Darbhanga News: बिहार के दरभंगा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। एक मदरसा में पढ़ने वाले चार नाबालिग बच्चे कथित रूप से शारीरिक प्रताड़ना से तंग आकर वहां से भाग निकले। ग्रामीणों ने जब बच्चों को देखा तो उनके पैरों में लोहे की जंजीर और ताला लगा हुआ था। बच्चों के शरीर पर चोट के निशान भी पाए गए, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया।
⚫ धूप में भटकते मिले चार बच्चे
जानकारी के अनुसार, चारों बच्चे मधुबनी जिले के रहने वाले हैं और दरभंगा के एक मदरसा में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। ग्रामीणों ने उन्हें गांव के पास तेज धूप में थके-हारे हालत में देखा।
बच्चे एक पेड़ की छांव में बैठे हुए थे और भूख-प्यास से परेशान नजर आ रहे थे। जब ग्रामीण उनके पास पहुंचे तो उनके पैरों में लोहे की जंजीर और ताला लगा देखकर सभी हैरान रह गए।
😢 बच्चों ने सुनाई दर्दनाक आपबीती
ग्रामीणों द्वारा खाना और पानी देने के बाद बच्चों ने अपनी आपबीती सुनाई।
बच्चों का आरोप है कि मदरसा संचालक मौलाना कादिर उन्हें अक्सर बुरी तरह पीटता था। इतना ही नहीं, उनसे जबरन मानव मल साफ करवाया जाता था।
बच्चों ने यह भी दावा किया कि उन्हें मदरसा से भागने से रोकने के लिए पैरों में जंजीर और ताला लगाया गया था।
🗣️ “हमें अक्सर मारा जाता था। बाहर जाने नहीं दिया जाता था और पैरों में जंजीर बांध दी जाती थी।”
🚨 शरीर पर मिले चोट के निशान
स्थानीय लोगों के अनुसार बच्चों के हाथ-पैर और शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के कई निशान दिखाई दे रहे थे।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे काफी डरे हुए थे और बार-बार घर जाने की बात कर रहे थे।
👮 पुलिस और चाइल्डलाइन ने संभाला मामला
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और चाइल्डलाइन की टीम मौके पर पहुंची।
अधिकारियों ने बच्चों का बयान दर्ज किया और मेडिकल जांच करवाई। सुरक्षा के मद्देनजर चारों बच्चों को बाल संरक्षण गृह भेज दिया गया है।
⚖️ मदरसा संचालक के खिलाफ FIR दर्ज
पुलिस अधिकारी की लिखित शिकायत के आधार पर मदरसा संचालक मौलाना कादिर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने पहले जीरो एफआईआर दर्ज की और बाद में मामले को संबंधित थाना क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया।
🔍 जांच जारी
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। प्रशासन ने कहा है कि बच्चों के आरोपों की गंभीरता से जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी।
यह घटना बच्चों की सुरक्षा और शैक्षणिक संस्थानों में निगरानी व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
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