📍 रैयाम, दरभंगा / सकरी, मधुबनी | DarbhangaNews.in
मिथिला के लंबे समय से बंद पड़े औद्योगिक सपनों को फिर से गति मिलने की उम्मीद जगी है। बिहार के चीनी उद्योग मंत्री संजय कुमार ने पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 नवंबर 2026 को मधुबनी जिले के सकरी चीनी मिल और दरभंगा जिले के रैयाम चीनी मिल का शिलान्यास करेंगे। मंत्री के अनुसार दोनों प्रस्तावित मिलों का संचालन राज्य के सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जाएगा।
यह घोषणा दरभंगा, मधुबनी और पूरे मिथिलांचल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रैयाम और सकरी कभी स्थानीय रोजगार, गन्ना किसानों और छोटे कारोबारियों की आर्थिक गतिविधि से जुड़े बड़े नाम थे। मिलों के बंद होने के बाद क्षेत्र के किसानों को गन्ना खेती से दूरी बनानी पड़ी और युवाओं के लिए स्थानीय रोजगार के अवसर भी कम हुए। अब राज्य सरकार इन्हीं बंद मिल परिसरों पर नई सहकारी चीनी मिल और गन्ना-आधारित उद्योग लगाने की तैयारी में है। बिहार कैबिनेट ने दरभंगा और मधुबनी में नई सहकारी चीनी मिलों और गन्ना उप-उत्पाद आधारित उद्योगों के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
हालांकि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कार्यक्रम की अंतिम आधिकारिक सूचना जारी होने तक 20 नवंबर की तारीख को मंत्री के बयान और विभागीय तैयारी के आधार पर प्रस्तावित कार्यक्रम माना जाना चाहिए।
📌 मुख्य बातें
✅ दरभंगा के रैयाम और मधुबनी के सकरी में सहकारी चीनी मिलों की स्थापना की तैयारी
✅ चीनी उद्योग मंत्री संजय कुमार के अनुसार 20 नवंबर 2026 को शिलान्यास संभावित
✅ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों शिलान्यास की बात कही गई
✅ दोनों मिलों का संचालन सहकारिता विभाग के माध्यम से प्रस्तावित
✅ बिहार सरकार अगले पांच वर्षों में 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य रख रही है
✅ बंद चीनी मिलों को फिर से औद्योगिक गतिविधि से जोड़ने की योजना
✅ रैयाम मिल के लिए डीपीआर सहकारिता विभाग को सौंपे जाने की जानकारी
✅ गन्ना किसानों की सहकारी समितियां बनाने की प्रक्रिया तेज
✅ भविष्य की मिलों को चीनी, इथेनॉल, बिजली और बायोगैस वाले आधुनिक परिसर के रूप में विकसित करने की योजना
✅ मिथिला के किसानों, मजदूरों, परिवहन कारोबार और युवाओं को लाभ की उम्मीद
🏭 रैयाम और सकरी मिलों पर सरकार की बड़ी तैयारी
रैयाम चीनी मिल दरभंगा जिले और सकरी चीनी मिल मधुबनी जिले की पुरानी औद्योगिक पहचान से जुड़ी रही है। लंबे समय से बंद पड़े इन परिसरों को फिर से औद्योगिक उपयोग में लाने की मांग स्थानीय स्तर पर लगातार उठती रही है। अब राज्य सरकार की योजना है कि इन्हें सहकारी मॉडल पर नए रूप में विकसित किया जाए।
पटना प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बिहार कैबिनेट ने रैयाम और सकरी में बंद चीनी मिल स्थलों पर नई सहकारी चीनी मिलों और गन्ना उप-उत्पाद आधारित उद्योगों की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य गन्ना किसानों के लिए अवसर बनाना, रोजगार बढ़ाना और मिथिलांचल में औद्योगिक गतिविधि को मजबूत करना है।
🌾 किसानों की सहकारी समितियां बनेंगी
रैयाम और सकरी मिलों को सफल बनाने के लिए सबसे बड़ी जरूरत पर्याप्त गन्ना आपूर्ति की होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए गन्ना किसानों की सहकारी समितियां बनाने की तैयारी शुरू की गई है। चिनीमंडी की रिपोर्ट के अनुसार बिहार सरकार ने रैयाम और सकरी में प्रस्तावित सहकारी चीनी मिलों की स्थापना की प्रक्रिया तेज करने का फैसला किया है और गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए गन्ना उत्पादक किसानों की सहकारी समितियां बनाई जाएंगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज ने रैयाम चीनी मिल की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर सहकारिता विभाग को सौंप दी है। डीपीआर के आधार पर आगे परियोजना की राशि और कार्य योजना तय की जाएगी।
🚜 गन्ना खेती को फिर से बढ़ावा मिलने की उम्मीद
दरभंगा और मधुबनी के कई हिस्सों में पहले गन्ना खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा थी। लेकिन नजदीकी मिलों के बंद होने के बाद किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या बाजार और भुगतान की रही। अगर रैयाम और सकरी में मिलें फिर से चालू होती हैं, तो किसानों को स्थानीय स्तर पर गन्ना बेचने का विकल्प मिल सकता है।
चीनी उद्योग विभाग की ओर से गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए कई योजनाओं का उल्लेख किया गया है। यूएनआई की रिपोर्ट के अनुसार किसानों को 45 प्रकार के आधुनिक कृषि उपकरण अनुदान दर पर उपलब्ध कराने, गन्ना खेती विस्तार अभियान चलाने और मुख्यमंत्री गन्ना बीज विकास योजना, गन्ना यंत्रीकरण योजना तथा गन्ना नर्सरी योजना जैसी पहलें आगे बढ़ाई जा रही हैं।
👷 रोजगार और स्थानीय कारोबार को मिल सकता है फायदा
चीनी मिल केवल गन्ना पेराई का केंद्र नहीं होती, बल्कि उसके आसपास कई तरह के रोजगार बनते हैं। किसान, मजदूर, वाहन चालक, ट्रांसपोर्टर, मिस्त्री, वेल्डर, मशीन ऑपरेटर, छोटे दुकानदार, होटल-ढाबा, किराना और मरम्मत दुकान जैसे स्थानीय कारोबार भी मिल संचालन से जुड़े रहते हैं।
मंत्री संजय कुमार ने कहा है कि चीनी उद्योग के विस्तार से रोजगार के अवसर बनेंगे और गन्ना किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। प्रस्तावित नई मिलों को उत्पादन शुरू करने में स्थापना के बाद करीब एक से दो वर्ष लग सकते हैं।
⚙️ आधुनिक चीनी मिल नहीं, एकीकृत चीनी परिसर की योजना
सरकार अब पुराने ढंग की चीनी मिल के बजाय आधुनिक एकीकृत चीनी परिसर की बात कर रही है। चीनी उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह के अनुसार भविष्य की चीनी मिलें केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उनमें इथेनॉल, बिजली और बायोगैस उत्पादन जैसी सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।
यह मॉडल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गन्ने से चीनी के अलावा शीरा, खोई और अन्य उप-उत्पाद निकलते हैं। इनसे इथेनॉल, बिजली और जैव ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है। यदि रैयाम और सकरी में ऐसे परिसर बनते हैं, तो परियोजना का आर्थिक असर केवल गन्ना किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा, परिवहन और सहायक उद्योगों तक फैल सकता है।
🏛️ बिहार में 25 नई मिलों का लक्ष्य
बिहार सरकार ने अगले पांच वर्षों में 25 नई चीनी मिलों की स्थापना का लक्ष्य रखा है। साथ ही राज्य के बंद पड़े चीनी मिलों को फिर से चालू करने या नए औद्योगिक उपयोग में लाने की योजना पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जून 2026 में अधिकारियों को नौ बंद चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने और 25 नई इकाइयां स्थापित करने की व्यापक कार्य योजना तैयार करने को कहा था। उस सूची में रैयाम और सकरी के नाम भी शामिल थे।
बिहार की चीनी उद्योग निवेश प्रोत्साहन नीति 2026 के तहत नए निवेशकों को आकर्षित करने की भी कोशिश है। राज्य के चीनी उद्योग विभाग की वेबसाइट पर नए चीनी मिलों के लिए केंद्रीय उत्पाद शुल्क की प्रतिपूर्ति, गन्ना क्रय कर में छूट, भूमि खरीद पर स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क में छूट तथा प्लांट-मशीनरी पर पूंजी निवेश अनुदान जैसी प्रोत्साहन जानकारी दी गई है।
💰 गन्ना किसानों के भुगतान का मुद्दा भी अहम
किसानों के लिए मिल खुलना तभी लाभदायक होगा, जब गन्ना खरीद और भुगतान व्यवस्था समय पर चले। चीनी उद्योग मंत्री के अनुसार बिहार की चीनी मिलों ने 2025-26 पेराई सत्र में किसानों को ₹2,137.83 करोड़ का गन्ना बकाया पूरा भुगतान किया है।
केंद्र सरकार ने 2026-27 चीनी सत्र के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25% मूल रिकवरी दर पर लागू होगा। पीआईबी के अनुसार यह निर्णय 2026-27 सीजन में चीनी मिलों द्वारा गन्ना खरीद पर लागू होगा।
📍 दरभंगा-मधुबनी के लिए क्यों बड़ी खबर?
रैयाम और सकरी मिलों का मामला केवल दो औद्योगिक परियोजनाओं का नहीं है। यह मिथिला में बंद पड़े उद्योगों को दोबारा खड़ा करने की उम्मीद से जुड़ा है। दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और आसपास के जिलों में कृषि आधारित उद्योगों की कमी लंबे समय से महसूस की जाती रही है।
यदि रैयाम और सकरी की मिलें तय समय पर बनती हैं, तो गन्ना खेती को फिर से स्थानीय बाजार मिल सकता है। इससे किसानों को दूर के मिल क्षेत्रों पर निर्भरता कम करनी पड़ सकती है। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और छोटे कारोबारियों के लिए नई आर्थिक गतिविधि भी शुरू हो सकती है।
⚠️ अभी किन बातों पर नजर रहेगी?
सबसे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय या संबंधित विभाग की आधिकारिक कार्यक्रम सूचना का इंतजार रहेगा। इसके बाद परियोजना लागत, भूमि, निर्माण एजेंसी, समयसीमा, क्षमता, गन्ना आरक्षित क्षेत्र, किसान समिति पंजीकरण और भुगतान व्यवस्था जैसी जानकारियां स्पष्ट होनी चाहिए।
दूसरा बड़ा सवाल यह होगा कि ये मिलें वास्तव में कब तक उत्पादन शुरू करेंगी। मंत्री के बयान के अनुसार नई मिलों को स्थापना के बाद उत्पादन शुरू करने में एक से दो वर्ष लग सकते हैं। इसलिए शिलान्यास के बाद काम की नियमित निगरानी बहुत जरूरी होगी।
📊 जरूरी जानकारी एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| प्रस्तावित परियोजना | रैयाम और सकरी सहकारी चीनी मिल |
| स्थान | रैयाम, दरभंगा और सकरी, मधुबनी |
| संभावित शिलान्यास | 20 नवंबर 2026 |
| शिलान्यास | पीएम मोदी के हाथों होने की बात चीनी उद्योग मंत्री ने कही |
| संचालन मॉडल | सहकारिता विभाग के माध्यम से प्रस्तावित |
| राज्य लक्ष्य | अगले पांच वर्षों में 25 नई चीनी मिलें |
| स्थानीय लाभार्थी | गन्ना किसान, मजदूर, युवा, छोटे कारोबारी |
| किसान तैयारी | गन्ना उत्पादक सहकारी समितियां बनेंगी |
| रैयाम स्थिति | डीपीआर सहकारिता विभाग को सौंपे जाने की जानकारी |
| आधुनिक योजना | चीनी, इथेनॉल, बिजली और बायोगैस वाला एकीकृत परिसर |
| उत्पादन समय | स्थापना के बाद करीब 1–2 वर्ष लग सकते हैं |
| आधिकारिक सावधानी | पीएमओ की अंतिम कार्यक्रम सूचना अभी प्रतीक्षित |
🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण
रैयाम और सकरी चीनी मिलों का शिलान्यास यदि 20 नवंबर को होता है, तो यह मिथिला के औद्योगिक इतिहास में बड़ा मोड़ हो सकता है। दरभंगा और मधुबनी की अर्थव्यवस्था लंबे समय से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, छोटे व्यापार और प्रवासी आय पर अधिक निर्भर रही है। कृषि आधारित उद्योगों की कमी के कारण स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए बाहर जाना पड़ता है।
चीनी मिलों की वापसी से गन्ना किसानों को स्थानीय बाजार, मजदूरों को काम और छोटे कारोबारियों को नई गतिविधि मिल सकती है। लेकिन इस परियोजना की सफलता केवल शिलान्यास से तय नहीं होगी। असली परीक्षा भूमि, पूंजी, मशीनरी, गन्ना आपूर्ति, सहकारी प्रबंधन और समय पर भुगतान व्यवस्था में होगी।
सहकारी मॉडल तभी सफल होगा, जब किसानों की भागीदारी वास्तविक हो और मिल संचालन राजनीतिक हस्तक्षेप या कमजोर प्रबंधन में न फंसे। रैयाम और सकरी के पुराने अनुभवों से सीख लेकर पारदर्शी प्रबंधन, आधुनिक तकनीक, ऑनलाइन भुगतान और गन्ना सर्वे व्यवस्था शुरू करनी होगी।
दरभंगा-मधुबनी के लिए यह परियोजना उम्मीद की खबर है, लेकिन जनता को तारीखों और वादों के साथ-साथ जमीन पर काम की प्रगति पर भी नजर रखनी चाहिए।








