बिरौल के खोठी स्वास्थ्य केंद्र में लटका मिला ताला, ANM और CHO की अनुपस्थिति से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा पर सवाल

बिरौल के खोठी स्वास्थ्य केंद्र में लटका मिला ताला, ANM और CHO की अनुपस्थिति से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा पर सवाल
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📍 खोठी, बिरौल प्रखंड, दरभंगा | DarbhangaNews.in

दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड के खोठी स्वास्थ्य केंद्र से ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाली खबर सामने आई है। दैनिक भास्कर के साझा लिंक/शीर्षक के अनुसार खोठी स्वास्थ्य केंद्र बंद मिला और इस मामले में ANM तथा CHO की कार्यशैली पर लापरवाही के आरोप लगे हैं। स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लटका मिलने से स्थानीय लोगों को इलाज, जांच और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूसरे केंद्रों या निजी क्लीनिकों पर निर्भर होना पड़ सकता है।

बिरौल जैसे ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य उपकेंद्र या हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर आम लोगों के लिए पहली चिकित्सा सुविधा होते हैं। बुखार, सर्दी-खांसी, प्राथमिक दवा, गर्भवती महिलाओं की जांच, बच्चों का टीकाकरण, रक्तचाप-मधुमेह जांच और स्वास्थ्य परामर्श जैसी सेवाओं के लिए ग्रामीण परिवार ऐसे केंद्रों पर ही भरोसा करते हैं। ऐसे में यदि केंद्र बंद मिले या कर्मी उपलब्ध नहीं रहें, तो यह केवल एक दिन की असुविधा नहीं, बल्कि पूरे इलाके की स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा मामला बन जाता है।

दरभंगा जिला प्रशासन की आधिकारिक स्वास्थ्य जानकारी के अनुसार जिले में 261 स्वास्थ्य उपकेंद्र, 37 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 13 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसी सूची में बिरौल प्रखंड में 21 स्वास्थ्य उपकेंद्र, 2 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 1 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दर्ज है। इससे साफ है कि बिरौल में ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सेवा का बड़ा नेटवर्क कागज पर मौजूद है, लेकिन असली चुनौती इसका नियमित संचालन है।

📌 मुख्य बातें

✅ मामला दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड के खोठी स्वास्थ्य केंद्र का
✅ स्वास्थ्य केंद्र बंद मिलने से ग्रामीणों में नाराजगी
✅ ANM और CHO की कथित लापरवाही पर सवाल
✅ मरीजों को प्राथमिक इलाज के लिए दूसरे केंद्रों पर जाना पड़ सकता है
✅ गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और गरीब परिवारों पर ज्यादा असर
✅ बिरौल प्रखंड में 21 स्वास्थ्य उपकेंद्र दर्ज हैं
✅ आयुष्मान आरोग्य मंदिर/स्वास्थ्य केंद्रों से 12 तरह की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं अपेक्षित
✅ बिरौल क्षेत्र में पहले भी स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों को लेकर सवाल उठ चुके हैं
✅ स्वास्थ्य विभाग से नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय करने की मांग

🏥 खोठी स्वास्थ्य केंद्र बंद मिला, ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी

खोठी स्वास्थ्य केंद्र के बंद मिलने की खबर इसलिए गंभीर है क्योंकि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों का उद्देश्य लोगों को उनके घर के नजदीक उपचार उपलब्ध कराना है। गांवों में हर व्यक्ति तुरंत अनुमंडलीय अस्पताल, डीएमसीएच या निजी अस्पताल नहीं पहुंच सकता। कई परिवारों के लिए नजदीकी सरकारी केंद्र ही पहली उम्मीद होता है।

यदि स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लगा मिले, तो मरीज को या तो वापस लौटना पड़ता है या अतिरिक्त खर्च कर दूर जाना पड़ता है। छोटी बीमारी समय पर नहीं देखी जाए तो वह बड़ी परेशानी बन सकती है। खासकर बारिश के मौसम में बुखार, दस्त, त्वचा रोग, सर्पदंश, संक्रमण और बच्चों की मौसमी बीमारी जैसी समस्याएं बढ़ती हैं। ऐसे समय में गांव के स्वास्थ्य केंद्र का नियमित खुलना बहुत जरूरी है।

👩‍⚕️ ANM और CHO की भूमिका क्यों अहम?

ANM यानी सहायक नर्स दाई और CHO यानी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ANM का काम मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, गर्भवती महिलाओं की देखभाल, परिवार कल्याण और सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा होता है। वहीं CHO को स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्र स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य टीम का नेतृत्व करने वाली भूमिका दी जाती है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इन केंद्रों का उद्देश्य केवल सीमित उपचार नहीं, बल्कि नजदीक में व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा देना है। इसमें मातृ स्वास्थ्य, टीकाकरण, टेली-परामर्श, स्वास्थ्य जागरूकता, दवा वितरण, सामान्य रोगों की देखभाल, गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग और बुजुर्गों की देखभाल जैसी सेवाएं शामिल हैं।

इसी वजह से जब किसी केंद्र पर ANM या CHO अनुपस्थित मिलते हैं, तो इसका असर केवल रजिस्टर या उपस्थिति तक सीमित नहीं रहता। इससे सीधे लाभार्थियों की सेवा प्रभावित होती है।

🤰 गर्भवती महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कत

ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की सबसे बड़ी जरूरत गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए होती है। गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, वजन, रक्तचाप, आयरन-कैल्शियम दवा, टीकाकरण और परामर्श बहुत जरूरी है। अगर केंद्र बंद रहे तो गर्भवती महिलाओं को दूसरे गांव या प्रखंड मुख्यालय तक जाना पड़ सकता है।

बच्चों के मामले में भी टीकाकरण, वजन निगरानी और सामान्य बीमारी की प्राथमिक जांच समय पर होना जरूरी है। ग्रामीण इलाकों में इलाज में एक-दो दिन की देरी भी परिवारों के लिए चिंता बढ़ा सकती है।

📍 बिरौल में स्वास्थ्य व्यवस्था पहले भी सवालों में रही

बिरौल क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। दिसंबर 2025 में लाइव हिन्दुस्तान की एक रिपोर्ट में बिरौल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को लेकर यह आरोप सामने आया था कि 30 शैया वाला भवन होने के बावजूद मरीजों का इलाज प्रभावी रूप से नहीं हो रहा और कई चिकित्सकों को दूसरे अस्पतालों में प्रतिनियुक्त किया गया है। उसी रिपोर्ट में स्थानीय लोगों ने सीएचसी में राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रभावित होने और स्वास्थ्य कर्मियों की मनमानी जैसे आरोप लगाए थे।

इसके अलावा जुलाई 2026 में बिरौल क्षेत्र में एक निजी अस्पताल को बिना वैध पंजीकरण चलने के आरोप में सील किया गया था। लाइव हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार खोरागाछी के पास चल रहे जेपी अस्पताल से जांच टीम ने पंजीकरण संबंधी कागज मांगा, लेकिन अस्पताल प्रबंधन वैध दस्तावेज नहीं दिखा सका, जिसके बाद अधिकारियों ने उसे सील करने का आदेश दिया।

इन दोनों संदर्भों से साफ है कि बिरौल अनुमंडल क्षेत्र में सरकारी और निजी, दोनों स्तरों पर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी मजबूत करने की जरूरत है।

🚨 सरकारी केंद्र बंद होंगे तो निजी इलाज पर निर्भरता बढ़ेगी

जब सरकारी स्वास्थ्य केंद्र नियमित नहीं खुलते, तो ग्रामीण मरीज मजबूरी में निजी क्लीनिकों और गैर-पंजीकृत अस्पतालों की ओर जाते हैं। कई बार वहां खर्च ज्यादा होता है और इलाज की गुणवत्ता को लेकर भी खतरा रहता है। बिरौल में बिना मान्यता अस्पताल सील होने का हालिया मामला इस खतरे को और स्पष्ट करता है।

यदि खोठी जैसे केंद्र नियमित रूप से खुलें, तो सामान्य बीमारी, प्राथमिक जांच और जरूरी दवाओं के लिए लोगों को निजी व्यवस्था पर निर्भर नहीं होना पड़ेगा। इससे गरीब परिवारों का खर्च कम होगा और समय पर इलाज भी मिल सकेगा।

🏛️ स्वास्थ्य विभाग को किन बातों की जांच करनी चाहिए?

इस मामले में स्वास्थ्य विभाग को सबसे पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिस दिन केंद्र बंद मिला, उस दिन ANM और CHO की आधिकारिक ड्यूटी कहां थी। यदि वे किसी टीकाकरण अभियान, बैठक, क्षेत्र भ्रमण या सरकारी कार्य में गए थे, तो केंद्र पर वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं थी।

केंद्र के बाहर ड्यूटी रोस्टर, खुलने का समय, उपलब्ध सेवाएं, जिम्मेदार कर्मियों का नाम और शिकायत संपर्क नंबर स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए। इससे ग्रामीणों को पता रहेगा कि सेवा कब मिलेगी और केंद्र बंद मिलने पर शिकायत कहां करनी है।

📊 जरूरी जानकारी एक नजर में

विवरणजानकारी
📍 स्थानखोठी, बिरौल प्रखंड
जिलादरभंगा
मामलास्वास्थ्य केंद्र बंद मिलने का आरोप
सवालANM और CHO की कथित लापरवाही
प्रभावित लोगग्रामीण मरीज, गर्भवती महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग
बिरौल स्वास्थ्य ढांचा21 स्वास्थ्य उपकेंद्र, 2 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 1 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
जरूरी सेवाएंटीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, प्राथमिक दवा, सामान्य जांच
स्थानीय चिंताकेंद्र बंद रहने से निजी इलाज पर निर्भरता
मांगनियमित निरीक्षण, ड्यूटी रोस्टर और जवाबदेही

🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण

बिरौल के खोठी स्वास्थ्य केंद्र का बंद मिलना ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीन पर मौजूद कमजोरी को दिखाता है। सरकार गांवों तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचाने के लिए स्वास्थ्य उपकेंद्रों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को मजबूत करने की बात करती है, लेकिन यदि केंद्र पर ताला लटका रहे तो योजनाओं का लाभ कागज से बाहर नहीं आ पाता।

यह मामला केवल ANM या CHO की अनुपस्थिति का नहीं है। यह निगरानी व्यवस्था, वैकल्पिक ड्यूटी, केंद्र संचालन, दवा उपलब्धता और स्थानीय जवाबदेही का भी सवाल है। अगर कर्मी किसी सरकारी कार्य से बाहर हैं, तो मरीजों के लिए केंद्र पर कोई व्यवस्था होनी चाहिए। यदि बिना कारण अनुपस्थिति है, तो विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।

बिरौल क्षेत्र में सरकारी केंद्रों की कमजोरी और बिना मान्यता निजी अस्पतालों की मौजूदगी, दोनों मिलकर ग्रामीण मरीजों को जोखिम में डालते हैं। जिला स्वास्थ्य विभाग को खोठी केंद्र की जांच के साथ-साथ बिरौल प्रखंड के सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों की उपस्थिति, दवा, सेवाएं और रोस्टर की समीक्षा करनी चाहिए।

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