भरत तिवारी एनकाउंटर पर उठे बड़े सवाल, ग्रामीणों ने लगाए फर्जी मुठभेड़ और भ्रष्टाचार छिपाने के आरोप

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Bihar News: भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। गंगा कटाव पीड़ितों की आवाज माने जाने वाले भरत तिवारी की मौत के बाद ग्रामीण खुलकर सामने आ गए हैं और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। गांव के लोगों का आरोप है कि भरत तिवारी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ रहे थे और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया।

क्या है पूरा मामला?

⚫ एनकाउंटर के बाद गांव में बढ़ा आक्रोश

भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद शाहपुर थाना क्षेत्र के जवईनिया और आसपास के गांवों में गुस्से का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि भरत किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं थे, बल्कि गंगा कटाव से प्रभावित परिवारों के हक के लिए लगातार संघर्ष कर रहे थे।

लोगों का आरोप है कि प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था।


🌊 गंगा कटाव पीड़ितों की आवाज बने थे भरत तिवारी

ग्रामीणों के अनुसार पिछले वर्ष गंगा नदी के कटाव में जवईनिया गांव के कई घर बह गए थे। सैकड़ों परिवार विस्थापित हो गए थे और पुनर्वास के लिए सरकार की ओर से करोड़ों रुपये जारी किए गए थे।

ग्रामीणों का दावा है कि भरत तिवारी लगातार यह मांग कर रहे थे कि सरकारी राशि का सही उपयोग हो और कटाव पीड़ितों को बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

🗣️ “वह अपने लिए नहीं, पूरे गांव के लिए लड़ रहा था।” — ग्रामीण


💰 सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पुनर्वास और विकास कार्यों के नाम पर भारी अनियमितताएं हुई हैं।

एक ग्रामीण छठू चौधरी ने कहा—

🗣️ “सरकार गरीबों के लिए पैसा भेजती है, लेकिन बीच में ही उसका दुरुपयोग हो जाता है। जो इसका विरोध करता है, उसे दबाने की कोशिश की जाती है।”

वहीं अन्य ग्रामीणों का कहना है कि भरत तिवारी लगातार इन मुद्दों को अधिकारियों के सामने उठा रहे थे।


⚠️ SDM पर धमकी देने का आरोप

मामले में सबसे बड़ा दावा गांव के कुछ लोगों ने किया है। ग्रामीण उपेंद्र गोंड का आरोप है कि भरत तिवारी को पहले से जान का खतरा था।

🗣️ “जगदीशपुर के SDM ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। इसी वजह से उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए पिस्टल खरीदी थी।”

हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


🔍 फर्जी एनकाउंटर के आरोप से गरमाया मामला

ग्रामीणों का कहना है कि यदि भरत तिवारी वास्तव में अपराधी होते तो पुलिस पर हमला करते या भागने की कोशिश करते।

🗣️ “वह पुलिस से बातचीत कर रहे थे। अगर उनका इरादा गलत होता तो पुलिस पर गोली चला सकते थे।”

यही वजह है कि गांव के लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।


👩‍🌾 महिलाओं ने भी खोला मोर्चा

गांव की महिलाओं का कहना है कि भरत तिवारी के प्रयासों से ही पुनर्वास स्थल पर बिजली और पानी जैसी सुविधाएं पहुंच सकीं।

एक महिला ने भावुक होकर कहा—

🗣️ “अगर समाज के लिए लड़ना पागलपन है, तो भरत पागल थे। उन्होंने हमेशा गरीबों की आवाज उठाई।”


⚖️ रिटायर्ड हाईकोर्ट जज से जांच की मांग

मामले को लेकर बढ़ते विवाद के बीच सरकार की ओर से हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जांच कराने की घोषणा की गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और यदि किसी स्तर पर गलत कार्रवाई हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी।


📢 अब न्याय का इंतजार

भरत तिवारी की मौत अब सिर्फ एक एनकाउंटर का मामला नहीं रह गया है। यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही, सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और आम लोगों की आवाज उठाने वालों की सुरक्षा से भी जुड़ गया है।

फिलहाल पूरे बिहार की नजर इस जांच पर टिकी हुई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच के बाद सच सामने आएगा और भरत तिवारी की मौत को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलेगा।

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