संक्रमण नियंत्रण परीक्षण और उचित कीटाणुशोधन कराना चाहिए।
झंझारपुर अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर तक पानी पहुंचने की समस्या पहले भी सामने आ चुकी है। अक्टूबर 2025 की एक रिपोर्ट में लगातार बारिश के बाद अस्पताल परिसर और ऑपरेशन थिएटर में पानी भरने तथा जलनिकासी व्यवस्था ठीक नहीं किए जाने का उल्लेख था।
🤰 प्रसव कक्ष और महिला वार्ड की हालत चिंताजनक
बारिश का पानी प्रसव कक्ष और महिला वार्ड में भी घुस गया है। भर्ती महिलाओं और उनके परिजनों को गंदे पानी तथा दुर्गंध के बीच रात बितानी पड़ी। इससे गर्भवती महिलाओं, प्रसूताओं और नवजात बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
जुलाई 2026 में भी इसी अस्पताल के प्रसव कक्ष और महिला वार्ड में पानी प्रवेश करने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस समय प्रसूताओं के रातभर जागने और मरीजों को जलजमाव के बीच रहने की जानकारी दी गई थी। इससे स्पष्ट होता है कि वर्तमान संकट पहली बार सामने नहीं आया है।
स्वास्थ्य विभाग को महिला वार्ड और प्रसव कक्ष में पानी से प्रभावित बिस्तरों, दीवारों, फर्श और चिकित्सा सामग्री की जांच करानी चाहिए। संक्रमण की आशंका वाले हिस्सों को पूरी सफाई और कीटाणुशोधन के बाद ही दोबारा उपयोग में लाया जाना चाहिए।
🦠 संक्रमण और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा
अस्पताल परिसर में जमा बदबूदार पानी मरीजों के लिए अतिरिक्त स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। नाले का पानी बारिश के पानी में मिलने पर उसमें गंदगी, कीटाणु और अन्य दूषित पदार्थ मौजूद हो सकते हैं।
खुले जलजमाव में मच्छरों का प्रजनन बढ़ने की आशंका भी रहती है। अस्पताल में पहले से बीमार, बुजुर्ग, गर्भवती और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीज आते हैं। इसलिए यहां जलजमाव सामान्य सड़क या खाली मैदान में पानी भरने से कहीं अधिक गंभीर है।
पानी निकालने के बाद परिसर में चूना, सुरक्षित कीटाणुनाशक और मच्छर नियंत्रण की व्यवस्था करनी होगी। प्रभावित वार्डों में बिजली के तारों, उपकरणों और दीवारों की नमी की भी तकनीकी जांच आवश्यक है।
📢 सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग से मांगी गई मदद
अस्पताल प्रबंधन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग को तत्काल सहायता का संदेश भेजा है। जिला प्रशासन तथा उच्च अधिकारियों को भी लिखित रूप से पूरे मामले की सूचना दी गई है।
हालांकि खबर प्रकाशित होने तक जलनिकासी के लिए बड़ी मशीन, अतिरिक्त पंप या विशेष सफाई दल भेजे जाने की पुष्टि नहीं हुई थी। यह भी स्पष्ट नहीं है कि प्रभावित सेवाओं को अस्थायी रूप से किसी दूसरे भवन में स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है या नहीं।
प्रशासन को तत्काल राहत के साथ यह सार्वजनिक करना चाहिए कि अस्पताल में सामान्य सेवा कब तक बहाल होगी और मरीजों के लिए कौन-सा सुरक्षित प्रवेश मार्ग निर्धारित किया गया है।
🔁 हर बारिश में दोहराई जा रही वही परेशानी
झंझारपुर अनुमंडलीय अस्पताल में जलजमाव का इतिहास बताता है कि समस्या केवल इस बार की भारी बारिश का परिणाम नहीं है। अगस्त 2024 में भी अस्पताल परिसर में पानी भरने की खबर सामने आई थी। जुलाई और अक्टूबर 2025 में भी मरीजों, कर्मचारियों तथा ऑपरेशन थिएटर के प्रभावित होने की जानकारी दी गई थी। वर्ष 2026 में मई और जुलाई के दौरान भी जलजमाव की समस्या दोहराई गई।
पूर्व की एक रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन ने बंद नालों और निकासी मार्गों को समस्या का कारण बताया था। दूसरी रिपोर्ट में पुराने भवन और लगातार जलजमाव से इमरजेंसी वार्ड की खराब होती स्थिति का उल्लेख किया गया था।
बार-बार पानी निकालना केवल अस्थायी उपाय है। जब तक परिसर की ऊंचाई, नाले का स्तर, पानी के प्राकृतिक बहाव और निकासी मार्ग की तकनीकी जांच नहीं होगी, प्रत्येक बारिश में यही संकट लौट सकता है।
🛠️ स्थायी जलनिकासी योजना की जरूरत
अस्पताल के लिए ऐसी योजना बनानी होगी जिसमें परिसर के भीतर का पानी नाले तक पहुंच सके और बाहर के नाले का पानी उल्टा अस्पताल में प्रवेश न करे। इसके लिए नाले की सफाई, ढाल में सुधार, पंप, जल संग्रह क्षेत्र और निकासी मार्ग की संयुक्त तकनीकी समीक्षा आवश्यक हो सकती है।
अस्पताल, नगर निकाय, स्वास्थ्य विभाग और भवन निर्माण से जुड़े अधिकारियों को संयुक्त सर्वेक्षण कर जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। यदि समस्या आसपास के नाले या सड़क की ऊंचाई से जुड़ी है तो केवल अस्पताल प्रशासन इसे अपने स्तर पर हल नहीं कर सकता।
स्थायी समाधान पूरा होने तक मानसून अवधि में उच्च क्षमता वाले पंप, वैकल्पिक प्रवेश मार्ग और चौबीस घंटे उपलब्ध आपदा दल की व्यवस्था जरूरी है।
📊 जरूरी जानकारी एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अस्पताल | झंझारपुर अनुमंडलीय अस्पताल |
| जिला | मधुबनी |
| समस्या | गंभीर जलजमाव |
| पानी की अनुमानित गहराई | डेढ़ से दो फीट |
| प्रभावित स्थान | इमरजेंसी, बरामदा, रास्ता और कर्मचारी कक्ष |
| संवेदनशील इकाइयां | ऑपरेशन थिएटर और प्रसव कक्ष |
| अन्य प्रभावित हिस्सा | महिला वार्ड |
| मरीजों की स्थिति | गंदे पानी से होकर आवाजाही |
| अधिकारी का बयान | अस्पताल प्रबंधक गिरीश कुमार झा |
| प्रशासनिक कदम | जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को लिखित सूचना |
| सेवाओं की स्थिति | ठप होने के कगार पर बताई गई |
| समस्या की प्रकृति | कई वर्षों से बार-बार होने वाला जलजमाव |
| आवश्यक समाधान | स्थायी जलनिकासी व्यवस्था |
🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण
झंझारपुर अनुमंडलीय अस्पताल का जलजमाव केवल रखरखाव की छोटी कमी नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता है। जिस अस्पताल में बीमारी और संक्रमण का उपचार होना चाहिए, उसी के इमरजेंसी वार्ड, प्रसव कक्ष और ऑपरेशन थिएटर में नाले का पानी प्रवेश करना स्वीकार्य स्थिति नहीं हो सकती।
पिछले वर्षों की रिपोर्टें बताती हैं कि समस्या प्रशासन को पहले से मालूम थी। इसके बाद भी स्थायी जलनिकासी नहीं बनना बताता है कि हर बारिश के बाद पानी निकालने को ही समाधान मान लिया गया। इस बार भी केवल पंप लगाकर पानी हटा दिया गया तो अगली बारिश में स्थिति फिर दोहराए जाने की आशंका रहेगी।
जिला प्रशासन को तकनीकी सर्वेक्षण, जिम्मेदार विभाग, स्वीकृत राशि और निर्माण की समय सीमा सार्वजनिक करनी चाहिए। प्रभावित मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था तथा वार्डों का संक्रमण नियंत्रण भी तत्काल आवश्यक है।
अस्पताल कोई ऐसा स्थान नहीं हो सकता जहां मरीज इलाज से पहले गंदे पानी, दुर्गंध और संक्रमण का खतरा पार करने को मजबूर हों। स्थायी जलनिकासी व्यवस्था को सामान्य निर्माण कार्य नहीं, बल्कि आपात सार्वजनिक स्वास्थ्य आवश्यकता के रूप में लिया जाना चाहिए।








