📍 दरभंगा एयरपोर्ट, दरभंगा | DarbhangaNews.in
दरभंगा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। ताजा अपडेट के अनुसार नए टर्मिनल का निर्माण कार्य 68% तक पूरा हो गया है। यह परियोजना ₹674.96 करोड़ की लागत से विकसित की जा रही है और इसे 30 नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पर अब तक ₹380.75 करोड़ खर्च हो चुके हैं, जो कुल लागत का 59.19% है।
दरभंगा एयरपोर्ट उत्तर बिहार और मिथिला क्षेत्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण हवाई केंद्रों में शामिल हो चुका है। मौजूदा छोटा टर्मिनल यात्रियों की बढ़ती संख्या के सामने सीमित पड़ रहा है। इसी जरूरत को देखते हुए 62,800 वर्ग मीटर क्षेत्र में नया टर्मिनल भवन तैयार किया जा रहा है, जिसमें व्यस्त समय में 3,000 यात्रियों को संभालने की क्षमता होगी। अभी मौजूदा टर्मिनल करीब 3,361 वर्ग मीटर का है और व्यस्त समय में लगभग 550 यात्रियों को संभाल पाता है।
नए टर्मिनल के साथ दरभंगा एयरपोर्ट की तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है। जांच काउंटर, सुरक्षा जांच, एयरोब्रिज, लिफ्ट, एस्केलेटर, सामान बेल्ट, वाहन पार्किंग, विमान खड़ा करने की जगह और कार्गो सुविधा जैसे कई बड़े बदलाव इस परियोजना का हिस्सा हैं।
📌 मुख्य बातें
✅ दरभंगा एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन 68% पूरा
✅ परियोजना की लागत ₹674.96 करोड़
✅ 30 नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य
✅ अब तक ₹380.75 करोड़ खर्च
✅ नया टर्मिनल 62,800 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनेगा
✅ व्यस्त समय में 3,000 यात्रियों की क्षमता
✅ 40 चेक-इन काउंटर और 9 सुरक्षा जांच काउंटर बनेंगे
✅ 5 एयरोब्रिज, 10 एस्केलेटर और 12 लिफ्ट की सुविधा
✅ 7 विमानों के लिए अलग एप्रन बनाया जा रहा है
✅ 860 वर्ग मीटर का कार्गो टर्मिनल भी बनेगा
✅ रात्रिकालीन उड़ान के लिए वायुसेना/रक्षा मंत्रालय से अंतिम परिचालन सहयोग अहम
🏗️ ऊंचा मार्ग और सुरंग का काम 98% तक पहुंचा
नए टर्मिनल परिसर के कई प्रमुख हिस्सों में अच्छी प्रगति दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार ऊंचे मार्ग और सुरंग से जुड़े काम 98% पूरे हो चुके हैं। बिजलीघर और वातानुकूलन संयंत्र का निर्माण 95% तक पहुंच गया है, जबकि सीवेज शोधन संयंत्र का काम 80% पूरा हो चुका है।
यह प्रगति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि टर्मिनल भवन केवल यात्रियों के बैठने या उड़ान पकड़ने की जगह नहीं होता। इसके साथ बिजली, पानी, सुरक्षा, स्वच्छता, यात्री आवाजाही, वाहन पार्किंग और विमान संचालन से जुड़ी पूरी व्यवस्था तैयार करनी होती है।
🧳 यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
दरभंगा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल में यात्रियों की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया गया है। मौजूदा 15 चेक-इन काउंटर की जगह नए भवन में 40 चेक-इन काउंटर होंगे। सुरक्षा जांच काउंटर की संख्या 3 से बढ़कर 9 हो जाएगी। यात्रियों को 5 एयरोब्रिज, 10 एस्केलेटर और 12 लिफ्ट की सुविधा मिलेगी। अभी मौजूदा भवन में ये आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
सामान लेने के लिए 4 बैगेज बेल्ट लगाए जाएंगे। अभी इनकी संख्या 2 है। इसके अलावा यात्रियों के लिए 5 विश्राम कक्ष भी प्रस्तावित हैं। इससे लंबी प्रतीक्षा, भीड़ और असुविधा की समस्या कम होने की उम्मीद है।
🛫 7 विमानों के लिए बनेगा अलग एप्रन
दरभंगा एयरपोर्ट अभी वायुसेना परिसर से जुड़ी सीमाओं के बीच संचालित होता है। नए प्रोजेक्ट में विमान खड़ा करने के लिए अलग एप्रन बनाया जा रहा है, जहां 7 विमान खड़े हो सकेंगे। इससे एयरपोर्ट को वायुसेना एप्रन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
नए टर्मिनल के साथ 250 कारों और 5 बसों के लिए पार्किंग सुविधा की भी योजना है। इससे यात्रियों को पिकअप-ड्रॉप और लंबी दूरी से आने वाले लोगों को राहत मिलेगी।
📦 पहली बार कार्गो सुविधा से व्यापार को फायदा
दरभंगा एयरपोर्ट पर 860 वर्ग मीटर क्षेत्र में अलग कार्गो टर्मिनल भी बनाया जाएगा। इसकी सालाना क्षमता 30,000 मीट्रिक टन और व्यस्त समय की क्षमता 80 मीट्रिक टन बताई गई है।
यह सुविधा मिथिला और उत्तर बिहार के लिए आर्थिक रूप से अहम हो सकती है। मखाना, फल, सब्जी, मधुबनी पेंटिंग, हस्तशिल्प और अन्य स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक तेजी से भेजने में कार्गो सुविधा मदद कर सकती है। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में भी दरभंगा एयरपोर्ट के पास कार्गो हब और लॉजिस्टिक्स पार्क के लिए करीब 50 एकड़ भूमि अधिग्रहण को लेकर बिहार कैबिनेट की ₹138.82 करोड़ की स्वीकृति का उल्लेख है।
🌙 रात्रिकालीन उड़ान पर क्या स्थिति है?
दरभंगा एयरपोर्ट पर रात्रिकालीन उड़ान लंबे समय से यात्रियों की बड़ी मांग रही है। खराब मौसम और सीमित दृश्यता के कारण सर्दियों में उड़ानें प्रभावित होती रही हैं। एयरपोर्ट निदेशक दिलीप कुमार ने कहा है कि ILS CAT-I हाल में लगाया गया है, जिससे खराब मौसम में उड़ान संचालन बेहतर होने की उम्मीद है।
हालांकि रात्रिकालीन उड़ान शुरू करने के लिए वायुसेना और रक्षा मंत्रालय से जुड़ा परिचालन सहयोग महत्वपूर्ण है, क्योंकि दरभंगा एयरपोर्ट वायुसेना स्टेशन से जुड़ा हुआ है। मई 2026 में राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर एटीसी वॉच आवर्स बढ़ाने, अतिरिक्त वायुसेना कर्मी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने का आग्रह किया था।
हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार उस समय दरभंगा एयरपोर्ट से प्रतिदिन करीब 18 उड़ानों का संचालन हो रहा था और एयरलाइंस शाम 5 बजे के बाद भी स्लॉट विस्तार चाहती थीं, लेकिन सीमित एटीसी वॉच आवर्स के कारण अतिरिक्त स्लॉट उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे।
🌿 पर्यावरण अनुकूल सुविधाएं भी शामिल
नए टर्मिनल प्रोजेक्ट में पर्यावरण अनुकूल सुविधाओं को भी शामिल किया गया है। इसमें 650 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र, चार इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन, 1,150 KLD क्षमता का सीवेज शोधन संयंत्र और रोजाना 1,100 किलोग्राम ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था शामिल है।
ऐसी व्यवस्था भविष्य में एयरपोर्ट के संचालन खर्च, ऊर्जा उपयोग और पर्यावरणीय प्रभाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।
📍 मिथिला और उत्तर बिहार को क्यों है बड़ा लाभ?
दरभंगा एयरपोर्ट से दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और नेपाल सीमा से जुड़े इलाकों के यात्रियों को बड़ा लाभ मिलता है। नया टर्मिनल शुरू होने के बाद यात्रियों की भीड़, उड़ान विलंब, सामान प्रबंधन और प्रतीक्षा से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं।
दरभंगा एयरपोर्ट ने 8 नवंबर 2020 को उड़ान योजना के तहत नागरिक उड़ान सेवा शुरू की थी। सीमित सुविधा और कम कर्मचारियों के बावजूद इस एयरपोर्ट पर करीब 30 लाख यात्रियों की आवाजाही दर्ज की जा चुकी है।
📊 जरूरी जानकारी एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| 📍 स्थान | दरभंगा एयरपोर्ट, दरभंगा |
| परियोजना | नया टर्मिनल भवन और संबंधित कार्य |
| निर्माण प्रगति | 68% |
| लागत | ₹674.96 करोड़ |
| खर्च | ₹380.75 करोड़ |
| लक्ष्य तिथि | 30 नवंबर 2026 |
| नया टर्मिनल क्षेत्र | 62,800 वर्ग मीटर |
| व्यस्त समय क्षमता | 3,000 यात्री |
| चेक-इन काउंटर | 40 |
| सुरक्षा जांच काउंटर | 9 |
| एयरोब्रिज | 5 |
| एस्केलेटर | 10 |
| लिफ्ट | 12 |
| विमान पार्किंग | 7 विमानों के लिए नया एप्रन |
| कार्गो टर्मिनल | 860 वर्ग मीटर |
| कार्गो क्षमता | 30,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष |
| रात्रिकालीन उड़ान | रक्षा/वायुसेना परिचालन सहयोग के बाद रास्ता साफ होगा |
🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण
दरभंगा एयरपोर्ट का नया टर्मिनल मिथिला और उत्तर बिहार के लिए केवल हवाई सुविधा का विस्तार नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास का बड़ा आधार बन सकता है। अभी एयरपोर्ट की सबसे बड़ी समस्या सीमित भवन, भीड़, कम सुविधाएं और मौसम पर निर्भरता रही है। नया टर्मिनल इन समस्याओं को काफी हद तक कम कर सकता है।
रात्रिकालीन उड़ान और खराब मौसम में बेहतर संचालन इस परियोजना की असली परीक्षा होगी। यदि ILS, एटीसी वॉच आवर्स, वायुसेना सहयोग और एयरलाइंस स्लॉट विस्तार समय पर पूरा होता है, तो दरभंगा से शाम और रात की उड़ानें शुरू हो सकती हैं। इससे पटना और बागडोगरा पर निर्भरता कम होगी।
कार्गो टर्मिनल और प्रस्तावित लॉजिस्टिक्स हब से दरभंगा एयरपोर्ट का आर्थिक महत्व और बढ़ेगा। मखाना, फल-सब्जी, मधुबनी पेंटिंग और स्थानीय उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है। इससे किसानों, व्यापारियों और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।
अब सबसे जरूरी है कि परियोजना समयसीमा के भीतर पूरी हो और रात्रिकालीन उड़ान से जुड़े रक्षा मंत्रालय/वायुसेना स्तर के अटके हुए परिचालन निर्णय भी जल्द साफ हों।








