एलिवेटेड रोड और ROB से बदलेगी शहर की कनेक्टिविटी, सुस्ती पर एजेंसियों को चेतावनी; 17 अगस्त को होगा स्थल निरीक्षण

एलिवेटेड रोड और ROB से बदलेगी शहर की कनेक्टिविटी, सुस्ती पर एजेंसियों को चेतावनी; 17 अगस्त को होगा स्थल निरीक्षण
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📍 दरभंगा | DarbhangaNews.in

दरभंगा शहर में आने वाले वर्षों की यातायात व्यवस्था को बदलने वाली एलिवेटेड रोड, रेल ओवरब्रिज और प्रमुख सड़क परियोजनाओं पर सरकार ने निगरानी बढ़ा दी है। 16 अगस्त 2026 को पटना में पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा में दरभंगा एलिवेटेड रोड, लोहिया चौक-पंडासराय एलिवेटेड मार्ग, नए एयरपोर्ट टर्मिनल का पहुंच मार्ग और कई ROB सहित जिले की महत्वपूर्ण परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा हुई। बैठक में बिहार भाजपा अध्यक्ष और दरभंगा नगर विधायक संजय सरावगी तथा विभागीय सचिव पंकज कुमार पाल समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह है कि जिन परियोजनाओं की गति लक्ष्य से पीछे है, उनकी अब मुख्यालय स्तर से लगातार निगरानी होगी। विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम सोमवार, 17 अगस्त 2026 को दरभंगा पहुंचकर निर्माण स्थलों का निरीक्षण करेगी। पथ निर्माण मंत्री ने भूमि अधिग्रहण, पेड़ों की कटाई, उपयोगिता सेवाओं को हटाने और रेलवे से समन्वय जैसी बाधाओं को जल्द दूर करने का निर्देश दिया है। काम में लापरवाही मिलने पर कार्यकारी एजेंसी को प्रतिबंधित करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

यह समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दरभंगा का एलिवेटेड कॉरिडोर केवल एक फ्लाईओवर परियोजना नहीं है। जिला प्रशासन के आधिकारिक भूमि अधिग्रहण रिकॉर्ड में दरभंगा रेलवे स्टेशन से दोनार चौक और कर्पूरी चौक होते हुए आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे तक तथा कर्पूरी चौक से लहेरियासराय और लोहिया चौक होते हुए एकमी चौक तक मार्ग के उन्नयन और एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए भूमि से संबंधित सामाजिक प्रभाव आकलन की प्रक्रिया दर्ज है।

📌 मुख्य बातें

✅ 16 अगस्त 2026 को पटना में दरभंगा की सड़क और पुल परियोजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा हुई।
✅ दरभंगा एलिवेटेड रोड और लोहिया चौक-पंडासराय एलिवेटेड रोड बैठक के प्रमुख विषय रहे।
✅ दिल्ली मोड़, कंगवा गुमटी, दोनार चौक, चट्टी चौक और पंडासराय के ROB की प्रगति की समीक्षा की गई।
✅ नए दरभंगा एयरपोर्ट टर्मिनल तक पहुंच मार्ग की स्थिति भी समीक्षा में शामिल रही।
✅ शिवधारा-हरपुर सड़क चौड़ीकरण और हराही-दिग्घी-गंगासागर तालाब एकीकरण परियोजना पर भी चर्चा हुई।
✅ भूमि अधिग्रहण, यूटिलिटी शिफ्टिंग और पेड़ हटाने जैसी बाधाओं के समाधान के निर्देश दिए गए।
✅ जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन और कार्यबल लगाने को कहा गया है।
✅ 17 अगस्त को मुख्यालय की वरिष्ठ टीम दरभंगा में निर्माण स्थलों का निरीक्षण करेगी।
✅ लापरवाह कार्यकारी एजेंसियों को डिबार करने तक की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

🏗️ एलिवेटेड कॉरिडोर का असली रूट क्या है?

दरभंगा के प्रस्तावित/निर्माणाधीन शहरी एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर अलग-अलग समय पर अलग लंबाई और लागत के आंकड़े सामने आए हैं। उपलब्ध निविदा विवरण के अनुसार मुख्य EPC पैकेज में 13.175 किलोमीटर के मार्ग के उन्नयन तथा दो/चार लेन एलिवेटेड कॉरिडोर का प्रावधान है। इसका मार्ग दरभंगा रेलवे स्टेशन से दोनार चौक और कर्पूरी चौक होते हुए आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे तथा कर्पूरी चौक से लहेरियासराय चौक और लोहिया चौक होते हुए एकमी चौक तक निर्धारित किया गया है। इस निविदा की अनुमानित लागत ₹1,214.90 करोड़ दर्ज की गई थी।

दूसरी ओर, पूर्व की सरकारी समीक्षा से जुड़ी रिपोर्टों में पूरे सड़क उन्नयन और एलिवेटेड कॉरिडोर कार्यक्रम के लिए ₹1,868.87 करोड़ की स्वीकृति का उल्लेख मिलता है। इसलिए ₹1,868.87 करोड़ और ₹1,214.90 करोड़ को एक ही आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा—पहला व्यापक स्वीकृत परियोजना लागत से जुड़ा बताया गया है, जबकि दूसरा 13.175 किमी EPC निविदा पैकेज की अनुमानित लागत है।

🚧 लोहिया चौक से पंडासराय तक भी बढ़ा फोकस

मार्च 2026 की समीक्षा में बताया गया था कि एलिवेटेड कॉरिडोर को लोहिया चौक के रास्ते पंडासराय में बन रहे ROB से जोड़ने पर सहमति बनी है। 16 अगस्त की नई समीक्षा में भी लोहिया चौक-पंडासराय एलिवेटेड रोड को अलग प्रमुख परियोजना के रूप में शामिल किया गया। इससे संकेत मिलता है कि शहर के भीतर एलिवेटेड नेटवर्क को रेलवे ओवरब्रिज और प्रमुख सड़क जंक्शनों के साथ एकीकृत करने पर जोर है।

हालांकि, इसकी अंतिम डिजाइन, अलग स्वीकृत लागत और पूर्ण होने की निश्चित तारीख का विस्तृत नवीन आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध स्रोतों में स्पष्ट नहीं है। इसलिए इसे पूरी तरह तैयार या जल्द खुलने वाली सड़क बताना अभी जल्दबाजी होगी।

🚆 पांच प्रमुख ROB पर सरकार की नजर

ताजा बैठक में दिल्ली मोड़, कंगवा गुमटी, दोनार चौक, चट्टी चौक और पंडासराय के रेल ओवरब्रिज की स्थिति पर चर्चा हुई।

इनमें दोनार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। मार्च 2026 की समीक्षा में इसे चार दिशाओं की कनेक्टिविटी देने वाले टू-लेन ROB के रूप में बताया गया था—दोनार से सोनकी, भठियारीसराय, कर्पूरी चौक और दरभंगा रेलवे स्टेशन की दिशाओं को जोड़ने की योजना है। इसी ROB के ऊपर से एलिवेटेड कॉरिडोर गुजरने की योजना भी बताई गई थी।

दरभंगा में रेलवे फाटक लंबे समय से शहरी जाम का बड़ा कारण रहे हैं। म्यूजियम, बेला, कंगवा, दोनार, चट्टी चौक और पंडासराय जैसे रेल क्रॉसिंग वाले क्षेत्रों में फाटक बंद होने पर यातायात का दबाव तेजी से बढ़ता है। मार्च 2026 की एक स्थानीय रिपोर्ट ने भी इन रेलवे फाटकों पर लगने वाले जाम को प्रमुख शहरी समस्या बताया था।

✈️ नए एयरपोर्ट टर्मिनल तक पहुंच मार्ग भी समीक्षा में

दरभंगा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल तक आने-जाने वाले यात्रियों के लिए सड़क संपर्क भी 16 अगस्त की समीक्षा में शामिल था। अधिकारियों ने नए दरभंगा एयरपोर्ट टर्मिनल के पहुंच मार्ग की प्रगति पर चर्चा की।

यह हिस्सा महत्वपूर्ण है क्योंकि नए टर्मिनल भवन का लाभ तभी पूरी तरह मिलेगा जब शहर, मुख्य सड़कों और एयरपोर्ट के बीच निर्बाध सड़क संपर्क उपलब्ध हो। फिलहाल उपलब्ध बैठक विवरण में इस पहुंच मार्ग की अलग लागत, पूर्ण लंबाई और अंतिम निर्माण समयसीमा स्पष्ट नहीं की गई है।

🛣️ शिवधारा-हरपुर सड़क का भी होगा चौड़ीकरण

शहर के बड़े एलिवेटेड और ROB प्रोजेक्ट के साथ सरकार ने स्थानीय सड़क क्षमता बढ़ाने को भी समीक्षा में शामिल किया है। शिवधारा से हरपुर तक सड़क के चौड़ीकरण की स्थिति पर चर्चा हुई। मार्च की समीक्षा में इस मार्ग की लंबाई करीब 4.40 किलोमीटर बताई गई थी और चौड़ीकरण कार्य शुरू करने की बात कही गई थी।

ऐसी संपर्क सड़कों का चौड़ीकरण जरूरी है क्योंकि मुख्य एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद यदि उनसे जुड़ने वाली सड़कों की क्षमता कम रही, तो यातायात की समस्या केवल एक चौराहे से दूसरे चौराहे पर स्थानांतरित हो सकती है।

🌳 जमीन, पेड़ और यूटिलिटी शिफ्टिंग बनी बड़ी चुनौती

बड़े शहरी निर्माण में केवल पुल या पिलर बनाना ही चुनौती नहीं है। 16 अगस्त की बैठक में भूमि अधिग्रहण, ट्रैफिक प्रबंधन, सड़क के अलाइनमेंट, बिजली-पानी जैसी उपयोगिता लाइनों की शिफ्टिंग और पेड़ों को हटाने जैसे मुद्दों की समीक्षा की गई। रेलवे, वन विभाग और जिला प्रशासन के साथ समन्वय कर इन बाधाओं को दूर करने का निर्देश दिया गया है।

भूमि प्रक्रिया पहले से चल रही है। दिसंबर 2025 में दरभंगा जिला प्रशासन ने एलिवेटेड कॉरिडोर से जुड़ी भूमि के सामाजिक प्रभाव आकलन की मसौदा रिपोर्ट पर जनसुनवाई की प्रक्रिया की सूचना प्रकाशित की थी। इससे स्पष्ट है कि परियोजना के कुछ हिस्सों में जमीन से संबंधित प्रक्रिया औपचारिक प्रशासनिक चरण से गुजर चुकी है।

⚠️ देरी हुई तो एजेंसी पर कार्रवाई

नई समीक्षा का सबसे सख्त हिस्सा जवाबदेही से जुड़ा है। पथ निर्माण विभाग ने कहा है कि जिन कार्यकारी एजेंसियों की लापरवाही से परियोजनाएं पीछे चल रही हैं, उनके खिलाफ डिबारमेंट यानी भविष्य के विभागीय कामों से प्रतिबंध जैसी कार्रवाई हो सकती है। निगरानी में लापरवाही करने वाले सरकारी अधिकारियों पर भी कार्रवाई की बात कही गई है।

विभाग ने परियोजनाओं को केवल फाइलों और समीक्षा बैठकों तक सीमित रखने के बजाय मुख्यालय स्तर की निगरानी और स्थल निरीक्षण से जोड़ने की बात कही है। 17 अगस्त का प्रस्तावित स्थल निरीक्षण इसी व्यवस्था का अगला कदम होगा।

📊 जरूरी जानकारी एक नजर में

विवरणजानकारी
मुख्य परियोजनादरभंगा शहरी एलिवेटेड कॉरिडोर
मुख्य EPC मार्गरेलवे स्टेशन-दोनार-कर्पूरी चौक-आमस दरभंगा एक्सप्रेसवे तथा कर्पूरी चौक-लहेरियासराय-लोहिया चौक-एकमी
EPC पैकेज की लंबाई13.175 किमी
निविदा अनुमानित लागत₹1,214.90 करोड़
व्यापक परियोजना से जुड़ी पूर्व स्वीकृति₹1,868.87 करोड़
समीक्षा किए गए ROBदिल्ली मोड़, कंगवा, दोनार, चट्टी चौक, पंडासराय
अन्य सड़कशिवधारा-हरपुर चौड़ीकरण
एयरपोर्ट परियोजनानए टर्मिनल का पहुंच मार्ग
ताजा समीक्षा16 अगस्त 2026
प्रस्तावित स्थल निरीक्षण17 अगस्त 2026
प्रमुख बाधाएंभूमि, यूटिलिटी शिफ्टिंग, पेड़, रेलवे/विभागीय समन्वय

परियोजना मार्ग और 13.175 किमी/₹1,214.90 करोड़ का निविदा विवरण उपलब्ध टेंडर रिकॉर्ड से पुष्ट होता है, जबकि ₹1,868.87 करोड़ व्यापक परियोजना स्वीकृति से जुड़ा पूर्व प्रकाशित आंकड़ा है।

🔍 DarbhangaNews.in विश्लेषण

दरभंगा के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात नई परियोजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि पहले से स्वीकृत और निर्माणाधीन परियोजनाओं को समय पर पूरा कराना है। शहर में एक साथ एलिवेटेड कॉरिडोर, ROB, एयरपोर्ट पहुंच मार्ग और सड़क चौड़ीकरण का नेटवर्क बनता है तो यातायात व्यवस्था में वास्तविक बदलाव संभव है।

लेकिन इसकी सफलता तीन बातों पर निर्भर करेगी—भूमि और उपयोगिता संबंधी बाधाओं का समय पर समाधान, अलग-अलग परियोजनाओं के डिजाइन का आपसी समन्वय और निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही। खासकर दोनार, पंडासराय और लोहिया चौक क्षेत्र में ROB तथा एलिवेटेड कॉरिडोर को एक-दूसरे के साथ जोड़ना तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण होगा।

ताजा बैठक में लापरवाह एजेंसियों पर कार्रवाई और मुख्यालय से निगरानी की बात सकारात्मक संकेत है, लेकिन जनता के लिए असली कसौटी जमीन पर दिखाई देने वाली प्रगति होगी। विभाग को प्रत्येक प्रमुख परियोजना की प्रतिशत प्रगति, संशोधित समयसीमा, लागत में बदलाव और बाकी बाधाओं की जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक करनी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि परियोजनाएं केवल समीक्षा बैठकों में आगे बढ़ रही हैं या वास्तव में निर्माण स्थल पर भी तय गति से काम हो रहा है।

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