Darbhanga News: 30 साल बाद फिर जगी उम्मीद! रैयाम-सकरी चीनी मिलों के पुनर्जीवन के लिए सदस्यता अभियान शुरू

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📍 दरभंगा-मधुबनी | DarbhangaNews.in

मिथिलांचल की बंद पड़ी रैयाम चीनी मिल, दरभंगा और सकरी चीनी मिल, मधुबनी को लेकर एक बार फिर उम्मीद की किरण दिखाई दे रही है। करीब तीन दशक से बंद इन दोनों चीनी मिलों को सहकारी मॉडल पर दोबारा शुरू करने की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। इसी प्रक्रिया के तहत गन्ना किसानों को जोड़ने के लिए सदस्यता अभियान शुरू किया गया है।

इच्छुक गन्ना किसान 30 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। माना जा रहा है कि यदि यह प्रक्रिया सफल रही, तो मिथिलांचल की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिल सकती है।


📌 Highlights

✅ रैयाम और सकरी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की तैयारी तेज

✅ सहकारी मॉडल पर किसानों को मिल से जोड़ने की पहल

✅ इच्छुक किसान 30 जुलाई 2026 तक कर सकते हैं आवेदन

✅ जून 2026 में DPR जमा होने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी

✅ रैयाम चीनी मिल के लिए 1018 गांव गन्ना आपूर्ति क्षेत्र में शामिल

✅ किसानों को सहकारी समिति के जरिए भागीदारी और मालिकाना हक मिलने की उम्मीद


🌾 DPR के बाद सदस्यता अभियान शुरू

रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में दोनों चीनी मिलों के पुनरुद्धार के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) सरकार को सौंपा गया था। इसके बाद अब किसानों को सहकारी समिति से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

सरकार की योजना है कि इन मिलों को सिर्फ सरकारी परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि किसानों की भागीदारी वाले सहकारी मॉडल पर आगे बढ़ाया जाए।

इससे गन्ना उत्पादन, आपूर्ति, बीज, खाद और तकनीकी सहायता की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा सकेगा।


🏭 रैयाम और सकरी मिल का मिथिलांचल से पुराना रिश्ता

रैयाम चीनी मिल दरभंगा जिले के केवटी क्षेत्र की औद्योगिक पहचान रही है, जबकि सकरी चीनी मिल मधुबनी क्षेत्र की महत्वपूर्ण इकाई मानी जाती थी।

इन दोनों मिलों के बंद होने से—

  • 🌾 गन्ना किसानों को स्थानीय बाजार नहीं मिला
  • 👷 मजदूरों की रोजी-रोटी प्रभावित हुई
  • 🚜 गन्ना खेती का रकबा घटा
  • 🏪 छोटे कारोबारियों और परिवहन से जुड़े लोगों को नुकसान हुआ

अब इनके पुनरुद्धार की पहल से किसानों और स्थानीय लोगों में नई उम्मीद जगी है।


👨‍🌾 कौन बन सकता है सदस्य?

सदस्यता के लिए कुछ प्रमुख शर्तें तय की गई हैं।

पात्रता

  • किसान की उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
  • आवेदक संबंधित चीनी मिल के कमांड क्षेत्र का निवासी होना चाहिए।
  • किसान वर्तमान में गन्ने की खेती कर रहा हो या अगले दो पेराई सत्रों में गन्ना उत्पादन करने का संकल्प ले।
  • एक परिवार से केवल एक व्यक्ति को सदस्यता दी जाएगी।

भूमि की शर्त

  • सामान्य वर्ग के किसानों के पास करीब 2.5 एकड़ कृषि योग्य भूमि होनी चाहिए।
  • आरक्षित वर्ग के किसानों के लिए न्यूनतम 50 डिसमिल भूमि की शर्त रखी गई है।

🏛️ रैयाम चीनी मिल के लिए बनी जिला स्तरीय समिति

रैयाम चीनी मिल को फिर से चालू करने की प्रक्रिया को लेकर जिला स्तर पर भी तैयारी शुरू हो चुकी है।

रिपोर्ट के अनुसार, दरभंगा के जिलाधिकारी कौशल कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति बनाई गई है। इस समिति में केवटी विधायक डॉ. मुरारी मोहन झा को भी सदस्य बनाया गया है।

इससे उम्मीद है कि स्थानीय स्तर पर किसानों को जोड़ने और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में तेजी आएगी।


🗺️ 1018 गांवों को गन्ना आपूर्ति क्षेत्र में रखा गया

रैयाम चीनी मिल के आयोजना क्षेत्र के लिए दरभंगा और मधुबनी के कुल 1018 गांवों को गन्ना आपूर्ति क्षेत्र में शामिल किया गया है।

इनमें—

  • 📍 दरभंगा के 580 गांव
  • 📍 मधुबनी के 438 गांव

शामिल बताए गए हैं।

यह संकेत देता है कि परियोजना का असर सिर्फ एक मिल परिसर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़े क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था से जुड़ा होगा।


📉 बंद मिलों से टूटी थी स्थानीय अर्थव्यवस्था

रैयाम और सकरी चीनी मिलों के बंद होने से मिथिलांचल की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा था।

रिपोर्टों के अनुसार—

  • रैयाम चीनी मिल 1994 से बंद है।
  • सकरी चीनी मिल 1996-97 के आसपास बंद हुई बताई जाती है।
  • सकरी चीनी मिल की स्थापना 1933 में हुई थी।
  • रैयाम चीनी मिल की स्थापना 1914 में हुई थी।
  • सकरी मिल करीब 47 एकड़ क्षेत्र में फैली थी।
  • रैयाम मिल करीब 68 एकड़ क्षेत्र में फैली थी।

करीब तीन दशक से बंद पड़ी इन मिलों को लेकर अब पुनर्जीवन की उम्मीद मजबूत होती दिख रही है।


🧃 चीनी के साथ एथेनॉल प्लांट की भी उम्मीद

पहले की रिपोर्टों में इन मिल परिसरों में चीनी मिल के साथ एथेनॉल प्लांट लगाने की संभावना का भी जिक्र किया गया था।

यदि एथेनॉल प्लांट की योजना आगे बढ़ती है, तो इससे—

  • 🌾 किसानों को गन्ने का बेहतर बाजार मिलेगा।
  • 🏭 स्थानीय उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
  • 👷 रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
  • 🚚 परिवहन और छोटे कारोबार को लाभ होगा।

🤝 किसानों को मिलेगा मालिकाना हक

सहकारी मॉडल में किसानों की भूमिका केवल गन्ना आपूर्ति करने तक सीमित नहीं रहेगी।

नई व्यवस्था में किसान समिति से जुड़कर मिल संचालन में भागीदारी कर सकते हैं। स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि इस मॉडल से किसानों को सीधा मालिकाना हक और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी मिल सकती है।


📢 मिथिलांचल के लिए बड़ा औद्योगिक संकेत

रैयाम और सकरी चीनी मिलों का पुनरुद्धार केवल दो फैक्ट्रियों को फिर से चालू करने का मामला नहीं है। यह मिथिलांचल में—

  • कृषि आधारित उद्योग
  • ग्रामीण रोजगार
  • गन्ना खेती
  • स्थानीय व्यापार
  • सहकारी अर्थव्यवस्था

को फिर से जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।


📋 जरूरी जानकारी एक नजर में

विषयजानकारी
🏭 मिलेंरैयाम चीनी मिल, दरभंगा और सकरी चीनी मिल, मधुबनी
🤝 मॉडलसहकारी चीनी मिल मॉडल
📅 आवेदन अंतिम तिथि30 जुलाई 2026
👨‍🌾 पात्र किसानगन्ना उत्पादक या अगले दो पेराई सत्रों में गन्ना उत्पादन का संकल्प लेने वाले
🌾 भूमि शर्तसामान्य वर्ग 2.5 एकड़, आरक्षित वर्ग 50 डिसमिल
🗺️ रैयाम आपूर्ति क्षेत्रदरभंगा और मधुबनी के 1018 गांव
📈 उम्मीदकिसान, मजदूर और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति

📊 DarbhangaNews.in Analysis

मिथिलांचल के लिए रैयाम और सकरी चीनी मिलों का मुद्दा भावनात्मक और आर्थिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है। वर्षों से बंद इन मिलों ने गन्ना किसानों की उम्मीदों को कमजोर किया था, लेकिन अब सहकारी मॉडल के जरिए किसानों को भागीदार बनाकर पुनरुद्धार की कोशिश नई दिशा दे सकती है। सबसे महत्वपूर्ण चरण सदस्यता अभियान की सफलता होगी। यदि बड़ी संख्या में किसान इससे जुड़ते हैं, तो दरभंगा और मधुबनी की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को फिर से मजबूत आधार मिल सकता है।

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