3 महीने से वेतन नहीं, दरभंगा के शिक्षक कर्ज में डूबे

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दरभंगा जिले में नियोजित शिक्षकों का पिछले तीन महीने से वेतन भुगतान नहीं होने के कारण भारी नाराजगी और मायूसी का माहौल है। आर्थिक तंगी की स्थिति ऐसी हो गई है कि अब स्थानीय दुकानदारों ने भी शिक्षकों को उधार में राशन और जरूरी सामान देने से इनकार करना शुरू कर दिया है।

💰 वेतन नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी

हायाघाट क्षेत्र के कई नियोजित शिक्षकों ने बताया कि लगातार तीन महीने से मानदेय नहीं मिलने के कारण परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, दवा और घर के अन्य जरूरी खर्च पूरे करना अब बड़ी चुनौती बन गया है।

शिक्षकों का कहना है कि पैसे की कमी के कारण घर के बीमार सदस्यों का इलाज तक प्रभावित हो रहा है।

🕌 त्योहार पर भी नहीं मिली राहत

बिहार पंचायत-नगर प्रारंभिक शिक्षक संघ (मूल) के प्रदेश उपाध्यक्ष सह जिलाध्यक्ष रेजाउल्लाह ने कहा कि राज्य के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ है जब बकरीद जैसे बड़े पर्व पर भी शिक्षकों को वेतन नहीं मिल पाया।

उन्होंने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण हजारों शिक्षक परिवार आर्थिक और मानसिक तनाव झेल रहे हैं।

🛒 दुकानदारों ने बंद किया उधार

लगातार बकाया वेतन के कारण स्थानीय दुकानदारों ने भी शिक्षकों को उधार सामान देना बंद कर दिया है। इससे शिक्षकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

कई शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द वेतन भुगतान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

⚠️ क्यों फंसी सैलरी?

जानकारी के अनुसार बिहार में नियोजित शिक्षकों और बीपीएससी शिक्षकों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया अलग-अलग है। नियोजित शिक्षकों का वेतन ‘जीओबी मद’ और ‘एसएसए मद’ से जारी होता है।

वहीं कई स्तरों पर मैनुअल सत्यापन और प्रशासनिक देरी के कारण भुगतान प्रक्रिया अटक जाती है। स्कूल से लेकर बीईओ और डीपीओ कार्यालय तक फाइलों के लंबित रहने से पूरे जिले के शिक्षकों का वेतन रुक जाता है।

📌 विभाग पर उठ रहे सवाल

शिक्षकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण हर बार वेतन भुगतान में देरी होती है। हालांकि हाल ही में विभाग ने इस मामले में कई जिलों के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।

शिक्षकों की मांग है कि वेतन भुगतान की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया जाए ताकि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न हो।

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